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गौड़ा ने रसायन एवं पेट्रोकेमिकल्स उद्योग को पहली बार सबसे ज्यादा निर्यात करने वाला क्षेत्र बनने पर बधाई दी, अप्रैल 2019 से जनवरी 2020 के बीच 2.68 लाख करोड़ रुपये का निर्यात

केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री सदानंद गौड़ा ने रसायन एवं पेट्रोकेमिकल्स उद्योग को पहली बार देश का शीर्ष निर्यात क्षेत्र बनने पर बधाई दी। उन्होंने भारत को रसायनों और पेट्रोकेमिकल्स के उत्पादन का एक अग्रणी वैश्विक केंद्र बनाने और विश्व में गुणवत्ता वाले रसायनों की आपूर्ति करने की दिशा में पूर्ण समर्थन देने का आश्वासन दिया है।
इस उपलब्धि में अपने विभाग द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए, श्री गौड़ा अपने ट्वीट में कहा, “मेरे रसायन एवं पेट्रोकेमिकल्स विभाग द्वारा किए गए निरंतर प्रयासों के कारण यह उद्योग पहली बार सबसे ज्यादा निर्यात करने वाला क्षेत्र बन गया है।
उन्होंने बताया कि अप्रैल 2019 से जनवरी 2020 के दौरान, रसायनों के निर्यात में पिछले वर्ष इसी अवधि की तुलना में 7.43 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इस अवधि के दौरान रसायनों का कुल निर्यात 2.68 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह कुल निर्यात का 14.35% है।

एएम/एके-

मंत्रियों के समूह ने मौजूदा हालात और कोविड-19 से निपटने के लिए किए गए कार्यों की समीक्षा की

मंत्रियों के समूह ने मौजूदा हालात और कोविड-19 से निपटने के लिए किए गए कार्यों की समीक्षा की

डॉ. हर्षवर्धन ने कोविड-19 से लड़ने में सभी हितधारकों के सामूहिक प्रयासों की सराहना की

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन की अध्यक्षता में आज यहां निर्माण भवन में कोविड-19 पर उच्च स्तरीय मंत्रियों के समूह (जीओएम) की 13वीं बैठक हुई। इस बैठक में नागरिक उड्डयन मंत्री श्री हरदीप एस पुरी, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, गृह राज्यमंत्री श्री नित्यानंद राय, जहाजरानी और रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्री मनसुख मंडाविया तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री अश्विनी कुमार चौबे भी मौजूद थे। इस बैठक में चीफ ऑफ डिफेंस (सीडीएस) श्री बिपिन रावत, नीति आयोग के सीईओ एवं अधिकार संपन्न समूह-6 के अध्यक्ष श्री अमिताभ कांतसचिव (पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन) तथा अधिकार संपन्न समूह-2 के अध्यक्ष श्री सी के मिश्रा, सचिव (एमएसएमई) और अधिकार संपन्न समूह-4 के अध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार पांडा तथा अधिकार संपन्न समूह-3 के अध्यक्ष श्री पी डी वघेला भी उपस्थित थे।

जीओएम के समक्ष कोविड-19 की प्रतिक्रिया और प्रबंधन के साथ ही देश में कोविड-19 की स्थिति पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई। जीओएम ने कोविड-19 से बचाव, नियंत्रण एवं प्रबंधन के लिए केंद्र एवं विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा आज की तिथि तक किए गए उपायों पर विस्तार से चर्चा की। जीओएम को सूचित किया गया कि सभी जिलों को कोविड-19 से लड़ने के लिए उनकी आकस्मिक योजनाओं का अनुसरण करने और उन्हें और सुदृढ़ बनाने को कहा गया है। जीओएम को आइसोलेशन बेडों/वार्ड, पीपीई, एन95 मास्क, दवाओं, वेंटिलेटरों, ऑक्सीजन सिलेंडरों आदि की पर्याप्तता के साथ-साथ समर्पित कोविड-19 अस्पतालों के राज्य वार विवरणों के बारे में जानकारी दी गई। जीओएम को सूचित किया गया कि जिन घरेलू विनिर्माताओं की पहले पहचान की गई थी, उन्होंने पीपीई, मास्कों, आदि का उत्पादन करना आरंभ कर दिया है और अब इनकी पर्याप्त मात्रा देश में उपलब्ध हैं। आज की तिथि में देश में प्रति दिन 1 लाख से अधिक पीपीई एवं एन95 मास्कों का निर्माण किया जा रहा है। वर्तमान में देश में पीपीई के 104 घरेलू विनिर्माता हैं और तीन एन95 मास्क बना रहे हैं। इसके अतिरिक्त, घरेलू विनिर्माताओं के द्वारा वेंटिलेटरों का उत्पादन भी आरंभ हो गया है और नौ विनिर्माताओं के जरिये 59,000 से अधिक इकाइयों के लिए आर्डर दिए जा चुके हैं।

