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भारतीय रेल ने सर्वोत्तम तकनीकी प्रथाओं और संसाधनों के इष्टतम उपयोग को अपनाकर देश में स्व-स्थायी रेलवे स्टेशनों का कर रहा विकास

यात्रियों की संतुष्टि और अनुभव को बेहतर करने के लिए नई दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनल स्टेशन पर यात्रियों के लिए कई नई सुविधाओं का उद्घाटन


भारतीय रेल सर्वोत्तम तकनीकी प्रथाओं और संसाधनों के इष्टतम उपयोग के जरिये देश में सुरक्षा, आराम, उपयोगकर्ता के अनुकूल यात्री सुविधाओं, मूल्यवर्धित सेवाओं और दक्षता के उच्च मानकों के साथ स्व-स्थायी रेलवे स्टेशन विकसित कर रहा है।
यात्रियों की संतुष्टि और अनुभव को बेहतर करने के उद्देश्य से भारतीय रेल ने नई दिल्‍ली के आनंद विहार टर्मिनल स्टेशन पर कई यात्री सुविधाओं की शुरुआत की है। यह रेलवे स्‍टेशन एक मल्टी मॉडल हब के रूप में उभर रहा है जिसके समीप दो मेट्रो स्टेशन और आईएसबीटी पहले से ही मौजूद हैं और मेरठ मार्ग पर जल्‍द ही आरआरटीएस स्टेशन बनने जा रहा है।
गैर-एसी प्रतीक्षालय को एलईडी टीवी और स्नैक बार से लैस करते हुए अपग्रेड किया गया है। उसके लिए कोई प्रवेश शुल्क नहीं लिया जाएगा। यात्री पहले दो घंटे के लिए 20 रुपये और उसके बाद प्रत्येक घंटे के लिए 10 रुपये का मामूली शुल्क देकर वातानुकूलित प्रतीक्षालय की सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। प्रतीक्षालय को कुशन वाली कुर्सियों, एलईडी टीवी और स्नैक बार से लैस किया गया है।
स्टेशन पर एक क्विक फूड रेस्तरां शुरू किया गया है जहां यात्रियों को पैकेटबंद भोजन मिल सकता है। फूड जॉइंट में भी यात्रियों के लिए बैठने की सुविधा है। यात्री अब आनंद विहार टर्मिनल रेलवे स्टेशन पर परिचालित कियोस्‍क द न्यू शॉप से अनूठे उत्पादों की खरीदारी कर सकते हैं जहां देश भर के भारतीय स्टार्ट-अप और एमएसएमई से अनोखे एवं प्रामाणिक उपभोक्‍ता उत्‍पादों की आपूर्ति की गई है। एक धर्मादा बुक स्टॉल और एक मोबाइल चार्जिंग कियोस्क का भी उद्घाटन किया गया। कियोस्क में लॉकर सुरक्षित चार्जिंग पॉइंट और टच स्क्रीन संचालन सुविधा। यह सभी प्रकार के मोबाइल फोन और टैबलेट के लिए उपयुक्‍त है।
सस्ती दरों पर यात्रियों को उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से एक जेनेरिक दवा की दुकान का उद्घाटन किया गया है। यह पहल भारतीय रेलवे पर अपनी तरह की पहली पहल है। स्वस्थ/ फिट इंडिया अभियान के तहत एक फिट इंडिया स्क्वाट कियोस्क स्थापित किया गया है जहां कियोस्क के सामने एक यात्री द्वारा 30 स्क्वैट एक मुफ्त प्लेटफॉर्म टिकट उत्पन्न करेगा। साथ ही एक मालिशकियोस्क और एक पल्स हेल्‍थ मशीन भी स्‍थापित की गई है। यात्री मामूली कीमत पर इन सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं।
प्लेटफॉर्म पर और स्टेशन परिसर में स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए गीले और सूखे कचरे के अलगाव के लिए एनजीटी दिशानिर्देशों के अनुसार रेलवे स्टेशन पर ब्लू और ग्रीन कचरा बैग के साथ डस्टबिन लगाए गए हैं। एनजीटी दिशानिर्देश के अनुसार पीईटी पानी की बोतलों के उचित निपटान के लिए बॉटल क्रशिंग मशीन स्थापित की गई है। सीएसआर पहल के तहत रेलवे स्टेशन पर विभिन्न तरह की बागवानी आदि की गई है।
ईट राइट स्टेशनऑडिट जनवरी 2020 में आनंद विहार टर्मिनल में आयोजित किया गया था और इस स्टेशन ने पांच सितारा रेटिंग के साथ भारतीय रेलवे में सबसे अधिक 92% अंक प्राप्त किए। ईट राइट स्टेशनएफएसएसएआई द्वारा अनिवार्य प्रमाणन है जिसका मुख्य कारण यात्रियों को स्वस्थ भोजन विकल्प बनाने में मदद करना है।
आनंद विहार रेलवे स्टेशन को आईएसओ 14001:2015 प्रमाणन 27.09.2019 को मिला। स्टेशन ने आईजीबीसी (इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल) ग्रीन रेलवे स्टेशनों रेटिंग प्रणाली द्वारा सिल्वररेटिंग हासिल की।
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By PIB

थरूर बोले भाजप की घटिया राजनीति

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पत्नी मेलानिया ट्रंप की दिल्ली के सरकारी स्कूल में जाने के कार्यक्रम से मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया का नाम हटाए जाने को लेकर विवाद पैदा हो गया है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने इसे लोकतंत्र के लिए अस्वस्थ परंपरा बताया है.

शशि थरूर ने ट्वीट किया, आधिकारिक अवसरों के लिए चुनिंदा निमंत्रण भेजने की इस तरह की क्षुद्र राजनीति को मोदी सरकार द्वारा शुरू किया गया, जो हमारे लोकतंत्र के लिए अस्वस्थ है.

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के भोज और स्वागत कार्यक्रम से विपक्ष को अलग करना तुच्छ लग सकता है, लेकिन यह भारत को कमजोर करता है.

असल में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा के दौरान उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप और बेटी इवांका भी आएंगी. मेलानिया ट्रंप दिल्ली के सरकारी स्कूल में भी जाने वाली हैं.

