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उत्तरी ध्रुव के ऊपर ओज़ोन परत में सबसे बड़ा छेद बंद हुआ

23 अप्रैल को कोपरनिकस एटमॉस्फ़ेयर मॉनिटरिंग सर्विस (CAMS) के वैज्ञानिकों ने जानकारी दी कि इस साल यानी 2020 के मार्च में उत्तरी गोलार्ध में ओज़ोनपरत में जो अभूतपूर्व दिखा था वह बंद हो गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ये सफलता अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर सहमत हुई नीतियों और गतिविधियों की बदौलत सम्भव हो सकी है। इनमें मॉट्रियाल प्रोटोकोल भी एक बड़ी कामयाबी थी जो क़रीब 31 वर्ष पहले वजूद में आया था।

उस समय किए गए अध्ययनों से पता चला था Chlorofluorocarbons (CFCs) और कुछ अन्य तत्व और पदार्थ ओज़ोन परत में छेद बनाने में सक्षम हो रहे थे। ये पदार्थ एयरोसोल्स, रेफ्रिजरेशन सिस्टम और मौहाल को ठंडा रखने लिए चलने वाली मशीनों में भारी मात्रा में पाया जाता है।

ओज़ोन परत

ओज़ोन परत पृथ्वी के वायुमंडल की एक परत जिसमें ओजोन गैस की सघनता अपेक्षाकत अधिक होती है। ओज़ोन परत के कारण ही धरती पर जीवन संभव है। यह परत सूर्य के उच्च आवृत्ति के पराबैंगनी प्रकाश की 93-99% मात्रा अवशोषित कर लेती है, जो पृथ्वी पर जीवन के लिये हानिकारक है। पृथ्वी के वायुमंडल का 91% से अधिक ओज़ोन यहां
मौजूद है।

यह मुख्यत: स्ट्रैटोस्फियर के निचले भाग में पृथ्वी की सतह के ऊपर लगभग 10 किमी से 50 किमी की दूरी तक स्थित है, यद्यपि इसकी मोटाई मौसम और भौगोलिक दृष्टि से बदलती रहती है।

‘पोलर वोर्टेक्स’ अवधारणा

(‘Polar vortex’ concept)

CAMS ने कहा कि लगातार बढ़ता हुआ छेद ऑकर्टिक के ऊपर असामान्य मौसम का नतीजा था। जब तेज हवाएं बर्फीली चोटियों के ऊपर की जमा देने वाली हवाओं में लगातार कई दिनों तक फंसती रहती हैं तो वैज्ञानिकों की शब्दावली में एक ‘पोलर वोर्टेक्स’ बनाती हैं।

यह मज़बूत दबाव अपने ही चारों ओर घूमती है। इससे इतनी ताक़त पैदा होती है कि वह समताप मंडल की ओज़ोन में छेद कर डालती है। हालांकि अब यह छेद बंद हो गया है लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि मौसम इसके अनुकूल हुआ तो यह फिर खुल सकता है।

आरोग्य सेतु वास्तव में कैसे काम करता है?

भारत की आधिकारिक Covid-19 संपर्क अनुरेखण एप्लिकेशन के कार्य निम्न प्रकार से हैं:

जब कोई App पर रजिस्टर करता है, तो उसका नाम, फोन नंबर, उम्र, लिंग, पेशा और पिछले 30 दिनों मे उनके द्वारा देखे गए देशों को एकत्र किया जाता है, और भारत सरकार द्वारा संचालित सर्वर पर संग्रहीत किया जाता है। यह एक अद्वितीय आईडी के साथ संग्रहीत किया जाता है, जिसका उपयोग बाद के सभी ऐप से संबंधित लेनदेन में उपयोगकर्ता की पहचान करने के लिए किया ज़ाता है। यह डिजिटल आईडी किसी भी जानकारी से जुड़ी है जिसे बाद में अपलोड किया जा सकता हैं।

पंजीकरण के समय, व्यक्ति का स्थान विवरण डिवाइस से एकत्र किया जाता है, और सर्वर पर अपलोड किया जाता है। Application को अपना काम करने के लिए, उपयोगकर्ताओं को हर समय स्थान और ब्लूटूथ सुविधाओं को चालू रखना चाहिए।

जब दो पंजीकृत उपयोगकर्ता एक-दूसरे की ब्लूटूथ सीमा के भीतर आते हैं, आम तौर पर 10 मीटर से कम, तो उनके संबंधित उपकरणों के App स्वचालित रूप से डिजिटल आईडी का आदान-प्रदान करेंगे और उस समय और जीपीएस स्थान को रिकॉर्ड करेंगे जिस पर संपर्क हुआ था।

इस बिंदु पर एकत्र की गई यह जानकारी स्थानीय रूप से उपकरणों पर संग्रहीत है। यदि इनमें से एक पंजीकृत उपयोगकर्ता Covid-19 के लिए सकारात्मक परीक्षण करता है, तो जानकारी उनके मोबाइल डिवाइस से अपलोड की जाएगी, और सर्वर पर संग्रहीत की जाएगी।

आरोग्य सेतु (Arogya Setu) की गोपनीयता नीति के अनुसार, ऐप लगातार उपयोगकर्ता के स्थान डेटा को एकत्र करता है और इसे डिवाइस पर संग्रहीत करता है, जिससे 15 मिनट के अंतराल पर जाने वाले सभी स्थानों का रिकॉर्ड बनता है। इसके अलावा, हर बार जब कोई उपयोगकर्ता ऐप पर एक स्व-मूल्यांकन करता है, तो Covid-19 लक्षणों पर टिक-मार्क करता है, ऐप इस उपयोगकर्ता को येलो, ऑरेंज या ग्रीन चिह्नित करता है, जो खतरे के घटते क्रम के आधार पर होता है, जिसका अर्थ है कि व्यक्ति सुरक्षित है।

CHD कोविड के नाम से एक नई मोबाइल App का शुभांरभ

पंजाब के राज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक वी पी सिंह बदनौर ने हाल ही में सीएचडी कोविड के नाम से एक नई मोबाइल ऐप का शुभांरभ किया है। एंडरायड आधारित मोबाइल ऐप इस मोबाइल ऐप को चंडीगढ़ के सोसाइटी फॉर प्रमोशन ऑफ आई ने विकसित किया है।