जीओएम ने टेस्टिंग कार्यनीति एवं हॉटस्पॉटों एवं क्लस्टर प्रबंधन के लिए कार्यनीति के साथ साथ देश भर में टेस्टिंग किट्स की उपलब्धता की भी समीक्षा की। जीओएम को वर्तमान में कोविड-19 के लिए जांच कर रही सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र की प्रयोगशालाओं की संख्या और उन टेस्टों जिनका संचालन प्रति दिन प्रयोगशालाओं के इस नेटवर्क के जरिये किया जा रहा है, की संख्या के बारे में भी जानकारी दी गई।

जीओएम ने विभिन्न अधिकार संपन्न समितियों को सुपुर्द विभिन्न कार्यों पर विचार किया। श्री अमिताभ कांत, डॉ. अरुण कुमार पांडा और श्री प्रदीप खारोला द्वारा प्रस्तुति दी गयी। जीओएम को बताया गया कि लगभग 92,000 एनजीओ, एसएचजी एवं सिविल सोसाइटी संगठन विभिन्न राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों में कार्य कर रहे हैं और प्रवासी मजदूरों को भोजन उपलब्ध कराने के जरिये योगदान दे रहे हैं। इन एनजीओं को राज्यों द्वारा एसडीआरएफ फंड से धन मुहैया कराया जा रहा है और एफसीआई के द्वारा उन्हें सब्सिडी दरों पर खाद्यान उपलब्ध करा रहा है।  

जीओएम को यह भी सूचित किया गया कि स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, एनएसएस, एनवाईके, एनसीसी, चिकित्सकों, आदि का एक राष्ट्रीय स्तर का मेटा-डाटा तैयार किया गया है और अधिक आवश्यकता वाले स्थानों पर संसाधनों/स्वयंसेवकों (कोविड योद्धाओं) को जुटाने के लिए सभी राज्य, जिला एवं अन्य अधिकारियों के साथ उसे साझा किया जा रहा है। वर्तमान में डैशबोर्ड पर 1.24 करोड़ से अधिक मानव संसाधन के डाटा हैं और विशिष्टीकरण के अनुसार नए समूहों एवं उप समूहों को जोड़े जाने के जरिये इसका निरंतर अद्यतन किया जा रहा है। डैशबोर्ड में संबंधित राज्य एवं जिला नोडल अधिकारियों के संपर्क विवरणों के साथ साथ प्रत्येक समूह से उपलब्ध मानव संसाधनों की संख्या के बारे में राज्यवार एवं जिलावार सूचना निहित है। यह डैशबोर्ड https://covidwarriors.gov.in/default.aspx पर उपलब्ध है और  https://diksha.gov.in/igot/ पोर्टल से जुड़ा है और साथ ही क्षमता निर्माण प्रयोजन वाले पोर्टल से भी लिंक्ड है। इन कोविड योद्धाओं को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की वेबसाइट एवं आईजीओटी प्रशिक्षण पोर्टल जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिये प्रशिक्षित किया जा रहा है। प्लेटफॉर्म के 53 मॉड्यूल के साथ 14 कोर्स हैं जिसमें 113 वीडियो एवं 29 डॉक्यूमेंट शामिल हैं। अभी तक 10 लाख से अधिक कार्मिकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।

डॉ. हर्षवर्धन ने सभी स्तरों पर सभी हितधारकों के समर्पण एवं कड़ी मेहनत की सराहना की। उन्होंने सूचित किया कि रोगियों के साथ भेदभाव एवं कोविड-19 का मुकाबला करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के मुद्दों का समाधान करने की तात्कालिक आवश्यकता को देखते हुए महामारी रोग अधिनियम 1897 के संशोधन के लिए अध्यादेश को हाल ही में काफी सख्त प्रावधानों के साथ प्रख्यापित किया गया है। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि, ‘यह केवल उनकी ही लड़ाई नहीं है बल्कि हमारा सामूहिक प्रयास है। वे हमारे अग्रिम पंक्ति के योद्धा हैं और एक राष्ट्र के रूप में हम न केवल उनके योगदान का सम्मान करें बल्कि यह सुनिश्चित करें कि उनकी हिफाजत और मर्यादा की भी रक्षा हो।