लेकिन मेलानिया के इस कार्यक्रम से अब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया का नाम हटा दिया गया है. इसे ही लेकर शशि थरूर ने ये टिप्पणी की है.

पीएम-किसान योजना ने 24 फरवरी, 2020 को एक वर्ष पूर्ण किया

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के अंतर्गत 8 करोड़ 46 लाख से अधिक किसानों को शामिल किया गयाकेंद्र सरकार हर वर्ष तीन किश्तों में 6000 रुपये लाभार्थियों को करती है हस्तांतरित
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) नामक एक नवीन केंद्रीय क्षेत्र योजना की 24 फरवरी, 2020 को प्रथम वर्षगांठ है। इस योजना का शुभारंभ देश भर के सभी खेतीहर किसानों के परिवारों को आय सहायता प्रदान करके किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया था, ताकि उनकी कृषि और संबद्ध गतिविधियों के साथ-साथ घरेलू व्यय की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके। इस योजना के तहत प्रति वर्ष 6,000 रुपये की राशि को 2000 रुपये की तीन मासिक किस्तों में प्रत्येक चौथे माह किसानों के बैंक खातों में सीधे हस्तांतरित किया जाता है। उच्च आय की स्थिति से संबंधित मामले अपवाद के रूप में कुछ मानदंडों के अधीन है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इस योजना का औपचारिक रूप से शुभारंभ 24 फरवरी, 2019 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में एक भव्य समारोह के साथ किया था।
यह योजना 01 दिसम्बर, 2018 से प्रभावी है। पात्रता के संबंध में लाभार्थियों की पहचान के लिए समय सीमा तिथि 01 फरवरी, 2019 थी। लाभार्थियों की पहचान का पूर्ण दायित्व राज्य/केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारों पर है। योजना के लिए एक विशेष वेब-पोर्टल www.pmkisan.gov.in प्रारंभ किया गया है। लाभार्थियों को वित्तीय लाभ पीएम-किसान वेब-पोर्टल पर उनके द्वारा तैयार और अपलोड किए गए आंकड़ों के आधार पर जारी किए जाते हैं।
इस योजना के तहत प्रारंभ में पूरे देश में 2 हेक्टेयर तक की कृषि योग्य भूमि रखने वाले सभी छोटे और सीमांत किसानों के परिवारों को आय सहायता प्रदान की गई। बाद में 01 जून 2019 से इसके दायरे को विस्तारित करते हुए देश के सभी खेतीहर किसान परिवारों को इसमें शामिल किया गया। हालाकि पिछले मूल्यांकन वर्ष में, आयकर अदा करने वाले प्रभावशाली पेशेवर किसानों जैसे चिकित्सकों, अभियंताओं, अधिवक्ताओं, सनदी लेखाकारों और प्रति माह कम से कम 10,000 रुपये के पेंशनभोगियों (एमटीएस/चतुर्थ श्रेणी/ समूह घ कर्मचारी को छोड़कर) को इस योजना से बाहर रखा गया है। पूर्वोत्तर राज्यों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, जहां भूमि स्वामित्व के अधिकार समुदाय आधारित हैं, वन निवासी और झारखंड, जिनके पास भूमि के अद्यतन रिकॉर्ड और भूमि हस्तांतरण पर प्रतिबंध नहीं है।
नामांकन के लिए, किसान को राज्य सरकार द्वारा नामित स्थानीय पटवारी/राजस्व अधिकारी/नोडल अधिकारी (पीएम-किसान) से संपर्क करना होगा। किसान पोर्टल में फारमर्स कॉर्नर के माध्यम से अपना स्व-पंजीकरण भी करा सकते हैं। पोर्टल में फारमर्स कॉर्नर के माध्यम से किसान अपने आधार डेटाबेस कार्ड के अनुसार पीएम-किसान डेटाबेस में अपने नाम में सुधार कर सकते हैं। पोर्टल में फारमर्स कॉर्नर के माध्यम से किसान अपने भुगतान की स्थिति भी जान सकते हैं। लाभार्थियों के ग्राम-वार विवरण भी फारमर्स कॉर्नर पर उपलब्ध हैं।
कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) को भी शुल्क के भुगतान पर योजना के लिए किसानों के पंजीकरण के लिए अधिकृत किया गया है। फारमर्स कॉर्नर पर दी गई उपरोक्त सुविधाएं सीएससी के माध्यम से भी उपलब्ध हैं। कृषि जनगणना 2015-16 के आधार पर, इस योजना के तहत लाभान्वित होने वाले कुल लाभार्थियों की संख्या 14 करोड़ है। पीएम-किसान पोर्टल में राज्य नोडल अधिकारी (एसएनओ) द्वारा पंजीकृत लाभार्थी 4 माह की अवधि से अपने लाभ के हकदार हैं। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने स्थिति सत्यापन के लिए 24 घंटे 7 दिन कार्य करने वाली एक स्वचालित आईवीआरएस आधारित हेल्पलाइन का भी शुभारंभ किया है। किसान अपने आवेदन की स्थिति जानने के लिए 1800-11-5526 या 155261 डायल कर सकते हैं। इसके अलावा, किसान अब ईमेल pmkisan-ict@gov.in पर पीएम किसान टीम से संपर्क कर सकते हैं। राज्य सरकारें किसानों के लिए समय-समय पर शिविरों का भी आयोजन कर रही हैं ताकि उनके आवेदन विवरणों में सुधार किया जा सके। 1 दिसंबर, 2019 को या उसके बाद मिलने वाली सभी किस्तों का भुगतान लाभार्थियों को केवल आधार प्रमाणीकृत बैंक डेटा के आधार पर ही किया जा रहा है ताकि वास्तविक लाभार्थियों को सुनिश्चित करने के साथ-साथ दोहरे भुगतान से बचा जा सके। असम और मेघालय के अलावा केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर एवं लद्दाख को 31 मार्च 2020 तक इस आवश्यकता से छूट दी गई है।
केंद्र सरकार अब तक 50850 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि जारी कर चुकी है। कृषि जनगणना 2015-16 के अनुमानों के आधार पर, योजना के अंतर्गत आने वाले लाभार्थियों की कुल संख्या लगभग 14 करोड़ है। 20 फरवरी, 2020 तक, राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश सरकारों द्वारा पीएम-किसान वेब पोर्टल पर अपलोड किए गए लाभार्थियों के आंकड़ों के आधार पर, 8.46 करोड़ किसान परिवारों को लाभ दिया गया है। राज्यवार विवरण नीचे दिया गया है:

20-02-2020 को पीएम-किसान के लाभार्थी

राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश

किसानों/परिवारों की संख्या

अंडमान व निकोबार द्वीप समूह

16,521

आंध्र प्रदेश

51,17,791

बिहार

53,60,396

चंडीगढ़

423

छत्तीसगढ़

18,80,822

दादरा और नगर हवेली

10,462

दमन और दीव

3,466

दिल्ली

12,896

गोवा

7,248

गुजरात

48,75,048

हरियाणा

14,55,118

हिमाचल प्रदेश

8,72,175

जम्मू और कश्मीर

9,34,299

झारखंड

14,36,023

कर्नाटक

49,12,445

केरल

27,73,306

लक्षद्वीप

मध्य प्रदेश

55,19,575

महाराष्ट्र

84,59,187

ओडिशा

36,28,657

पुडुचेरी

9,736

पंजाब

22,40,189

राजस्थान

52,04,520

तमिलनाडु

35,34,527

तेलंगाना

34,81,656

उत्तर प्रदेश

1,87,64,926

उत्तराखंड

7,01,855

पश्चिम बंगाल

कुल (1)

8,12,13,267

पूर्वोत्तर के राज्य

अरुणाचल प्रदेश

50,823

असम

27,04,200

मणिपुर

1,73,789

मेघालय

70,236

मिजोरम

67,540

नगालैंड

1,70,334

सिक्किम

1,372

त्रिपुरा

1,96,767

कुल (2)

34,35,061

कुल योग (1+2)

8,46,48,328

इस योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक व्यापक निगरानी तंत्र बनाया गया है। केंद्र के स्तर पर योजना में आवश्यक संशोधन के लिए केंद्रीय वित्त, कृषि और भूमि संसाधन मंत्रियों से युक्त एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। व्यय विभाग (डीईए), कृषि, सहकारिता और किसान कल्याण विभाग (डीएसी एंड एफडब्ल्यू), भूमि संसाधन और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिवों के साथ कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में राष्ट्रीय स्तर पर एक समीक्षा समिति समय-समय पर सदस्यों के रूप में योजना के कार्यान्वयन की समीक्षा और निगरानी करती है। संयुक्त सचिव स्तर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के तहत केन्द्रीय परियोजना निगरानी इकाई (पीएमयू) इस योजना के कार्यान्वयन और प्रचार आदि की निगरानी करती है। राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों के स्तर पर, नोडल विभाग और पीएमयू योजना के कार्यान्वयन की निरंतर निगरानी करते हैं, जबकि राज्य और जिला स्तर की निगरानी समितियों का भी गठन किया गया है।
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By PIB

3 मिनट में 30 उठक-बैठक करने पर प्लेटफॉर्म टिकट मुफ्त!

दिल्ली के आनंद विहार रेलवे स्टेशन पर फिट इंडिया अभियान के तहत फ्री प्लेटफॉर्म टिकट हासिल करने के लिए एक मशीन लगाई गई है.

इस मशीन का नाम ‘squat kiosk’ या ‘स्क्वाट मशीन’ है. नियम के अनुसार 180 सेकेंड में 30 बार दंड-बैठक (उठक-बैठक) करने पर लोगों को प्लेटफॉर्म टिकट मुफ्त में मिल जाएगा.

इसके टिकट के लिए 10 रुपए चुकाने पड़ते हैं. लिहाजा अब उठक-बैठक करके आप 10 रुपए की बचत भी कर सकते हैं. अब सोशल मीडिया पर यह वीडियो वायरल हो रहा है.

क्या करना होगा?
●फ्री प्लेटफॉर्म टिकट हासिल करने के लिए आपको सबसे पहले मशीन के सामने बने पदचिन्हों पर जाकर खड़ा होना होगा
●और मशीन पर लगे कैमरा से आपके चेहरे को स्कैन करने का इंतजार करना होगा.
●अब दंड बैठक / उठक बैठक शुरू करनी होगी और 180 सेकेंड यानि कि तीन मिनट में अगर आप 30 बार उठक बैठक करने में सफल रहते हैं
●तो आपके लिए तुरंत ही मशीन से फ्री प्लेटफॉर्म टिकट निकल जाएगा.

वीडियो वायरल http://bit.ly/38Rfv5s

राष्ट्रपति ट्रंप का एक रात का किराया आठ लाख रुपये

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रंप भारत के दो दिवसीय दौरे पर आ रहे हैं. अपने यात्रा के क्रम में डोनाल्ड ट्रंप अहमदाबाद, आगरा और दिल्ली जाएंगे.

सरकार डोनाल्ड ट्रंप के दौरे को यादगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती. इसके लिए सुरक्षा और प्रवास और खान-पान समेत ट्रंप की रूचि का भी ध्यान रखा जा रहा है.

अहमदाबाद और ताज का दीदार के बाद दिल्ली में ट्रंप के प्रवास को यादगार बनाया जा रहा है. दिल्ली में ट्रंप पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतियों की तरह मौर्या होटल में प्रवास करेंगे. ऐसे में इस शानदार पांच सितारा होटल के बारे में जानना दिलचस्प होगा.

राष्ट्रपति के प्रवास के लिए मौर्या होटल को बुक किया गया

अमहदाबाद और ताजमहल देखने के बाद ट्रंप अपने परिवार के साथ दिल्ली में रुकेंगे. ट्रंप के रात्रि विश्राम के लिए मौर्या होटल के प्रेसिडेंशियल फ्लोर पर चाणक्य सुइट बुक किया गया है.

खबरों के मुताबिक, चाणक्य सुइट में एक रात ठहरने का किराया 8 लाख रुपये है. चाणक्य सुइट चाणक्यपुरी में 4600 स्कवायर फीट के क्षेत्र में बनाया गया है.