इस मोबाइल ऐप के जरिये लोग प्रशासन और केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों, आदेशों और अधिसूचनाओं की जानकारी हासिल कर सकते हैं। प्रशासन के आईटी विभाग की तरफ इस एप को लगातार अपडेट किया जाता रहेगा।

केंद्रीय संस्कृति मंत्री ने नई दिल्ली में ई-बुक “प्रो. बी बी लाल-इंडिया रिडिस्कवर्ड” का किया विमोचन

केंद्रीय संस्कृति मंत्री प्रत्लाद सिंह पटेल ने महान पुरातत्ववेत्ता प्रो. बी बी लाल के शताब्दी वर्ष के अवसर पर नई दिल्ली में ई-बुक प्रो. बी बी लाल-इंडिया रिडिस्कवर्ड का विमोचन किया।

इस अवसर पर संस्कृति मंत्रालय में सचिव आनंद कुमार भी इस अवसर पर उपस्थित थे। यह पुस्तक एक शताब्दी विशेष संस्करण हैं जिसे संस्कृति मंत्रालय द्वारा प्रो. बी बी लाल शताब्दी समारोह समिति द्वारा तैयार किया गया है।यह पुस्तक संस्कृति मंत्रालय की पुरातत्व के क्षेत्र में उनके बेशुमार योगदान को संस्कृति मंत्रालय की ओर से सम्मान है।

प्रो. लाल का जन्म उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में
बैडोरा गांव में 02 मई, 1921 को हुआ था।
प्रो. बी. बी. लाल को वर्ष 2020 में पद्म भूषण प्रदान किया गया था। वह 1968 से 1972 तक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के महानिदेशक थे और उन्होंने भारतीय उन्नत अध्ययन संस्थान, शिमला के निदेशक के रूप में सेवा की है।

प्रो. लाल ने यूनेस्को की विभिन्न समितियों में भी काम किया है। पांच दशकों तक फैले अपने कैरियर में प्रो. लाल ने पुरातत्व विज्ञान के क्षेत्र में बेशुमार योगदान दिया!। प्रो. लाल को 1944 में तंक्सिला में सर मोर्टिमर व्हीलर द्वारा प्रशिक्षित किया गया था और बाद में वह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में नियुक्त हुए।

प्रो. लाल ने हस्तिनापुर (उप्र), शिशुपालगढ़ (ओडिशा), पुराना किला (दिल्ली), कालिबंगन (राजस्थान) सहित कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों की खुदाई की।

1975-76 के बाद से, प्रो. लाल ने रामायण के पुरातात्विक स्थलों के तहत अयोध्या, भारद्वाज आश्रम, श्रंगवेरपुरा, नंदीग्राम एवं चित्रकूट जैसे स्थलों की जांच की। प्रो. लाल ने 20 पुस्तकें और विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में 150 से अधिक शोध लेख लिखे हैं।

मिसाल: एक मुस्लिम की जान बचाने को 10 हिन्दुओं ने किया रक्तदान

एक मुस्लिम मरीज को खून देकर जान बचाने के लिए इस लॉकडाउन में भी हिन्दू रक्तदाताओं का रेला उमड़ पड़ा।

भाईचारे की इस मजबूत कड़ी में गृहणी से लेकर सरकारी कर्मचारी भी शामिल रहे। शामली निवासी 60 वर्षीय नूर मोहम्मद 1 सप्ताह से बीमार थे। 2 दिन पहले उनकी तबीयत अधिक खराब होने पर उन्हें पीलिया बताते हुए डॉक्टरों ने 10 यूनिट ब्लड की जरूरत बताई।

जिसके बाद 10 हिंदुओं ने अपना खून देकर नूर मोहम्मद की जान बचा ली।

लॉकडाउन: घर पहुंचने के लिए खरीदा 25 टन प्याज, किए लाखों खर्च

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मुंबई एयरपोर्ट पर काम करने वाले प्रेम मूर्ति पांडे लॉकडाउन से परेशान होकर अपने घर जाना चाहते थे।

उन्होंने 2.32 लाख रुपये का 25,520 किलो प्याज खरीदा और 77,500 रुपये में एक ट्रक किराए पर लिया। प्याज को ट्रक में भरकर वो मुंबई से प्रयागराज के लिए निकले।

वहां वो सीधे मंडी पहुंचे, लेकिन उन्हें कोई खरीददार नहीं मिला। अब प्याज उनके गांव में है और वो क्वारंटाइन में हैं।

लॉकडाउन के बावजूद NTPC ने निर्बाध बिजली आपूर्ति की

सभी संयंत्रों में लॉकडाउन और सामाजिक दूरी के दिशानिर्देशों का पालन किया जा रहा है

एनटीपीसी विंध्यांचल ने 13 अप्रैल, 2020 को 100 प्रतिशत पीएलएफ हासिल किया

कोरोना महामारी भारत की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक और विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनटीपीसी का राष्ट्र को निर्बाध बिजली आपूर्ति करने में उसका मनोबल तोड़ने में नाकाम रही है। संकट की इस घड़ी में इनटीपीसी राष्ट्र को निर्बाध बिजली आपूर्ति कर रही है। विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री आर. के. सिंह के सहयोग और मार्गदर्शन में इस महारत्न कंपनी के प्रत्येक विद्युत केन्द्र का प्रदर्शन अपने सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया है।
कोविड-19 संकट ने बिजली कंपनी के महत्व को रेखांकित किया है और उनकी अहमियत अब काफी बढ़ गई है क्योंकि अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों के सुचारु संचालन के लिए बिजली काफी अहम है। एनटीपीसी बिजली की निरंतर आपूर्ति बनाए रखने के लिए कोयले की आपूर्ति का प्रबंधन भी कुशलता के साथ कर रही है।
एनटीपीसी जहां 24 घंटे बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित कर रही है, वहीं कंपनी के सभी संयंत्रों में लॉकडाउन और सामाजिक दूरी से संबंधित दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन किया जा रहा है। बिजली उत्पादन से इतर पीएसयू वंचित तबकों और प्रवासी कामगारों को राशन और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराकर सामाजिक कल्याण की गतिविधियों में भी व्यापक योगदान दे रही है। एनटीपीसी का प्रबंधन नियमित रूप से हर घटनाक्रम की निगरानी कर रहा है, जिससे कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई के दौरान देश के हर कोने में पर्याप्त बिजली की आपूर्ति बनी रहे।
उसके विद्युत केन्द्रों में एनटीपीसी विंध्यांचल देश का सबसे बड़ा विद्युत केन्द्र है, जिसने 13 अप्रैल, 2020 को 100 प्रतिशत पीएलएफ हासिल किया और भारत के पहले अल्ट्रा सुपरक्रिटिकल विद्युत केन्द्र एनटीपीसी खरगोन की दूसरी 660 मेगावाट की इकाई इस अवधि के दौरान व्यावसायिक हो गई, जिससे लॉकडाउन के बावजूद परिचालन के उत्कृष्टता की दिशा में एनटीपीसी की प्रतिबद्धता का पता चलता है।
62,110 मेगावाट की कुल स्थापित क्षमता के साथ एनटीपीसी के 70 विद्युत केन्द्र हैं, जिनमें 24 कोयला, 7 संयुक्त गैस/ तरल ईंधन, 1 पनबिजली, 13 नवीकरणीय ऊर्जा के साथ 25 संयुक्त उपक्रम विद्युत केन्द्र हैं।