जीओएम को सूचित किया गया कि वर्तमान में मृत्यु दर लगभग 3.1 प्रतिशत है जबकि रिकवरी दर 20 प्रतिशत से अधिक है जोकि अधिकांश देशों की तुलना में बेहतर है और इसे क्लस्टर प्रबंधन और नियंत्रण रणनीति के साथ साथ देश में लॉकडाउन के सकारात्मक प्रभाव के रूप में लिया जा सकता है। वर्तमान में देश में औसत डबलिंग रेट 9.1 दिन की है।

जीओएम को यह भी सूचित किया गया कि अभी तक 20.66 प्रतिशत की रिकवरी दर से 5,062 लोग स्वस्थ हो चुके हैं। कल से, 1429 नए मामलों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। साथ ही, कुल 24,506 लोगों की कोविड-19 के लिए पोजिटिव होने की पुष्टि हो चुकी है।

बैठक में सचिव (एचएफडब्ल्यू) सुश्री प्रीति सूदन, सचिव (विदेश मामले) श्री एच वर्धन श्रृंगला, सचिव (कपड़ा) श्री रवि कपूर, सचिव (नागरिक उड्डयन) श्री प्रदीप सिंह खरोला, सचिव (फार्मास्यूटिकल्स) श्री पी डी वघेला, सचिव (वाणिज्य) श्री अनुप वधावन, विशेष सचिव (स्वास्थ्य) श्री संजीव कुमार, अपर सचिव (जहाजरानी) श्री संजय वंद्योपाध्याय, अपर सचिव (गृह) श्री दम्मु रवि, अपर सचिव (एमएचए) श्री अनिल मलिक, आईजी (आईटीबीपी) श्री आनंद स्वरूप, डीजीएचएस डॉ. राजीव गर्ग, आईसीएमआर के इपिडेमियोलॉजी एवं संक्रामक रोग के प्रमुख डॉ. रमन गंगाखेडकर तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में संयुक्त सचिव श्री लव अग्रवाल और एनसीडीसी, सेना, आईटीबीपी, फार्मा, डीजीसीए और कपड़ा मंत्रालय के अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।

कोविड-19 संबंधित तकनीकी मुद्दों, दिशानिर्देशों एवं एडवाइजरी पर सभी प्रमाणिक एवं अद्यतन जानकारी के लिए कृप्या नियमित रूप से   https://www.mohfw.gov.in/ का अवलोकन करें।

कोविड-19 संबंधित तकनीकी पूछताछ के लिए   technicalquery.covid19@gov.in  पर तथा अन्य प्रश्नों के लिए ncov2019@gov.in.  पर ईमेल करें और  @CovidIndiaSeva   पर भी ट्वीट करें जो लगभग रियल टाइम रिस्पांस उपलब्ध कराता है।

कोविड-19 पर किसी पूछताछ के मामले में कृप्या स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय हेल्पलाइन संख्या  +91-11-23978046 या 1075 टोल फ्री पर काल करें। कोविड-19 पर राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों की हेल्पलाइन संख्या की सूची  https://www.mohfw.gov.in/pdf/coronvavirushelplinenumber.pdfर भी उपलब्ध है।

 

एएम/ एसकेजे

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कोविड-19 के खिलाफ भारत की जंग का जायजा लेने के लिए पूर्व नौकरशाहों के साथ व्‍यापक विचार विमर्श किया

पत्र सूचना कार्यालय
केन्द्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने आज कोविड-19 के खिलाफ भारत की जंग और लॉकडाउन पश्‍चात एक्जिट प्‍लान के रास्‍ते तलाशने के बारे में पूर्व नौकरशाहों के साथ व्‍यापक विचार विमर्श किया।
सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों श्री सुधीर भार्गव, श्री राम सुंदरम, श्री राकेश कुमार गुप्ता, श्री सत्यानंद मिश्रा, श्री पी.पन्नीरवेल और श्री के वी इपेन, और पूर्व आईआरएस अधिकारियों सुश्री संगीता गुप्ता, सुश्री शीला सांगवान के साथ एक-डेढ़ घंटे की वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉ.जितेंद्र सिंह ने उन्हें महामारी से निपटने के लिए सरकार द्वारा प्रभावी तरीके से किए गएअब तक के प्रयासों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत ने इस महामारी पर काबू पाने के लिए अपने अग्रसक्रिय उपायों के माध्यम से दुनिया के कई उन्‍नत देशों से बेहतर प्रदर्शन किया है।
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अधिकारियों ने महामारी को रोकने के लिए विभिन्न उपायों के माध्यम से किए गए सरकार के प्रयासों की सराहना की और अर्थव्यवस्था को पुन: पटरी पर लाने के लिए संभावित लॉकडाउन पश्‍चात एक्जिट प्‍लान के बारे में भी अपने विचार साझा किए। वीडियो कॉन्‍फ्रेंस में हुए विचार विमर्श के दौरान अधिकारियों ने चरणबद्ध रूप से लॉकडाउन समाप्‍त करने, प्रशासन में प्रौद्योगिकी का अधिक उपयोग करने अर्थात ई-ऑफिस, विटामिन-सी के सेवन के जरिए प्रतिरक्षा बढ़ाने के महत्‍व, अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए राजकोषीय प्रोत्साहन, गरीबों को वित्तीय सुरक्षा, शैक्षणिक वर्ष का उपयोग करने के लिए अधिक ऑनलाइन पाठ्यक्रम और परीक्षा शुरू करने, प्रवासी कामगारों को उनके मूल स्‍थानों तक पहुंचने में सहायता करने, मेक इन इंडिया अवधारणा को प्रोत्‍साहन देते हुए स्वदेशी तकनीक से वैक्सीन और परीक्षण किट के विकास जैसे मामलों को भी रेखांकित किया।
डॉ.जितेंद्र सिंह ने इस विषय पर बहुमूल्य सुझाव देने के लिए नौकरशाहों का आभार प्रकट किया और कहा कि कोरोना महामारी के खतरे से लड़ने के लिए सभी वर्गों से ज्ञान प्राप्त करने के लिए भविष्य में भी इस तरह का सम्‍पर्क जारी रहेगा।
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एएम/आरके/डीए