इसमें विशेष दरवाजा, तेज गति से चलनेवाला एलिवेटर और मेहमान की सुरक्षा के लिए चाक चौबंद कंट्रोल रूम है.

इसकी खिड़की में बुलेट प्रूफ ग्लास लगाया गया है. सुइट में दो रूम, एक बड़ा लिविंग रूम, 12 सीटर निजी डाइनिंग रूम के साथ छोटा स्पा मुख्य आकर्षण का केंद्र है.

प्रेसिडेंशिलय सुइट में उद्योगपतियों के साथ मीटिंग करने की भी विशेष व्यवस्था है. पारंपरिक रूप लिये हुए तैयब मेहता की पेंटिंग्स को सुइट की दीवारों पर लगाया गया है.

कोरोनावायरस को लेकर भारत ने किया चीन पर आरोप

कोरोनावायरस से चीन में अब तक हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं। वुहान से भारतीयों को निकालने के लिए सरकार ने 20 फरवरी को एक सैन्य विमान भेजने का फैसला किया था।

लेकिन, वायुसेना के इस विमान को चीनी अफसरों की तरफ से क्लीयरेंस नहीं मिल पाया है। भारतीय अफसरों का कहना है कि दुनिया के कई देश चीन को मदद और अपने नागरिकों को लाने के लिए फ्लाइट्स भेज रहे हैं।

सभी को चीन अनुमति दे रहा है, लेकिन भारतीय रिलीफ फ्लाइट्स को परमिशन नहीं दी जा रही? इस पर चीनी दूतावास ने कहा- हुबेई में हालात जटिल हैं और बीमारी की रोकथाम के इंतजाम के लिए युद्धस्तर पर काम जारी है। जान-बूझकर फ्लाइट क्लीयरेंस नहीं देने जैसी कोई बात नहीं है।

भारतीय अफसरों का यह भी कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को बाकायदा पत्र लिखकर इस आपदा में चीनी सरकार और लोगों के साथ रहने और हरसंभव मदद करने की बात कही थी।

चीन के रवैये से लगता है कि वे भारत से मदद नहीं लेना चाहते। इधर, चीनी अधिकारियों ने कहा- हमारे लिए भारतीयों की सेहत और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। दोनों देश इसको लेकर बातचीत कर रहे हैं। हमने भारत के नागरिकों की वापसी में पूरी सहायता की है।

अमेरिका की भारत के साथ बातचीत को लेकर पाकिस्तान को नसीहत

अपने भारत दौरे से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव में कम करने की कोशिश कर रहे हैं।

ट्रंप के दौरे से ठीक पहले व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को जोर देते हुए कहा कि दोनों पड़ोसियों(भारत और पाकिस्तान) के बीच कोई सफल वार्ता तभी संभव होगी, जब पाकिस्तान अपनी जमीन पर आतंकवादियों और चरमपंथियों के खिलाफ कार्रवाई कर उनके खिलाफ शिकंजा कसेगा।

गौरतलब है कि पिछले साल 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त करने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया था।

भारत के फैसले ने पाकिस्तान से तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा कीं, जिसके बाद पाकिस्तान ने भारत के साथ अपने राजनयिक संबंधों को कम किया और भारतीय दूत को पाकिस्तान से वापस भेज दिया।

ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी से जब सवाल किया गया कि क्या ट्रंप अपनी आगामी भारत यात्रा के दौरान कश्मीर मुद्दे पर फिर से मध्यस्थता करने की पेशकश करेंगे, इसके जवाब में

उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है, कि आप राष्ट्रपति से जो सुनेंगे, वह भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को कम करने के लिए दोनों देशों को एक-दूसरे के साथ द्विपक्षीय वार्ता में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करना चाहते है।’

नई दिल्ली में पहले अंतरराष्ट्रीय न्यायिक सम्मेलन में प्रधानमंत्री का उद्घाटन भाषण

भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबड़े, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद जी, मंच पर उपस्थित सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश गण, अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया, इस कॉन्फ्रेंस में आए दुनिया के अन्य उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश, भारत के सुप्रीम कोर्ट और हाइकोर्ट्स के सम्मानित न्यायाधीश, अतिथिगण, देवियों और सज्जनों !!

दुनिया के करोड़ों नागरिकों के लिए न्याय और गरिमा सुनिश्चित करने वाले आप सभी दिग्गजों के बीच आना, अपने आप में बहुत सुखद अनुभव है।

न्याय की जिस कुर्सी पर आप सभी बैठते हैं, उसका सामाजिक जीवन में भरोसे और विश्वास का महत्वपूर्ण स्थान है।

आप सभी का बहुत-बहुत अभिनंदन !!!

साथियों,

यह कॉन्फ्रेंस, 21वीं सदी के तीसरे दशक की शुरुआत में हो रही है। यह दशक भारत सहित पूरी दुनिया में होने वाले बड़े बदलावों का दशक है। ये बदलाव सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी, हर मोर्चे पर होंगे।

ये बदलाव तर्कसंगत होने चाहिए और न्यायसंगत भी होने चाहिए, ये बदलाव सबके हित में होने चाहिए, भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए होने चाहिए, और इसलिए ‘न्यायिक तंत्र और बदलता विश्व’ विषय पर मंथन बहुत महत्वपूर्ण है।

साथियों, यह भारत के लिए बहुत सुखद अवसर भी है कि यह महत्वपूर्ण कॉन्फ्रेंस, आज उस कालखंड में हो रही है, जब हमारा देश, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मना रहा है।

पूज्य बापू का जीवन सत्य और सेवा को समर्पित था, जो किसी भी न्यायतंत्र की नींव माने जाते हैं।

और हमारे बापू खुद भी तो वकील थे, बैरिस्टर थे। अपने जीवन का जो पहला मुकदमा उन्होंने लड़ा, उसके बारे में गांधी जी ने बहुत विस्तार से अपनी आत्मकथा में लिखा है।

गांधी जी तब बंबई, आज के मुंबई में थे। संघर्ष के दिन थे। किसी तरह पहला मुकदमा मिला था लेकिन उन्हें कहा गया कि उस केस के ऐवज में उन्हें किसी को कमीशन देना होगा।

गांधी जी ने साफ कह दिया था कि केस मिले या न मिले, कमीशन नहीं दूंगा।

सत्य के प्रति, अपने विचारों के प्रति गांधी जी के मन में इतनी स्पष्टता थी।

और ये स्पष्टता आई कहां से?