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एएम/ एमपी

कोविड महामारी के कारण लॉकडाउन अवधि के दौरान देश में ‘प्रत्यक्ष विपणन‘ का प्रभाव

पत्र सूचना कार्यालय

भारत सरकार
कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय

25-अप्रैल-2020 19:57 IST

कोविड महामारी के कारण लॉकडाउन अवधि के दौरान देश में ‘प्रत्यक्ष विपणन‘ का प्रभाव

भारत सरकार प्रत्यक्ष विपणन में किसानों की सुविधा और बेहतर रिटर्न का आश्वासन देने के लिए ठोस प्रयास कर रही है। साथ ही विभाग ने कोविड 19 महामारी को देखते हुए कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए मंडियों में परस्पर दूरी (सोशल डिस्टेंसिंग) बनाए रखने के लिए सलाह जारी की हैं। राज्यों से अनुरोध किया गया है कि वे किसानों/किसान समूहों/एफपीओ/सहकारी समितियों को थोक खरीदारों/बड़े खुदरा विक्रेताओं/प्रोसेसरों आदि को अपनी उपज बेचने में सुविधा प्रदान करने के लिए डायरेक्ट मार्केटिंगकी अवधारणा को बढ़ावा दें।

माननीय केंद्रीय कृषि मंत्री ने 16 अप्रैल, 2020 को राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र भेजकर सहकारिता/एफपीओ आदि के माध्यम से प्रत्यक्ष विपणन की आवश्यकता को दोहराया और सभी हितधारकों और किसानों को इस प्रक्रिया को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। विभाग ने राज्यों को एडवाइजरी भी जारी की हैं कि वे बिना किसी लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं के सीधे विपणन को बढ़ावा दें और कृषि उपज के समय पर विपणन में किसानों को सुविधा प्रदान करें।

थोक बाजारों को कम करने और आपूर्ति श्रृंखला को बढ़ावा देने के लिए, राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) के अंतर्गत दो मॉड्यूल बनाये गये हैं जो निम्नलिखित हैं:

(i एफपीओ मॉड्यूल:  एफपीओ सीधे ई-नाम पोर्टल से व्यापार कर सकते हैं। वे चित्र/गुणवत्ता पैरामीटर के साथ संग्रह केंद्रों से उपज विवरण अपलोड कर सकते हैं और भौतिक रूप से मंडियों तक पहुंचे बिना बोली (बिड) सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।

(ii)     वेयरहाउस आधारित ट्रेडिंग मॉड्यूल: किसान अपनी उपज को डब्ल्यूडीआरए पंजीकृत गोदामों से डीम्ड बाजार के रूप में अधिसूचित करके बेच सकते हैं, और इससे उन्हें भौतिक रूप से अपनी उपज नजदीकी मंडियों में लाने की आवश्यकता नहीं होती है।

 

विभिन्न राज्यों ने प्रत्यक्ष विपणन को अपनाया है और इसके लिए कई उपाय किए हैं:

  • कर्नाटक ने राज्य के सहकारी संस्थानों और एफपीओ को बाजार के यार्ड के बाहर कृषि उपज के थोक व्यापार में संलग्न करने के लिए छूट प्रदान की है।
  • तमिलनाडु ने सभी अधिसूचित कृषि उत्पादों पर बाजार शुल्क में छूट दी है।
  • उत्तर प्रदेश ने फार्म गेट से ई-नाम प्लेटफॉर्म में व्यापार करने की अनुमति दी और किसानों से सीधी खरीद के लिए प्रोसेसर को एकीकृत लाइसेंस जारी किया और एफपीओ को गेहूं की खरीद संचालन करने की भी अनुमति प्रदान की।
  • राजस्थान ने व्यापारियों, प्रोसेसर और एफपीओ द्वारा प्रत्यक्ष विपणन की अनुमति दी। इसके अलावा, राजस्थान में पीएसीएस/एलएएमपीएस को डीम्ड मार्केट घोषित किया गया है।
  • व्यक्तियों, फर्मों और प्रसंस्करण इकाइयों के अलावा, मध्य प्रदेश ने बाजार-यार्ड के बाहर निजी खरीद केंद्र स्थापित करने की अनुमति दी है जो केवल 500/- रुपये आवेदन शुल्क लेकर किसानों से सीधे खरीद कर सकेंगे।
  • हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात ने भी बिना किसी लाइसेंस की आवश्यकता के  सीधे विपणन की अनुमति दी है।
  • उत्तराखंड ने वेयरहाउस/कोल्ड स्टोरेज और प्रसंस्करण संयंत्रों को उप-मंडियां घोषित किया है।
  • उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में वेयरहाउस/कोल्ड स्टोरेज को मार्केट-यार्ड घोषित करने के नियमों और मानदंडों में ढील दी है।

प्रत्यक्ष विपणन का प्रभाव:

  • राजस्थान ने लॉकडाउन अवधि के दौरान प्रोसेसर को 1,100 से अधिक प्रत्यक्ष विपणन लाइसेंस जारी किए हैं, जिससे किसानों ने अपनी उपज सीधे प्रोसेसर को बेचना शुरू कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में बाजार-यार्ड के रूप में घोषित 550 से अधिक पीएसीएस में से, 150 पीएसीएस प्रत्यक्ष विपणन के लिए कार्यात्मक हो गए हैं और गाँव के व्यापारी   सफलतापूर्वक व्यापार लेनदेन कर रहे हैं।
  • तमिलनाडु में बाजार शुल्क माफी के कारण, यह देखा गया कि व्यापारियों ने किसानों से उनके फार्म गेट/गांवों से उपज खरीदना पसंद किया है।
  • उत्तर प्रदेश में किसानों और व्यापारियों के साथ एफपीओ द्वारा प्रत्यक्ष संबंध स्थापित किए गए हैं, जिससे वे शहरों के उपभोक्ताओं को उपज की आपूर्ति कर रहे हैं, जो किसानों के  अपव्यय में बचत और प्रत्यक्ष लाभ प्रदान करती है। इसके अलावा, राज्य ने एफपीओ और जोमेटो के साथ संबंध स्थापित करने में सुविधा प्रदान की है, जिससे उपभोक्ताओं को सब्जियों  का वितरण आसानी से सुनिश्चित किया जा सके।

राज्यों से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, प्रत्यक्ष विपणन ने किसान समूहों, एफपीओ सहकारी समितियों और सभी हितधारकों को कृषि उपज के प्रभावी और समय पर विपणन की सुविधा प्रदान की है।

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... / प्र. . / म.सिं

 

आईएनएसटी के वैज्ञानिकों ने दिखते प्रकाश में कपड़ों के कीटाणुशोधन की दिशा में कम लागत वाला धातु रहित नैनो मटीरियल ढूंढ़ा है

पत्र सूचना कार्यालय

भारत सरकार
विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय

25-अप्रैल-2020 15:42 IST

आईएनएसटी के वैज्ञानिकों ने दिखते प्रकाश में कपड़ों के कीटाणुशोधन की दिशा में कम लागत वाला धातु रहित नैनो मटीरियल ढूंढ़ा है

इन नैनो मटीरियल्स में बढ़ी हुई जैवनाशी गतिविधि होती है

मौजूदा हालात में प्रासंगिकता को देखते हुए इस प्रौद्योगिकी को एंटीवायरल दक्षता के लिए भी परखा जाएगा

भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत आने वाले स्वायत्त संस्थान, नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएनएसटी) में वैज्ञानिकों ने दृश्य प्रकाश में सूक्ष्मजीव कीटाणुशोधन के लिए एक कम लागत वाले धातु रहित नैनोमटीरियल को ढूंढा है जो चांदी और अन्य धातु-आधारित सामग्रियों का विकल्प हो सकता है।

आईएनएसटी में डॉ. कमलाकन्नन कैलासम के समूह ने डॉ. आसिफ खान शानवस के सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका ‘कार्बन’ में प्रकाशित अपने हालिया अध्ययन में, दृश्य-प्रकाश-चालित जीवाणुरोधी गतिविधि के लिए कार्बन नाइट्राइड क्वांटम डॉट्स (जी-सीएनक्यूडी) का परीक्षण किया है और स्तनधारी कोशिकाओं के साथ जैव-अनुकूल होने के साथ-साथ इसे प्रभावी पाया है। इस टीम ने सुझाव दिया है कि ये धातु / गैर-धातु सेमीकंडक्टरों और महंगी चांदी के लिए एक व्यवहार्य एंटी-बैक्टीरियल विकल्प होगा, जो इसे लागत कुशल बनाता है।

आईएनएसटी की टीम के अनुसार, ये नैनोमटीरियल्स बढ़ी हुई जैवनाशी गतिविधि रखते है, जिसका कारण ये है कि जी-सीएनक्यूडी का बड़ा सतह क्षेत्र पराबैंगनी और दृश्य दोनों क्षेत्रों में अधिक प्रतिक्रियाशील स्थलों और प्रकाश संबंधी अवशोषण रखता है। जी-सीएनक्यूडी में प्रतिक्रियाशील ऑक्सीजन प्रजातियों (आरओएस) को उत्पन्न करने की क्षमता है। आरओएस तेजी से संपर्क करता है और तुरंत उपलब्ध बड़े जैविक अणुओं (मैक्रो मॉलिक्यूल्स) को नुकसान पहुंचाता है जैसे कि कोशिका झिल्ली या आवरण पर मौजूद लिपिड और कोशीय सतह पर मौजूद प्रोटीन, उन सूक्ष्मजीवों को निष्क्रिय करने की दिशा में। निष्क्रियता का ये तंत्र किसी विशेष रोगाणु के लिए गैर-विशिष्ट है, क्योंकि लिपिड और प्रोटीन माइक्रोबियल दुनिया के निवासियों के प्रमुख घटक हैं।

ये वैज्ञानिक ऐसे रास्ते तलाश रहे हैं जिनसे डोप या अनडोप किए हुए कार्बन नाइट्राइड आधारित मटीरियल को कपड़ों वाली बुनावटों के साथ मिलाया जा सके जो रोगाणुरोधी गतिविधि के लिए इष्टतम नमी और तापमान के अंतर्गत लगातार प्रतिक्रियाशील ऑक्सीजन प्रजातियों (आरओएस) का उत्पादन कर सकें।

उन्होंने बताया कि छींकने के दौरान उत्पन्न एरोसोल की बूंदों में पर्याप्त नमी होती है जो इन बूंदों में मौजूद किसी भी संक्रामक एजेंटों के आरओएस की मध्यस्थता से कीटाणुशोधन में तब मदद कर सकती है, जब एक बार वो सूरज की रोशनी या परिवेशी सफेद प्रकाश के तले इस नैनो मटीरियल सिले कपड़े के संपर्क में आए। इस वर्तमान अध्ययन में एक सामान्य टेबल लैंप का उपयोग किया गया जो एक साफ दिन में सूर्य के प्रकाश जितनी रोशनी प्रदान करता है।

