Home Current Affairs चाक हाओ नामक सुगंधित चावल, भूगौलिक संकेत के रूप में पंजीकृत

चाक हाओ नामक सुगंधित चावल, भूगौलिक संकेत के रूप में पंजीकृत

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चाक हाओ नामक सुगंधित चावल, भूगौलिक संकेत के रूप में पंजीकृत

मणिपुर में उगाए जाने वाले चाक हाओ नामक सुगंधित चावल को जीआई अर्थात भूगौलिक संकेत के रूप में पंजीकृत किया गया है। इसे ब्लैक राइस भी कहा जाता है।

वाण्जिय और उद्योग मंत्रालय की भूगौलिक संकेतक रजिस्टरी ने अपनी वेबसाइट पर घोषणा की है कि मणिपुर का चाक हाओ चावल 364 नम्बर पर जी आई प्रमाण पत्र के अंतर्गत पंजीकृत किया गया है।

राज्य के किसानों को आर्थिक लाभ पहुंचाने और इसमें पाए जाने वाले औषधीय गुणों से अधिकांश लोगों को लाभ प्रदान कराने के मकसद से मणिपुर सरकार को भारत के अन्य राज्यों से करीब एक वर्ष तक प्रतिस्पर्धा करनी पड़ी है।

क्‍या है भौगोलिक संकेतन?

भारत में भौगोलिक संकेतन वस्तुओं के भौगोलिक संकेत अधिनियम 1999 (पंजीकरण और सुरक्षा) के आधार पर प्रदान किए जाते हैं। यह एक ऐसा संकेत है जो वस्तुओं की पहचान सुनिश्चित करता है यह पहचान कृषि उत्पाद, विनिर्मित उत्पाद तथा प्राकृतिक वस्तुओं को उनके विशेष क्षेत्र (राज्य/दिश) में उत्पन्न होने के कारण प्रदान की जाती है।

शिल्पकार दरअसल भारतीय हस्तशिल्प सेक्टर की रीढ़ हैं और उनमें विशेष कौशल, तकनीकी एवं पारंपरिक शिल्पकला अंतर्निहित है।

भौगोलिक संकेतक सामान्यत: 10 वर्ष के लिए दिया जाता है 10 साल के बाद इसका नवीनीकरण कराना होता है।

क्या होता है भौगोलिक संकेतन का फायदा?

इससे उत्पाद की विश्वसनीयता में बढ़ावा होता है तथा उत्पाद को विशेषता प्राप्त होती है। इसके माध्यम से पुरानी जानकारी, उत्पादों, विनिर्माण की प्रक्रिया को रक्षित किया जाता है।

भौगोलिक संकेतन से संबंधित उत्पाद के उत्पादन के निवेश के लिए निवेशक आसानी से मिल जाते हैं। इससे संबंधित क्षेत्र का विकास होता है तथा संबंधित क्षेत्र में समृद्धता आती है।

इससे उपभोक्ता को भी फायदा होता है उन्हें विशुद्ध उत्पाद प्राप्त होते हैं और उन्हें जाली उत्पादों से छुटकारा मिलता है।

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