उनकी परवरिश, उनके संस्कार और भारतीय दर्शन के निरंतर अध्ययन से।

मित्रों,

भारतीय समाज में ‘कानून के नियम’ सामाजिक संस्कारों के आधार रहे हैं।

हमारे यहां कहा गया है- ‘क्षत्रयस्य क्षत्रम् यत धर्म:’। यानि ‘कानून राजाओं का राजा है, यानी कानून सर्वोपरि है।’ हजारों वर्षों से चले आ रहे ऐसे ही विचार ही हर भारतीय की न्यायपालिका पर अगाध आस्था की बड़ी वजह हैं।

साथियों,

हाल में कुछ ऐसे बड़े फैसले आए हैं, जिनको लेकर पूरी दुनिया में चर्चा थी।

फैसलों से पहले अनेक तरह की आशंकाएं व्यक्त की जा रही थीं। लेकिन हुआ क्या? 130 करोड़ भारतवासियों ने न्यायपालिका द्वारा दिए गए इन फैसलों को पूरी सहमति के साथ स्वीकार किया। हजारों वर्षों से, भारत, न्याय के प्रति आस्था के इन्हीं मूल्यों को लेकर आगे बढ़ रहा है। यही हमारे संविधान की भी प्रेरणा बना है। पिछले वर्ष ही हमारे संविधान को 70 वर्ष पूरे हुए हैं।

संविधान निर्माता डॉक्टर बाबा साहब अंबेडकर ने कहा था-

“संविधान महज एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, यह जीवन को आगे बढ़ाने का माध्यम है और इसका आधार हमेशा ही विश्वास रहा है।”

इसी भावना को हमारे देश की अदालतों, हमारे सुप्रीम कोर्ट ने आगे बढ़ाया है।

इसी भावना को हमारी विधायी और कार्यकारी शक्तियों ने जीवंत रखा है।

एक दूसरे की मर्यादाओं को समझते हुए, तमाम चुनौतियों के बीच कई बार देश के लिए संविधान के तीनों स्तम्भों ने उचित रास्ता ढूंढा है।

और हमें गर्व है कि भारत में इस तरह की एक समृद्ध परंपरा विकसित हुई है।

बीते पांच वर्षों में भारत की अलग-अलग संस्थाओं ने, इस परंपरा को और सशक्त किया है।

देश में ऐसे करीब 1500 पुराने कानूनों को समाप्त किया गया है, जिनकी आज के दौर में प्रासंगिकता समाप्त हो रही थी।

और ऐसा नहीं है कि सिर्फ कानून समाप्त करने में तेजी दिखाई गई है।

समाज को मजबूती देने वाले नए कानून भी उतनी ही तेजी से बनाए गए हैं।

ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों से जुड़ा कानून हो, तीन तलाक के खिलाफ कानून हो या फिर दिव्यांग-जनों के अधिकारों का दायरा बढ़ाने वाला कानून, सरकार ने पूरी संवेदनशीलता से काम किया है।

मित्रों,

मुझे खुशी है कि इस कॉन्फ्रेंस में ‘विश्व में लैंगिक न्याय’ (जेंडर जस्ट वर्ल्ड) के विषय को भी रखा गया है।

दुनिया का कोई भी देश, कोई भी समाज लैंगिक न्याय के बिना पूर्ण विकास नहीं कर सकता और ना ही न्यायप्रियता का दावा कर सकता है। हमारा संविधान समानता के अधिकार के तहत ही लैंगिक न्याय को सुनिश्चित करता है।

भारत दुनिया के उन बहुत कम देशों में से एक है, जिसने स्वतंत्रता के बाद से ही महिलाओं को वोट देने का अधिकार सुनिश्चित किया। आज 70 साल बाद अब चुनाव में महिलाओं की भागीदारी अपने सर्वोच्च स्तर पर है।

अब 21वीं सदी का भारत, इस भागीदारी के दूसरे पहलुओं में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे सफल अभियानों के कारण पहली बार भारत के शैक्षणिक संस्थानों में बालिकाओं का नामांकन लड़कों से ज्यादा हो गया है।

इसी तरह सैन्य सेवा में बेटियों की नियुक्ति हो, लड़ाकू पायलटों के चयन की प्रक्रिया हो, खदानों में रात में काम करने की स्वतंत्रता हो, सरकार द्वारा अनेक बदलाव किए गए हैं।

आज भारत दुनिया के उन कुछ देशों में शामिल है जो देश की करियर वूमेन को 26 हफ्ते का वैतनिक अवकाश देता है।

साथियों,

परिवर्तन के इस दौर में भारत नई ऊंचाई भी हासिल कर रहा है, नई परिभाषाएं गढ़ रहा है और पुरानी अवधारणाओं में बदलाव भी कर रहा है।

एक समय था जब कहा जाता था कि तेजी से विकास और पर्यावरण की रक्षा, एक साथ होना संभव नहीं है।

भारत ने इस अवधारणा को भी बदला है। आज जहां भारत तेजी से विकास कर रहा है, वहीं हमारे वन्य क्षेत्र का भी तेजी से विस्तार हो रहा है। 5-6 साल पहले भारत विश्व की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था। 3-4 दिन पहले ही जो रिपोर्ट आई है, उसके मुताबिक अब भारत विश्व की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।

यानि भारत ने यह करके दिखाया है कि बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ-साथ पर्यावरण को भी सुरक्षित रखा जा सकता है।

साथियों,

मैं आज इस अवसर पर, भारत की न्यायपालिका का भी आभार व्यक्त करना चाहता हूं, जिसने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की गंभीरता को समझा है, उसमें निरंतर मार्गदर्शन किया है।