एपीआई एवं दवा मध्यवर्तियों पर निर्भरता कम करने के लिए सीएसआईआर-आईआईसीटी पहल

पत्र सूचना कार्यालयएक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेडिएंट्स (एपीआई)एवं इंटरमेडिएट्स (मध्यवर्ती)किसी भी औषधि के दो प्रमुख घटक होते हैं जो लक्षित प्रभाव पैदा करते हैं। भारत एपीआई एवं दवा मध्यवर्तियों की आपूर्ति के लिए विशेष रूप से चीन पर काफी निर्भर है। अब भारतीय रसायन प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी), हैदराबाद एपीआई एवं दवा मध्यवर्तियों के विकास एवं विनिर्माण के लिए हैदराबाद स्थित एक अन्य इंटीग्रटेड फार्मास्यूटिकल कंपनी, एलएएक्सएआई लाईफ साईंसेज के साथ गठबंधन कर रही है। यह पहल इन इंग्रेडिएंट्स की चीनी आयातों पर भारतीय फार्मास्यूटिकल सेक्टर की निर्भरता को कम करने में सहायता करेगी।
वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर)के तहत एक प्रयोगशाला आईआईसीटी कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में प्रयुक्त होने वाली दवाओं के संश्लेषण के लिए एलएएक्सएआई के साथ कार्य कर रही है। यह गठबंधन मुख्य रूप से उमीफेनोवीर, रेम्डेसिविर और हाईड्रोक्सी क्लोरोक्वीन (एचसीक्यू)की एक प्रमुख मध्यवर्ती पर फोकस करेगा।
भारत मलेरिया रोधी दवा एचसीक्यू के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है, जिसकी मांग में हाल के सप्ताहों में काफी उछाल आया है। भारत ने पिछले कुछ दिनों में अमेरिका सहित 50 से अधिक देशों को एचसीक्यू भेजा है। इस गठबंधन का परिणाम प्रमुख कच्चे मालों के लिए चीन पर निर्भरता कम करने के साथ किफायती प्रक्रिया के रूप में आएगा। इसके अतिरिक्त, रेम्डेसिविर, जिसे पहले इबोला वायरस रोगियों को दिया जाता रहा है, वर्तमान में कोविड-19 के खिलाफ प्रभावोत्पादकता और सुरक्षा के मूल्यांकन के लिए क्लिनिकल ट्रायल की प्रक्रिया में है।
यह महसूस करते हुए कि दवा सुरक्षा और अनिवार्य दवाओं तक अबाधित पहुंच सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं, प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत में थोक में दवा विनिर्माण को बढ़ावा देने एवं चीन पर निर्भरता कम करने के लिए एक विशेष पैकेज को मंजूरी दी है।
एलएएक्सएआई लाईफ साईंसेज प्रा. लि. की स्थापना वर्ष 2007 में वैश्विक फार्मास्यूटिकल कंपनियों की डिस्कवरी कैमिस्ट्री अभियान में तेजी लाने के विजन के साथ की गई थी। आज एलएएक्सएआई एपीआई/फार्मूलेशन डेवलपमेंट एवं एपीआई विनिर्माण की उपस्थिति के साथ एक समेकित फार्मास्यूटिकल कंपनी के रूप में विकसित हो गई है।
यह गठबंधन उत्पादों के वाणिज्यिक विनिर्माण के लिए ज्ञान का उपयोग करेगा। एलएएक्सएआई लाईफ साईंसेज इन उत्पादों का वाणिज्यिकरण करने वाली पहली कुछ कंपनियों में होगी। इन एपीआई एवं इंटरमेडिएट्स का विनिर्माण एलएएक्सएआई द्वारा अपनी सहायक कंपनी थेरापिवा प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (यूएसएफडीए)/ गुड मैन्यूफैक्चरिंग प्रैक्टिस (जीएमपी) अनुमोदित संयंत्रों द्वारा की जाएगी।
अधिक जानकारी के लिए: डा. एम चंद्रशेखरम, सीएसआईआरभारतीय रसायन प्रौद्योगिकी संस्थान, हैदराबाद500007, भारत पर संपर्क करें।
ईमेल: headkim@iict.res.in
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एएम/एसकेजे/डीए