सामान्य पराबैंगनी मध्यस्थता वाले कीटाणुशोधन के मुकाबले दृश्य प्रकाश पर निर्भरता भी फायदेमंद है, क्योंकि उसमें यूवी प्रकाश उत्सर्जक उपकरणों से सावधानीपूर्वक काम लेने की आवश्यकता होती है। वर्तमान परिदृश्य में इसकी प्रासंगिकता को देखते हुए एंटीवायरल दक्षता के लिए भी इस तकनीक को टटोला जाएगा।

 

 

[प्रकाशन: प्रांजलि यादव, एस.टी. निशांति, भाग्येश पुरोहित, आसिफ खान शानवस, कमलाकन्नन कैलासम, कुशल जीवाणुरोधी एजेंटों के तौर पर धातु रहित दृश्य प्रकाश फोटोकैटलिटिक कार्बन नाइट्राइड क्वांटम डॉट्स: एक गहरा अध्ययन (https://doi.org/10.1016/j.carbon.2019.06.045)]

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एएम/जीबी

कोविड-19 के प्रसार के निरीक्षण और नियंत्रण के लिए डिजिटल तकनीक से निगरानी

कोविड-19 के प्रसार के निरीक्षण और नियंत्रण के लिए डिजिटल तकनीक से निगरानी

निगरानी तीन स्तरों पर की जाएगी: वायरस, रोगी और रोगी की चिकित्सा प्रक्रिया

सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (सीसीएमबी) और इंस्टीट्यूट ऑफ जेनेटिक्स एंड इंटीग्रेटेड बायोलॉजी (आईजीआईबी), कुछ अन्य संस्थानों के साथ मिलकर, नोवेल कोरोना वायरस के प्रसार का जीव विज्ञान, महामारी विज्ञान और रोग का प्रभाव समझने के लिए की डिजिटल और आणविक निगरानी के लिए काम कर रहे हैं।

इस भयानक नोवेल कोरोना वायरस से क्यों कुछ संक्रमित लोगों में लक्षण भी दिखाई नहीं देते हैं और केवल बीमारी छोड़ते हैं? क्यों कुछ लोग पीड़ित होते हैं और मौत के कगार पर पहुंच जाते हैं, जबकि कुछ अन्य वायरस के चंगुल से बाहर निकल आते हैं? क्या वायरस इतनी तेजी से परिवर्तित हो रहा है कि टीके और दवाओं के विकास की दिशा में हमारे प्रयास बेकार हो जाएंगे या यह परिवर्तन बहुत ही मामूली है? इस प्रकार के कई सवाल मौजूद हैं, जिनका जवाब दुनिया भर के वैज्ञानिक खोज रहे हैं।

नोवेल कोरोना वायरस की डिजिटल और आणविक निगरानी के साथ वैज्ञानिक अभी तक नहीं मालूम पहलुओं का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। इस केंद्र को आईजीआईबी में स्थापित किया जाएगा, जहां पर सभी प्रयोगशाला, अनुसंधान केंद्र और अस्पताल, क्लाउड शेयरिंग के माध्यम से अपना डेटा साझा करेंगे।

इस निगरानी को तीन स्तरों पर किया जाएगा: वायरस, रोगी और रोगी की चिकित्सा प्रक्रिया। वायरस स्तर पर निगरानी, वायरस के जीनोम को संदर्भित करता है। इसके लिए, सीसीएमबी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि यह जीनोम अनुक्रमणों को उपलब्ध कराएगा। डॉ. राकेश मिश्रा, निदेशक, सीसीएमबी ने इंडिया साइंस वायर से कहा, “हम जीनोम अनुक्रमण और नमूना परीक्षण के बारे में जानकारी प्रदान करेंगे। जैसा कि हम व्यापक परीक्षण कर रहे हैं, हम नमूनों के परिणामों को प्रदान कर सकते हैं जिसका उपयोग प्रसार, अलगाव और विभिन्न प्रकार की संबंधित जानकारियों को समझने के लिए किया जा सकता है।”

दूसरा हिस्सा रोगी डेटा से संबंधित है, जो नैदानिक नमूनों वाले रोगियों का विवरण है। नैदानिक ​​पाठ्यक्रम विवरण, नैदानिक ​​देखभाल डेटा या अस्पताल डेटा होगा, जो नतीजे निकलकर सामने आते हैं। कुछ रोगियों को वेंटिलेटर की आवश्यकता होती है, जबकि कुछ अपने आप ठीक होने में सक्षम होते हैं। कुछ रोगियों में जीवन के लिए खतरनाक साइटोकिन उपद्रव विकसित होता है, कई संक्रमण से आसानी से बचकर निकलने में सक्षम होते हैं। “इन सभी चीजों के लिए हम अखिल भारतीय स्तर पर राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) के साथ काम कर रहे हैं और हम स्थानीय अस्पतालों के साथ भी काम कर रहे हैं। हम देश भर के सभी अस्पतालों से पूछ रहे हैं जिससे पिछले हिस्से तक हमारी पहुंच ज्यादा से ज्यादा हो सके। हम एक एंड-टू-एंड नेटवर्क स्थापित करने की कोशिश करते हैं, जिसमें हम सभी चीजों के डेटा को इकट्ठा करते हैं”, डॉ. अनुराग अग्रवाल, निदेशक, आईजीआईबी ने कहा। परीक्षण डेटा का उपयोग करके, जो अलक्षणी संक्रमित लोगों और हल्के प्रभाव वाले लक्षण रखने वाले लोगों की पहचान करते हैं, इस अध्ययन में अस्पताल नेटवर्क के बाहर संक्रमित लोग भी शामिल किए जाएंगे। इस निगरानी में उस आबादी पर नजर रखी जा सकेगी, जहां पर फैलाव उग्र है और जिस आबादी में फैलाव को नियंत्रित किया गया है।

डॉ. अग्रवाल के अनुसार, सब कुछ खुले लेकिन गोपनीय प्रारूप में किया जाएगा। यह नीति के मामले में गोपनीय होगा जबकि सरकार के अनुसार पहुंच के पात्र किसी भी व्यक्ति के संदर्भ में खुला होगा। डेटा को किसी के द्वारा डाउनलोड नहीं किया जा सकेगा क्योंकि इसका कोई भी हिस्सा गोपनीय हो सकता है। हालांकि, सरकार में कोई भी अगर सही कारणों से आंकड़ों पर नजर रखना चाहता है, तो डेटा उपलब्ध कराया जाएगा और फिर इसमें निजता का स्तर दूसरा होगा। “वायरल जीनोम को सार्वजनिक अमानतों में रखा जाएगा; अस्पताल के पाठ्यक्रम और कोई भी जानकारी को पूर्ण रूप से चिन्हित किया जाएगा। लेकिन हम केवल चिन्हित किए गए डेटा को ही प्राप्त करते हैं”, डॉ. अग्रवाल ने कहा।