अनेक जनहित याचिकाओं (पीआईएल) की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भी पर्यावरण से जुड़े मामलों को नए सिरे से परिभाषित किया है।

साथियों,

आपके सामने न्याय के साथ ही, शीघ्र न्याय की भी चुनौती हमेशा से रही है। इसका एक हद तक समाधान तकनीक के पास है।

विशेष तौर पर अदालत के प्रक्रियागत प्रबंधन को लेकर इंटरनेट आधारित तकनीक से भारत की न्यायिक प्रणाली को बहुत लाभ होगा।

सरकार का भी प्रयास है कि देश की हर कोर्ट को ई-अदालत एकीकरण मिशन मोड परियोजना से जोड़ा जाए। राष्ट्रीय न्यायिक डाटा ग्रिड की स्थापना से भी अदालत की प्रक्रियाएं आसान बनेंगी।

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और मानवीय विवेक का तालमेल भी भारत में न्यायिक प्रक्रियाओं को और गति देगा। भारत में भी न्यायालयों द्वारा इस पर मंथन किया जा सकता है कि किस क्षेत्र में, किस स्तर पर उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की सहायता लेनी है।

इसके अलावा बदलते हुए समय में डाटा सुरक्षा, साइबर अपराध जैसे विषय भी अदालतों के लिए नई चुनौती बनकर उभर रहे हैं। इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, ऐसे अनेक विषयों पर इस सम्मेलन में गंभीर मंथन होगा, कुछ सकारात्मक सुझाव सामने आएंगे। मुझे विश्वास है कि इस सम्मेलन से भविष्य के लिए अनेक बेहतर समाधान भी निकलेंगे।

एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाओं के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं !! धन्यवाद !!!

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By PIB

आईएनएस जमुना ने श्रीलंका में संयुक्त रूप से किया जलीय सर्वेक्षण

भारतीय नौसेना के जलीय (हाइड्रोग्राफिक) सर्वेक्षण पोत, आईएनएस जमुना को 6 फरवरी 2020 को श्रीलंका के पश्चिमी तट पर संयुक्त जलीय सर्वेक्षण के लिए तैनात कर दिया गया। सर्वेक्षण के दौरान इस पोत पर श्रीलंका नौसेना के अधिकारियों और नौसैनिकों के साथ ही जल सर्वेक्षक भी तैनात रहेंगे।

इस पोत ने विदेशी सहयोग सर्वेक्षण के तहत श्रीलंका नौसेना के जल सर्वेक्षकों के साथ बीते कई दिनों में कई सर्वेक्षण गतिविधियों को पूरा किया। व्यापक पर्यवेक्षण के चरण को पूरा करने के लिए भारतीय और श्रीलंका के नौसैनिकों की भागीदारी में एक अलग सर्वेक्षण शिविर भी लगाया गया। इस सर्वेक्षण शिविर में नौसैनिकों को नौसेना सहायता का निर्धारण और ऊपरी जल रेखा का परिसीमन की जिम्मेदारी दी गई। सर्वेक्षण परिचालन के लिए जहाज पर मौजूद हेलिकॉप्टर का भी उपयोग किया गया।

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By : PIB

इंजीनियरी सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा, 2020 के परिणामघोषित

संघ लोक सेवा आयोग द्वारा 05 जनवरी, 2020 को आयोजित इंजीनियरी सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा, 2020 के लिखित भाग के परिणाम के आधार पर, निम्नलिखित अनुक्रमांक वाले उम्मीदवारों ने इंजीनियरी सेवा (प्रधान) परीक्षा, 2020 के लिए अर्हता प्राप्त कर ली है। यह परिणाम, संघ लोक सेवा आयोग की वेबसाइट https://upsc.gov.in पर भी उपलब्ध है।

परीक्षा के प्रत्येक चरण में इन सभी उम्मीदवारों की उम्मीदवारी इनके द्वारा, निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा किए जाने के अध्यधीन पूर्णतया अनंतिम है। अर्हक घोषित किए गए उम्मीदवारों को 28 जून, 2020 को आयोजित की जाने वाली इंजीनियरी सेवा (प्रधान) परीक्षा, 2020 में भाग लेना होगा। अर्हक उम्मीदवारों को यह भी सलाह दी जाती है कि वे रेल मंत्रालय द्वारा जारी इंजीनियरी सेवा परीक्षा, 2020 की नियमावली तथा आयोग द्वारा जारी परीक्षा नोटिस सं. 01/ 2020-इंजी., दिनांक 25.09.2019 का अवलोकन करें, जो आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध है। उम्‍मीदवार अपने ई-प्रवेश पत्र, इंजीनियरी सेवा (प्रधान) परीक्षा, 2020 के प्रारंभ होने से लगभग 3 सप्ताह पूर्व आयोग की वेबसाइट से डाउनलोड कर सकेंगे। उम्मीदवारों को यह भी सूचित किया जाता है कि इंजीनियरी सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा, 2020 से संबंधित अंक तथा कट ऑफ अंक, इंजीनियरी सेवा परीक्षा, 2020 की संपूर्ण प्रक्रिया के पूरा होने अर्थात् इंजीनियरी सेवा परीक्षा, 2020 के अंतिम परिणाम की घोषणा के उपरांत ही आयोग की वेबसाइट अर्थात् https://upsc.gov.in पर अपलोड किए जाएंगे। किसी भी परिस्थिति में, इंजीनियरी सेवा (प्रधान) परीक्षा, 2020 के लिए केंद्र/विषय में परिवर्तन के किसी भी अनुरोध पर विचार नहीं किया जाएगा

संघ लोक सेवा आयोग के परिसर में एक सुविधा काउंटर स्थित है। उम्मीदवार अपनी परीक्षा/परिणाम से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी/स्पष्‍टीकरण इस काउंटर से व्यक्तिगत रूप से अथवा टेलीफोन नं. (011) 23388088/ 23385271/ 23381125/ 23098543 पर कार्य दिवसों में प्रात: 10.00 से सायं 5.00 बजे के बीच प्राप्त कर सकते हैं।