पर्यटन मंत्रालय ने “पूर्वोत्तर भारत – विशिष्ट गांवों का अनुभव” विषय पर “देखो अपना देश” श्रृंखला का 8वां वेबिनार आयोजित किया

पर्यटन मंत्रालय ने “पूर्वोत्तर भारत – विशिष्ट गांवों का अनुभव” विषय पर “देखो अपना देश” श्रृंखला का 8वां वेबिनार आयोजित किया

पर्यटन मंत्रालयवेबिनार एक रोचक कार्यक्रम, कई देशों के लोगों ने वेबिनार में भाग लिया

पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार ने “देखो अपना देश” वेबिनार श्रृंखला आयोगित करने की अपनी पहल को जारी रखा है। इस श्रृंखला के तहत 8वां वेबिनार “पूर्वोत्तर भारत – विशिष्ट गांवों का अनुभव” विषय पर आयोजित किया गया। 24 अप्रैल, 2020 को आयोजित किये गये इस कार्यक्रम में असम और मेघालय के विशेष गावों को रेखांकित किया गया था।

पूर्वोत्तर भारत मनोहारी सुंदरता की भूमि है, जो हरा परिदृश्य, नीला जल निकाय, सुखद शांति, अनंत विशालता और मंत्रमुग्ध करने वाली स्थानीय आबादी का एक अद्भुत मिश्रण प्रस्तुत करता है। इसकी भौगोलिक स्थिति की अनंत विविधता, इसकी स्थलाकृति, इसकी विविध वनस्पतियां, जीव-जंतु व पक्षी जीवन, यहाँ के लोगों का इतिहास व जातीय समुदायों की विविधता, प्राचीन परंपराओं और जीवन शैली की समृद्ध विरासत और इसके त्योहार एवं शिल्प इसे एक आश्चर्यजनक पर्यटन स्थल बनाते हैं। इसकी नए सिरे से खोज करने की आवश्यकता है। पूर्वोत्तर की अद्भुत विविधता इसे सभी मौसमों के लिए अवकाश का एक महत्वपूर्ण गंतव्य स्थल बनाती है।

कोयली टूर्स एंड ट्रेवल्स प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ श्री अरिजीत पुरकायस्थ और लैंडस्केप सफारी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर डॉ श्रेया बारबरा के द्वारा वेबिनार प्रस्तुत किया गया।

वेबिनार की मुख्य विशेषताओं में असम और मेघालय के गांवों के रोचक तथ्यों को शामिल किया गया

असम के गांव:

सुआलकुची– गुवाहाटी से लगभग 35 किमी दूर ब्रह्मपुत्र के उत्तरी तट पर स्थित है। सुआलकुची कामरूप जिले का एक ब्लॉक है। यह बुनाई करने वाले दुनिया के सबसे बड़े गांवों में से एक है, जहां 74 प्रतिशत परिवार सुनहरे मूगा, हाथी दांत के सामान सफेद पट, हल्के पीले रंग का ईरी या एंडी सिल्क के रेशमी कपड़े बुनने में लगे हुए हैं। यह गाँव बुनाई की अपनी सदियों पुरानी विरासत के लिए प्रसिद्ध है। यहां के लोग सिल्क प्रजनन की अहिंसा अवधारणा का समर्थन करते हैं जहां रेशम के कीड़े को मारे बिना रेशम प्राप्त किया जाता है। यह पर्यावरण के अनुकूल वातावरण बनाने की दिशा में एक अच्छा कदम है।

रंथली– नागांव जिले का एक छोटा सा गाँव है जो हस्तनिर्मित आभूषणों के लिए प्रसिद्ध है। ये आभूषण इस क्षेत्र के वनस्पतियों और जीवों को चित्रित करते हैं। असमी गहनों के पारंपरिक डिजाइन सरल हैं, लेकिन इनमें गहरे लाल रत्न, रूबी या मीना के सजावट का काम होता है।