यह डेटा सरकार को उपलब्ध कराया जाएगा जिससे कि इसको हाल ही में सरकार द्वारा शुरू किए गए आरोग्य सेतु ऐप से जोड़ा जा सके। इसका उद्देश्य अधिकतम संख्या में लोगों तक लाभ पहुंचाने का है। “ऐसे किसी भी व्यक्ति का जो दिए गए कार्यक्षेत्र में डेटा का योगदान करने और इस प्रयास का हिस्सा बनने के लिए इच्छुक है, हमारी ओर से स्वागत है”, डॉ. अग्रवाल ने कहा।

(मुख्य शब्द: डिजिटल निगरानी, डेटा, जीनोम अनुक्रमण, चिकित्सकीय डेटा, आरोग्य सेतु, सीसीएमबी, आईजीआईबी)

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एएम/एके/डीए-

गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एकल और बहु-ब्रांड मॉलों की दुकानों को छोड़कर कुछ श्रेणियों की दुकानें खोलने का आदेश जारी किया

गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एकल और बहु-ब्रांड मॉलों की दुकानों को छोड़कर कुछ श्रेणियों की दुकानें खोलने का आदेश जारी किया

लॉकडाउन प्रतिबंधों में दी गई ये छूट हॉटस्पॉट्स/कन्टेनमेंट जोन में लागू नहीं होगी

गृह मंत्रालय (एमएचए) ने 15 अप्रैल, 2020 को कोविड-19 से लड़ने के लिए समेकित संशोधित दिशानिर्देशों के तहत, हॉटस्पॉट्स/ कंटेंनमैंट ज़ोन में शामिल नहीं होने वाले कुछ क्षेत्रों में कुछ ख़ास गतिविधियों को छूट देने का आदेश जारी किया था।

(https://www.mha.gov.in/sites/default/files/MHA%20order%20dt%2015.04.2020%2C%20with%20Revised%20Consolidated%20Guidelines_compressed%20%283%29.pdf)

वाणिज्यिक और निजी प्रतिष्ठानों की श्रेणी में छूट देते हुए, गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों को एक आदेश जारी करते हुए संबंधित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के दुकान और स्थापना अधिनियम के तहत पंजीकृत आवासीय परिसरों, पड़ोस और एकांत में चलने वाली सभी दुकानों को खोलने की अनुमति दे दी है।

नगर निगमों और नगर पालिकाओं की सीमा को छोड़कर, बाजार परिसरों की दुकानों को खोलने की अनुमति होगी। एकल और बहु-ब्रांड मॉल की दुकानों को कहीं भी खोलने की अनुमति नहीं होगी।

अनुमति प्राप्त सभी दुकानों के लिए सिर्फ 50 प्रतिशत स्टाफ के साथ दुकान खोलना, मास्क पहनना और सोशल डिस्टेंसिंग के मानदंडों का सख्ती से पालन करना अनिवार्य होगा।

यह ध्यान रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि लॉकडाउन प्रतिबंधों में दी गई ये छूट हॉटस्पॉट्स/कंटेंनमैंट क्षेत्रों में लागू नहीं होगी।

आधिकारिक संप्रेषण को देखने के लिए यहां क्लिक करें

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एएम/एसएस

 

दुकानें खोलने की अनुमति देने वाले गृह मंत्रालय के आदेश पर स्पष्टीकरण

दुकानें खोलने की अनुमति देने वाले गृह मंत्रालय के आदेश पर स्पष्टीकरण

ग्रामीण क्षेत्रों में , शॉपिंग मॉल की दुकानों को छोड़, सभी दुकानों को खोलने की अनुमति है

शहरी क्षेत्रों में सभी एकल दुकानों, आस-पड़ोस की दुकानों और आवासीय परिसरों में स्थित दुकानों को खोलने की अनुमति है

शहरी क्षेत्रों में बाजारों/बाजार परिसरों और शॉपिंग मॉल की दुकानों को खोलने की अनुमति नहीं है

गृह मंत्रालय ने दुकानों को खोलने की अनुमति देने के लिए लॉकडाउन उपायों पर जारी समेकित संशोधित दिशा-निर्देशों में संशोधनों पर कल एक आदेश जारी किया था।

 (https://pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1618049)

 

इस आदेश का तात्पर्य यह है कि:

·         ग्रामीण क्षेत्रों में, सभी दुकानों को खोलने की अनुमति है। हालांकि, शॉपिंग मॉल में स्थित दुकानें इनमें शामिल नहीं हैं।

·            शहरी क्षेत्रों में, सभी एकल दुकानों, आस-पड़ोस की दुकानों और आवासीय परिसरों में स्थित दुकानों को खोलने की अनुमति है। हालांकि, बाजारों/बाजार परिसरों और शॉपिंग मॉल में स्थित दुकानों को खोलने की अनुमति नहीं है।

 

यह स्पष्ट किया जाता है कि ई-कॉमर्स कंपनियों को केवल आवश्यक वस्तुओं की ही बिक्री करने की अनुमति है।  

 

यह भी स्पष्ट किया जाता है कि शराब की बिक्री के साथ-साथ उन अन्य वस्तुओं की भी बिक्री प्रतिबंधित है, जिनके बारे में कोविड-19 के प्रबंधन संबंधी राष्ट्रीय निर्देशों में निर्दिष्ट किया गया है।  

 जैसा कि समेकित संशोधित दिशा-निर्देशों में निर्दिष्ट किया गया है, उपर्युक्‍त दुकानों को उन सभी क्षेत्रों, चाहे वे ग्रामीण हों या शहरी, में खोलने की अनुमति नहीं है,  जिन्हें संबंधित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा नियंक्षण क्षेत्र (कंटेनमेंट जोन) घोषित किया गया है।

 

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एएम/आरआरएस- 6521                                                                                          

                        

 

 

 

 

 

 