By : PIB

उपराष्ट्रपति ने 22 भारतीय भाषाओं में बोल कर सभी को चकित किया

उपराष्ट्रपति ने नागरिकों से मातृभाषा को प्रोत्साहित करने की शपथ लेने और अन्य भाषाएं सीखने का आह्वान कियाउपराष्ट्रपति ने प्रशासन में स्थानीय भाषा के इस्तेमाल पर जोर दियामातृ भाषा का उत्सव एक दिन का पर्व नहीं : उपराष्ट्रपतिउपराष्ट्रपति ने मातृ भाषा के महत्ता पर महात्मा गांधी और सरदार पटेल के विचारों को उद्धृत कियाउपराष्ट्रपति ने अंतर्राष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस समारोह को संबोधित किया

 

नई दिल्ली में आज आयोजित अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस समारोह के अवसर पर मातृभाषा के संरक्षण और संवर्धन के महत्व को उजागर करते हुए उपराष्ट्रपति श्री एम वेंकैया नायडू ने स्वयं 22 भाषाओं में बोल कर सभी को चकित कर दिया। इस अवसर पर उन्होंने नागरिकों का आह्वाहन किया कि वे मातृभाषा को प्रोत्साहित करने की शपथ लें और अन्य भाषाओं को भी सीखें।

उपराष्ट्रपति ने भारतीय भाषाओं को प्रोत्साहित करने हेतु एक राष्ट्रीय आंदोलन चलाने का आह्वाहन करते हुए कहा कि जब हम मातृभाषा के संरक्षण की बात करते हैं तो हम वस्तुत: भाषाई और सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण और संवर्धन की भी बात करते हैं।

भारतीय भाषाओं को रोज़गार से जोड़ते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि एक स्तर तक के राजकीय पदों में भर्ती के लिए भारतीय भाषाओं का ज्ञान अनिवार्य होना चाहिए।

भाषा को समावेशी विकास के लिए आवश्यक बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन में स्थानीय भाषा का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि हाई स्कूल तक शिक्षा का माध्यम अनिवार्यतः मातृभाषा होनी चाहिए।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपने फैसलों की प्रति 6 भाषाओं में उपलब्ध कराए जाने की सराहना की और अपेक्षा की कि अधीनस्थ न्यायालय भी इस दिशा में कार्य करेंगे।

भारत की भाषाई विविधता के संरक्षण की जरूरत पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि मातृभाषा का उत्सव कोई एक दिन का पर्व नहीं होना चाहिए बल्कि लोगों को अपनी मातृभाषा को अपनी रोज़ की जीवनचर्या का अभिन्न अंग बनाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत में 19,500 भाषाएं या बोलियां मातृभाषा के रूप में बोली जाती हैं। ये बोलियां हमारे सनातन संस्कारों, सदियों की सभ्यता में विकसित ज्ञान और अनुभव की साक्षी हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि वैज्ञानिक संरचना, उच्चारण, सरल लिपि और सहज व्याकरण भारतीय भाषाओं की पहचान रही हैं जिनमें प्राचीन, मध्य कालीन और आधुनिक काल में महान साहित्यिक कृतियों की रचना की गई।

महात्मा गांधी को उद्दृत करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रपिता का मानना था कि मातृभाषा का तिरस्कार नहीं किया जाना चाहिए। महात्मा गांधी ने कहा था ” मैं नहीं चाहता कि मेरा घर चारों ओर से दीवारों से घिरा हो और उसकी खिड़कियां बंद हों। मैं चाहता हूं कि विश्व भर की संस्कृतियां मेरे घर में निर्बाध रूप से बसें लेकिन मैं इसके लिए तैयार नहीं कि वे मेरे पैर उखाड़ दें।”

उन्होंने बताया कि बच्चों को विदेशी भाषाओं में पढ़ाने और बिना समझाए उन्हें रटाने की प्रवृत्ति पर सरदार पटेल ने कहा था कि जब रटने की क्षमता बढ़ती है तो समझने की क्षमता कम होती है। उपराष्ट्रपति ने नागपुर विश्विद्यालय में सरदार पटेल के दीक्षांत भाषण को उद्धरित किया जिसमें उन्होंने कहा था कि आपके विश्वविद्यालय ने दिखा दिया है कि जहां चाह वहां राह। मुझे आशा है कि आप अपने इस सुविचारित कार्यक्रम का प्रतिबद्धता के साथ पालन भी करेंगे और पाएंगे कि जब विद्यार्थियों को भारतीय भाषाओं में पढ़ाया जाएगा तो उससे विद्यार्थियों के समय की बचत भी होगी, उनकी समझ विकसित होगी और बुद्धि तीव्र होगी।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भाषा मानव विकास के साथ विकसित होती है और प्रयोग के साथ ही जीवंतता पाती है, अगर आप भाषा का प्रयोग नहीं करेंगे, वो लुप्त हो जाएगी। एक भाषा के साथ एक ज्ञान परम्परा का भी लोप होता है।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा 21 फरवरी को देश भर के एक लाख विद्यालयों में अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मानने की पहल की सराहना की।

इससे पूर्व उपराष्ट्रपति जी के आगमन पर पारंपरिक भारतीय परिधानों में सज्जित विद्यार्थियों द्वारा 22 भारतीय भाषाओं में उनका स्वागत किया गया जो भारत की भाषाई विविधता को दर्शाता है। उन्होंने विभिन्न सरकारी संस्थाओं द्वारा लगाए गए पुस्तक स्टालों को भी देखा।

इस अवसर पर मानव संसाधन विकास मंत्री श्री रमेश पोखरियाल निशंक, संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रहलाद सिंह पटेल, मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री श्री संजय धोत्रे, उपराष्ट्रपति के सचिव डॉ. आई वी सुब्बा राव, उच्च शिक्षा सचिव श्री अमित खरे तथा संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री योगेन्द्र त्रिपाठी भी उपस्थित रहे।

उपराष्ट्रपति के पूरे भाषण के लिए यहाँ क्लिक करें।

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By : PIB

Ye Re Ye Re Paisa Review

संजय जाधव द्वारा निर्देशित फिल्म, आपको हंसाने की कोशिश करते हुए गिर जाती है। माइंडलेस एंटरटेनर, अच्छी तरह से किया जाता है, दर्शकों को उसके पैसे का मूल्य देता है और उत्पादकों को बैंक के लिए सभी तरह से गाता है और नृत्य करता है।

लेकिन पूरी तरह से किए जाने पर वे चेहरे पर फ्लैट हो सकते हैं, और कैसे! और निर्देशक संजय जाधव की ये रे ये रे पईसा जैसा ही होता है। पागल, नॉन स्टॉप मनोरंजन प्रदान करने की कोशिश में, जाधव हमें एक जोरदार, निरर्थक गाथा के साथ समाप्त करता है जो 158 मिनट के लिए और आगे बढ़ता है!