हाजो– हाजो गुवाहाटी शहर से 25 किमी दूर है और यह हिंदुओं, बौद्धों और मुसलमानों के लिए तीर्थस्थल के रूप में प्रसिद्ध है। यहां स्थित हयाग्रीव माधव मंदिर और पोवा मक्का मस्जिद बहुत प्रसिद्ध है। ऐसा माना जाता है कि भगवान बुद्ध ने हयग्रीव माधव मंदिर में निर्वाण प्राप्त किया था। इस मंदिर में एक तालाब है जो काले नरम शेल वाली कछुआ प्रजाति को एक सुरक्षित आश्रय प्रदान करता है। कोई उन्हें परेशान नहीं करता क्योंकि लोग उन्हें भगवान विष्णु का अवतार मानते हैं।

दादरा– सारस की लुप्तप्राय प्रजाति जिसे असमिया में हरगीला कहा जाता है,  के लिए दादरा एक सुरक्षित आश्रय है। दुनिया में इस प्रजाति के केवल 1500 से अधिक सारस हैं और लगभग 500 सारस इस गांव में सुरक्षित आश्रय प्राप्त करते हैं। यह इस प्रजाति के सारसों की सबसे बड़ी कॉलोनी है। ग्रीन ऑस्कर पुरस्कार प्राप्त श्रीमती पूर्णिमा देवी बर्मन से हरगीला के संरक्षण की प्रेरक कहानी जानी जा सकती है।

सरथेबारी – असम का घंटी धातु उद्योग, बांस शिल्प के बाद दूसरा सबसे बड़ा हस्तशिल्प उद्योग है। घंटी धातु तांबे और टिन का एक मिश्र धातु है और इस उद्योग के कारीगरों को ‘कहार’ या ‘ओरजा’ कहा जाता है।

निचले असम का नलबाड़ी क्षेत्र– एक साझे सूत्र से जुड़े गांवों का समूह, असम के प्रसिद्ध जापी के उत्पादन के साथ समुदाय आधारित रोजगार। असम की शंकु के आकार की टोपी को जापी कहा जाता है। ऐतिहासिक रूप से जापी को किसानों द्वारा खेतों में धूप से बचाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। आज रंग-बिरंगी, सजी-धजी जापी असम की सांस्कृतिक प्रतीक बन गई है।

बांसबाड़ी– गुवाहाटी से 140 किलोमीटर दूर भूटान की तलहटी में स्थित है। बांसबाड़ी में यूनेस्को प्राकृतिक विश्व धरोहर स्थल, मानस नेशनल पार्क स्थित है। यहाँ कई वनस्पतियों और समृद्ध वन्य जीवन का निवास स्थान है, जिनमें से कई लुप्तप्राय हैं।

असम का चाय बंगला– असम के सबसे बड़े उद्योग चाय उद्योग में विभिन्न  समुदाय और जनजाति समूह कार्यरत हैं। ब्रिटिश युग के चाय बागानों के आकर्षण का अनुभव करने के लिए विभिन्न चाय बागानों ने पर्यटकों के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं।

माजुली– दुनिया के सबसे बड़े नदी द्वीपों में से एक माजुली ब्रह्मपुत्र नदी के बीच में स्थित है। माजुली असमिया नव-वैष्णव संस्कृति का एक केंद्र है, जिसे 15 वीं शताब्दी में असमिया संत श्रीमंत शंकरदेव और उनके शिष्य माधवदेव द्वारा शुरू किया गया था। इसे “असमिया सभ्यता का पालना” के रूप में जाना जाता है।

नम्फेके गांव – इसे सुंदर ताई-फाकी गांव के रूप में भी जाना जाता है। यह  असम के सबसे पुराने और सबसे सम्मानित बौद्ध मठों में से एक है। यहाँ के बौद्ध समुदाय की उत्पत्ति थाईलैंड से हुई है और वह थाई भाषा के समान की बोली बोलते हैं लेकिन ताई जाति के रीति-रिवाजों और परंपराओं का पालन करते हैं। माना जाता है कि 18 वीं शताब्दी में यह समुदाय असम पहुंचा था।

मेघालय के गांव

मेघालय को बादलों का घर के रूप में जाना जाता है। यह पहाड़ी राज्य है। यहाँ की घाटियां गहरी, चट्टानी और घोड़े के नाल के आकार में हैं। राज्य में ऑर्किड की तीन सौ किस्में पाई जाती हैं और यह वन्यजीवों से भी समृद्ध हैं। मेघालय को अपने खूबसूरत स्थलों के कारण भारत के पर्यटन मानचित्र में किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है।