घुटन से बचा सकता है मास्क पर इस हर्बल स्प्रे का छिड़काव

पत्र सूचना कार्यालय

भारत सरकार
विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय

25-अप्रैल-2020 15:42 IST

घुटन से बचा सकता है मास्क पर इस हर्बल स्प्रे का छिड़काव

यह हर्बल डीकन्जेस्टैंट स्प्रे किसी इन्हैलर की तरह काम करता है

इसका उपयोग पूरी तरह से सुरक्षित है

स्प्रे करने के बाद मास्क का उपयोग करने पर नासिका और श्वसन तंत्र खुल जाता है और फिर सांस लेने में परेशानी नहीं होती

 

कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए मास्क के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। पुलिस, डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मियों और अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को लंबे समय मास्क लगाना पड़ रहा है, जिससे उन्हें कई बार सांस लेने में घुटन महसूस होती है। भारतीय वैज्ञानिकों ने एक हर्बल डीकन्जेस्टैंट स्प्रे विकसित किया है, जो इस समस्या से निजात दिलाने में मददगार हो सकता है।

यह हर्बल डीकन्जेस्टैंट स्प्रेकिसीइन्हैलर की तरह काम करता है, जिसे नेशनल बोटैनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनबीआरआई) के शोधकर्ताओं द्वारा तैयार किया गया है।लखनऊ स्थित एनबीआरआई काउंसिल ऑफ साइंटिफिक ऐंड इंडस्ट्रियल रिसर्च की एक प्रयोगशाला है, जिसे मुख्य रूप से वनस्पतियों पर किए जाने वाले उसके अनुसंधान कार्यों के लिए जाना जाता है। एनबीआरआई के इस हर्बल स्प्रे के शुरुआती नतीजे बेहद शानदार मिले हैं। देर तक मास्क पहनने वाले लोगों को इससे काफी राहत मिल रही है।

एनबीआरआई के मुख्य वैज्ञानिक डॉ शरद श्रीवास्तव ने इंडिया साइंस वायर को बताया कि “इस हर्बल डीकन्जेस्टैंट स्प्रे को औषधीय और सगंध पौधों से तैयार किया गया है और इसका उपयोग पूरी तरह से सुरक्षित है।जिन पादप तत्वों का उपयोग इस स्प्रे में किया गया है, उनके नाम का खुलासा बौद्धिक संपदा संबंधी कारणों से अभी नहीं किया जा सकता। इसेसिर्फ एक बार मास्क पर स्प्रे करना होता है। स्प्रे करने के बाद मास्क का उपयोग करने पर नासिका और श्वसन तंत्र खुल जाता है और फिर सांस लेने में परेशानी नहीं होती।

इस स्प्रे को आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के आधार पर तैयार किया गया है। संस्थान की योजना इस इन्हैलर की तकनीक को व्यावसायिक उत्पादन के लिए हस्तांतरित करने की है, ताकि बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन किया जा सके और इसे जरूरतमंदों तक पहुँचाया जा सके।

[For More Details : Dr. RK Sud, CSIR-IHBT, Palampur, Himachal Pradesh

Email :rksud@ihbt.res.in]

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KGS/(DST/(इंडिया साइंस वायर))

भारतीय रेलवे में वापस पटरी पर आ रहा है रेल कोच का निर्माण कार्य

पत्र सूचना कार्यालय

भारत सरकार
रेल मंत्रालय

25-अप्रैल-2020 16:23 IST

भारतीय रेलवे में वापस पटरी पर आ रहा है रेल कोच का निर्माण कार्य

आरसीएफ कपूरथला ने 23 अप्रैल, 2020 को फिर से शुरू कर दी है अपनी निर्माण प्रक्रिया 

राज्यों में लॉकडाउन के आदेशों को ध्‍यान में रखते हुए  अन्य इकाइयां भी राज्य सरकारों से मंजूरी मिलते ही शुरू कर देंगी निर्माण कार्य  

आरसीएफ ने माल ढुलाई बढ़ाने के लिए पिछले 2 दिनों में तैयार किए हैं 2 पार्सल कोच

भारतीय रेलवे की उत्पादन इकाई ‘रेल कोच फैक्ट्री (आरसीएफ), कपूरथला’ ने 28 दिनों के देशव्‍यापी लॉकडाउन के बाद 23 अप्रैल, 2020 को अपनी उत्पादन प्रक्रिया फिर से शुरू कर दी है। कोविड-19 के खिलाफ अथक लड़ाई के बीच गृह मंत्रालय और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी सभी सुरक्षा सावधानियों एवं दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए इस कारखाने को फि‍र से खोला गया है। कुल मिलाकर 3744 कर्मचारियों को काम शुरू करने की अनुमति दी गई है जो आरसीएफ परिसर टाउनशिप के अंदर रह रहे हैं। गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों और राज्य सरकारों की एडवाइजरी के अनुसार भारतीय रेलवे की अन्य उत्पादन इकाइयां भी इस बारे में परामर्श मिलते ही निर्माण कार्य फिर से शुरू कर देंगी।

निर्माण के लिए संसाधनों की सीमित उपलब्धता के बावजूद आरसीएफ कपूरथला ने सिर्फ दो कार्य दिवसों में ही दो कोच तैयार कर लिए हैं। इनमें एक-एक एलएचबी हाई कैपेसिटी पार्सल वैन और लगेज कम जेनरेटर कार शामिल हैं जो क्रमशः 23 अप्रैल, 2020 और 24 अप्रैल, 2020 को तैयार की गई हैं।

लॉकडाउन के बाद ड्यूटी में शामिल होने वाले सभी कर्मचारियों को एक-एक सेफ्टी किट जारी की गई है जिसमें मास्क, सैनिटाइजर की बोतल और साबुन शामिल हैं। अनुमति प्राप्‍त सभी कर्मचारियों को कोच के निर्माण के लिए कारखाने में ड्यूटी पर बुलाया गया है। प्रशासनिक कार्यालयों में सभी अधिकारी अपने-अपने कार्यालयों में ड्यूटी पर वापस आ गए हैं और 33 प्रतिशत कर्मचारियों को रोटेशन रोस्टर के आधार पर ड्यूटी पर बुलाया जा रहा है। कोविड जागरूकता पोस्टरों के साथ-साथ उन सभी सुरक्षा निर्देशों को कार्यशाला, कार्यालयों और आवासीय परिसरों में प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित किया गया है जिनका पालन किया जाना है। सभी श्रमिकों को उनके पर्यवेक्षकों और अधिकारियों द्वारा नियमित रूप से परामर्श दिया जा रहा है, ताकि कार्य स्थल पर सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन किया जा सके। कर्मचारियों के लिए शॉप फ्लोर और कार्यालयों में हैंड्स फ्री लिक्विड सोप डिस्पेंसर और वॉश बेसिन पर्याप्त संख्‍या में उपलब्ध कराए गए हैं।