कहानी चार व्यक्तियों के इर्द-गिर्द घूमती है। सनी (सिद्धार्थ जाधव) एक संघर्षरत अभिनेत्री बबली (तेजस्विनी पंडित) से प्यार करने वाला एक टिकट है। आदित्य देसाई (उमेश कामत) ऑनलाइन प्रैंक शो में जीवंत अभिनय करता है। वह सनी या बबली को नहीं जानता है और सिर्फ एक दिन फिल्मों में बड़ा करने का सपना देखता है। अन्ना (संजय नार्वेकर) एक रिकवरी एजेंट और गैंगस्टर है।

बबली की मदद करने की कोशिश में, सनी अन्ना के लिए जिम्मेदार हो जाती है, जिससे उसने 10 करोड़ रुपये खो दिए थे। उसी समय, गैंगस्टर ने एक अन्य राशि खो दी, क्योंकि एक आदित्य आदित्य उस पर खेलता है। अन्ना के प्रकोप से बचने के लिए, सनी, बबली और आदित्य ने मिलकर 20 करोड़ रुपये की वसूली की।

ये रे ये रे पईसा में एक दिलचस्प कथानक है। लेकिन फिल्म पटकथा, संवाद और प्रस्तुति के साथ संघर्ष करती है। जाधव शैली में बहुत अधिक आत्मसमर्पण करता है और ऊपर-ऊपर जाता है। एक-लाइनर, एक कॉमेडी के लिए महत्वपूर्ण, शायद ही आपको खीस बनाते हैं। और जबकि कोई भी वास्तव में ऐसी फिल्मों में मजबूत तर्क की उम्मीद नहीं करता है, एक के बाद एक संवेदनाहीन घटना पर मंथन करना आपको आश्चर्यचकित करता है कि क्या फिल्म एक पूर्व-किशोर द्वारा तैयार की गई थी।

ऐसी कई घटनाओं में से कुछ विशेष उल्लेख के योग्य हैं: एक अदालत एक महिला को अपने पुश्तैनी गहनों को सरकार के पास भेजने का आदेश देती है। वह एक बड़े सभागार में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन करके ऐसा करती है। जो भी इस तरह के धूमधाम के साथ एक अदालती लड़ाई में हार का जश्न मनाता है?

– आदित्य एक बैंक मैनेजर को लूटने की कोशिश करता है और बुरी तरह से नाकाम हो जाता है। लेकिन प्रबंधक तुरंत एक बड़े अपराध को अंजाम देने के साथ, एक अजनबी और एक चोर हो सकता है, आदित्य पर भरोसा करता है!

– एक गंभीर अदालत के दृश्य के दौरान, एक मोड़ तब आता है जब एक वकील अपने मोबाइल फोन पर एक संदेश पढ़ने के बाद जोर से चिल्लाता है कि भारत पाकिस्तान के खिलाफ एक क्रिकेट मैच हार गया है।

इस पर फिर से सुनो रे पइसा बंद नहीं होता है। फिल्म अंधेरे चमड़ी वाले अफ्रीकियों, समलैंगिकों और बलात्कार के विचार का मजाक उड़ाने के लिए भी दोषी है। 2018 में भी इस तरह की बकवास को कॉमेडी के रूप में देखा जा सकता है।

जाधव एक बेहतरीन छायाकार के रूप में जाने जाते हैं और उनकी फिल्में हमेशा प्रभावशाली कैमरावर्क का दावा करती हैं। लेकिन यह एक अपवाद है। बैकग्राउंड स्कोर में ज्यादातर अजीब सी आवाजें होती हैं जो आपको हंसाने वाली होती हैं। वे नहीं करते। और k डॉक्टर की गोली मोहे में ’जैसे नारों के साथ क्या है। अन्ना की गोली … ‘अब और फिर दोहराया है?

गाने पागल मनोरंजन करने वालों का एक महत्वपूर्ण घटक हैं। लेकिन हमारे दुर्भाग्य के लिए इस फिल्म में तीन नृत्य ट्रैक अप्रभावी हैं।

शुक्र है, प्रदर्शन खराब नहीं हैं। सिद्धार्थ जाधव, जिन्हें लंबे समय के बाद एक मुख्यधारा की मराठी फिल्म में एक भावपूर्ण भूमिका मिली है, दोनों हाथों से पकड़ लेते हैं। हास्य स्वाभाविक रूप से उसके पास आता है।

यही हाल संजय नार्वेकर का है। रिकवरी गुंडे की भूमिका उनके लिए थी। लेकिन कॉमेडी उमेश कामत के लिए नहीं है, हालांकि उनका गैर-कॉमिक प्रदर्शन अच्छा है।

तेजस्विनी पंडित ने मी सिंधुताई सपकाल (2010) में अपने करियर की शुरुआत में प्रभावशाली भूमिका निभाई थी। लेकिन वह उस ऊंचाई तक पहुंचने में नाकाम रही है। और यह फिल्म उसके एक कारण की मदद नहीं करती है। मृणाल कुलकर्णी एक अमीर और परिपक्व महिला के किरदार में फिट बैठती हैं लेकिन उन्हें अपने चरित्र की गहराई का पता लगाने का मौका नहीं मिलता है।

फिल्म में आनंद इंगले और विशाखा सुभेदर की अच्छी सहायक भूमिकाएँ हैं। लेकिन बैंक प्रबंधक बस अविश्वसनीय है। और यह एक तारीफ नहीं है