मवफलांग– सुंदर घाटी अपने अनछुए जंगल के लिए प्रसिद्ध है। यह प्रकृति का अपना संग्रहालय है जिसमें अद्वितीय वनस्पतियों का खजाना है जिसे दुनिया के अन्य हिस्सों में शायद नहीं देखा जा सकता है। स्थानीय खासी समुदायों द्वारा पूजनीय और संरक्षित पवित्र ग्राउंड, मेगालिथ 500 साल पुराना माना जाता है। करीब में ‘डेविड स्कॉट की पगडंडी’ है, जो सुंदर मेघालय के परिदृश्य के बीच एक ट्रेकिंग ज़ोन है जहाँ लोग झरनों, चट्टानों, जंगलों और स्थानीय गावों से होकर पहुंचते हैं।

कोंगथोंग – एक सीटी बजाने वाला गाँव जहाँ प्रत्येक ग्रामवासी का एक ऐसा नाम होता है जिसकी सीटी बजाई जा सकती है। जब एक बच्चा पैदा होता है, तो माँ एक सीटी बजाने लायक नाम देती है। यह परंपरा युगों से चली आ रही है।

जकरेम– यह शिलांग-माविकिरवात मार्ग पर शिलांग से 64 किमी दूर स्थित है और औषधीय गुणों वाले गंधक युक्त गर्म झरनों के लिए प्रसिद्ध है। जकरेम अब एक संभावित हेल्थ रिसॉर्ट के रूप में विकसित हुआ है और यह राफ्टिंग, लंबी पैदल यात्रा और साइकिल चलाने जैसी साहसिक गतिविधियों के लिए भी प्रसिद्ध है।

नोंगरिअत– जीवित- जड़ों से बने पुलों के लिए प्रसिद्ध गांव। पुल बड़े पैमाने पर मोटी जड़ों से बने होते हैं। स्थानीय लोग जड़ों को पुल बनाने के लिए जोड़ देते हैं। इसे पुल से एक समय में कई लोग दूसरी तरफ जा सकते है। पुलों का उपयोगी जीवन काल 500-600 वर्ष माना जाता है। डबल डेकर जीवित जड़ पुल  सभी जड़ पुलों में सबसे बड़ा है, और रेनबो जल प्रपात राज्य के सबसे सुंदर झरनों में से एक है।

शोणपडेंग – मेघालय की जयंतिया पहाड़ियों में स्थित एक सुंदर गाँव है जहाँ निर्मल उमंगोट नदी बहती है। उमंगोट नदी अपने अत्यंत साफ पानी के लिए प्रसिद्ध है। पानी इतना साफ़ है कि जब ऊपर से देखा जाता है, तो ऐसा प्रतीत होता है जैसे नाव मध्य हवा में तैर रही है।

जोवई– जयंतिया हिल जिले में स्थित है और प्राकृतिक सुन्दरता के लिए प्रसिद्द है जो इस क्षेत्र के लिए विशिष्टता है। मीनतदु नदी द्वारा तीन ओर से घिरा हुआ है। यहाँ ग्रीष्मकाल सुखद रहता है। खासी और जयंतिया पहाड़ियों में हर जगह मोनोलिथ मौजूद हैं। हालांकि, मोनोलिथ या मेगालिथिक पत्थरों का सबसे बड़ा संग्रह नार्टियांग बाजार के उत्तर में पाया जाता है। नर्तियांग में दुर्गा मंदिर एक पूजा स्थल है। कुरंग सूरी जलप्रपात जिले के सबसे खूबसूरत झरनों में से एक है।

वेबिनार के माध्यम से भारत के परिदृश्य, शहरों और अन्य अनुभवों को दिखाने के लिए मंत्रालय के प्रयास, अतुल्य भारत के यूट्यूब चैनल और मंत्रालय की वेबसाइट www.incredibleindia.org और www.tourism.gov.in पर भी उपलब्ध हैं।

“पूर्वोत्तर भारत – विशिष्ट गांवों का अनुभव” विषय पर आयोजित वेबिनार में 3654 प्रतिभागी थे और इसमें निम्नलिखित देशों के लोग शामिल हुए थे:

  1. अफगानिस्तान 2. कनाडा 3. फ्रांस 4. जर्मनी 5. पाकिस्तान 6. सिंगापुर 7. स्पेन 8. थाईलैंड 9. इंग्लैंड 10. संयुक्त राज्य अमेरिका

 