श्रमिकों को तीन शिफ्टों में अलग-अलग समय पर बुलाया जा रहा है। सभी तीनों पारियों (शिफ्ट) के लिए प्रवेश के समय, दोपहर के भोजन के समय और बाहर निकलने के समय के बीच काफी अंतर रखा गया है। प्रवेश द्वारों पर थर्मल स्कैनर द्वारा हर कर्मचारी की स्‍क्रीनिंग की जा रही है, ताकि उनके शरीर के तापमान को मापा जा सके। आरसीएफ परिसर में प्रवेश करने वाले प्रत्येक वाहन को प्रवेश द्वारों पर उपलब्‍ध फुहार प्रक्षालक सुरंग द्वारा सैनिटाइज किया जा रहा है। सभी कर्मचारी अपने-अपने कार्य स्थलों पर सामाजिक दूरी बनाए रखने के प्रोटोकॉल और समस्‍त सुरक्षा एवं स्वच्छता दिशा-निर्देशों का पालन कर रहे हैं। आरसीएफ परिसर में स्थित लाला लाजपत रेल अस्पताल ने कोविड के संक्रमण के किसी भी लक्षण वाले रोगियों के लिए अलग-अलग काउंटर और ओपीडी सेल उपलब्ध कराए हैं। कोविड से संबंधित किसी भी मामले को संभालने के लिए आरसीएफ परिसर में 24 बेड वाला क्‍वारंटाइन केंद्र और एलएलआर अस्पताल में 8 बेड वाला आइसोलेशन वार्ड पूरी तरह से तैयार है।

राज्यों में लॉकडाउन के आदेशों को ध्‍यान में रखते हुए अन्य इकाइयां भी राज्य सरकारों से मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर देंगी।

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एएम/आरआरएस- 6522                                                                                         

 

 

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने  देश भर में आवश्यक वस्‍तुओं की ढुलाई कर रहे ट्रक / लॉरी ड्राइवरों के लिए क्‍या करें और क्‍या न करें के बारे में एक एनीमेशन वीडियो चित्रण उपलब्‍ध कराया है

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने  देश भर में आवश्यक वस्‍तुओं की ढुलाई कर रहे ट्रक / लॉरी ड्राइवरों के लिए क्‍या करें और क्‍या न करें के बारे में एक एनीमेशन वीडियो चित्रण उपलब्‍ध कराया है

लॉकडाउन के दौरान आवश्यक वस्‍तुओं और दवाइयों को एक स्‍थान से दूसरे ले जा रहे ट्रक / लॉरी ड्राइवरों का सम्मान करने का आह्वान

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने  देश भर में आवश्यक वस्‍तुओं की ढुलाई कर रहे ट्रक / लॉरी ड्राइवरों के लिए क्‍या करें और क्‍या न करें की मोटे तौर पर जानकारी देने से संबंधित एक एनीमेशन वीडियो चित्रण जारी किया है। इस एनीमेशन में लोगों से ट्रक / लॉरी ड्राइवरों का सम्मान करने का आह्वान किया गया है, जो ऐसे परिदृश्‍य में आवश्यक वस्‍तुओं और दवाइयों को एक स्‍थान से दूसरे पर पहुंचाकर हमारे जीवन को आसान बनाने में जुटे हैं, जब सरकार को कोविड-19 पर काबू पाने  और जीवन की रक्षा करने के लिए लॉकडाउन की अवधि बढ़ानी पड़ी है। 

आकर्षक ग्राफिक एनीमेशन में जारी किए गए क्‍या करें और क्‍या न करें में उल्‍लेख किया गया है :

 

:नोवल कोरोनावायरस रोग (कोविड-19) से सुरक्षा

:ट्रक/लॉरी ड्राइवरों का सम्मान एवं सहयोग करें, जो लॉकडाउन के दौरान आवश्यक वस्तुओं और दवाइयों की आपूर्ति श्रृंखला को बरकरार रखें हैं

:ख़ुद को एवं दूसरों को सुरक्षित रखें और बचाव के नियमों का पालन करें

क्या करें:

● ख़ुद को स्वच्छ रखें

●जब भी मौका मिले तब किसी भी साबुन और पानी से कम-से-कम 20 सेकंड तक अपने हाथों को धोएं

● वाहन चलाते समय/वाहन से बाहर निकलने पर मास्क ज़रूर पहनें

● मास्क के प्रयोग के बाद उसे साबुन और पानी से धोएं और सुखा लें

● अपने वाहन में हमेशा सैनिटाइज़र रखें

●  वाहन चलाते समय/वाहन से बाहर निकलने से पहले 70% अल्कोहल-आधारित हैंड सैनिटाइज़र का प्रयोग करें

● निर्धारित नियमों के अनुसार वाहन में अपने साथ सहायक और ड्राइवर के अलावा किसी अन्‍य के साथ यात्रा न करें

● एक-दूसरे से उचित दूरी बनाएं रखें

● चेक पोस्ट/लोडिंग-अनलोडिंग प्वाइंट/रेस्तरां आदि जगहों पर लोगों के निकट संपर्क में आने से बचें

●  अपने वाहन को रोजाना सैनिटाइज करें

 

क्या ना करें:

●फटे/पुराने और किसी दूसरे के मास्क का इस्तेमाल बिल्कुल ना करें

● अपने वाहन में एक से अधिक सहायक को बैठने की अनुमति ना दें

● लोगों से मिलना-जुलना ना करें

● अपनी स्वच्छता को नज़रअंदाज़ ना करें

आइए, हम सब एक-दूसरे का ख्याल रखें और कोविड-19 को बढ़ने से रोकें

वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक करें

 

एएम/आरके/डीसी