एएम/जेके/डीसी

कोविड–19 का मुकाबला करने के लिए यूवी कीटाणुशोधन ट्रॉली अस्पताल को प्रभावी ढंग सेकीटाणुमुक्त कर सकती है

अन्य वायरस और बैक्टीरिया के समान कोरोना वायरस भी यूवीसी प्रकाश के प्रति संवेदनशील है

वर्तमान प्रणाली को फील्ड ट्रायल के लिए हैदराबाद स्थित कर्मचारी राज्य बीमा निगम अस्पताल में लगाया गया है

इंटरनेशनल एडवांस्ड रिसर्च सेंटर फॉर पाउडर मेटलर्जी एंड न्यू मैटेरियल्स (एआरसीआई),विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), भारत सरकार का एक स्वायत्त अनुसंधान और विकास केंद्र है। मेकिंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (एमआईएल) की सहायता से अनुसंधान केंद्र (एआरसीआई) और यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद (यूओएच ) ने साथ मिलकर यूवीसी आधारित कीटाणुशोधन ट्रॉली विकसित की है जोकोविड–19से लड़ने के लिए अस्पताल के वातावरण की तेजी से सफाई कर सकती है।
200 और 300 एनएम के बीच तरंग दैर्ध्य की सीमा में यूवी प्रकाश बैक्टीरिया और वायरस जैसे सूक्ष्मजीवों को निष्क्रिय करने में सक्षम है।इस प्रकार यह हवा और ठोस दोनों सतहों को कीटाणुरहित करता है।अस्पतालों और अन्य संक्रमण वाले वातावरण में पाए जाने वाले बैक्टीरिया और वायरस को हटाने के लिए रासायनिक कीटाणुनाशक अक्सर पर्याप्त नहीं होते हैं। रोगी के बेड और अस्पताल के कमरों का तेजी से परिशोधन, अस्पतालों में बेड की सीमित उपलब्धता के मद्देनजर एक बड़ी आवश्यकता है। अन्य वायरस और बैक्टीरिया के मामले के समान कोरोना वायरस भी यूवीसी प्रकाश के प्रति संवेदनशील है। 254 एनएम की तीव्रता के साथ यूवीसी विकिरण के कीटाणुनाशक प्रभाव से वायरस का सेलुलर नुकसान होता है, जिससे सेलुलर प्रतिकृति बाधित होती है। कीटाणुशोधन के लिए रासायनिक दृष्टिकोण के विपरीत, यूवी प्रकाश एक भौतिक प्रक्रिया के माध्यम से सूक्ष्मजीवों को तेजी से औरप्रभावी रूप से निष्क्रिय कर देता है।
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यूवीसीकीटाणुशोधन ट्रॉली (ऊँचाई1.6 मी,चौड़ाई 0.6 मी,लंबाई 0.9 मी) एआरसीआई, यूओएचऔर एमआईएल द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई है, जिसमें 6 यूवीसीट्यूब लगे हैं, जिन्हें इस तरह से व्यवस्थित किया गया हैकि प्रत्येक दिशा की तरफ 2 ट्यूबों के साथ 3 किनारे रोशन किये जाते हैं। ये लैंप दीवारों, बिस्तर पर और कमरे की हवा में कीटाणुशोधन का काम करते हैं।फर्श का कीटाणुशोधन, मशीन की निचली सतह पर लगे 2 छोटी यूवी लैंप द्वारा किया जाता है। सुरक्षात्मक सूट और यूवी प्रतिरोधी चश्मे पहनकरएक ऑपरेटर जब ट्रॉली को कमरे में चारों ओर ले जाता है तो अस्पताल के कमरे कीटाणुरहित हो जाते हैं।
औसतन5 फीट प्रति मिनट की गति के साथ एक ऑपरेटरयूवीसी ट्रॉली सिस्टम से 400 वर्ग फीट के कमरे को 30 मिनट के भीतरकीटाणुमुक्त (>99 प्रतिशत) कर सकता है। वर्तमान प्रणाली पहला प्रोटोटाइप है और अस्पतालों और रेलवे के डिब्बों में आसानी से प्रयोग करने योग्य है। ऐसी योजना कोविड-19 रोगियों के उपचार के लिए बनाई जा रही है। विमान के केबिनों में आवश्यक कीटाणुशोधन के मद्देनजर छोटे आयामों वाले तथा अधिक स्वचालन गुणों के साथ मशीन को विकसित करने का कार्य प्रगति पर है। वर्तमान प्रणाली को फील्ड ट्रायल के लिए हैदराबाद स्थित कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) अस्पताल में (मानक संचालन प्रक्रिया और सुरक्षा निर्देशों के साथ) तैनात किया गया है। रोगी को छुट्टी देने के बाद और स्वास्थ्य कर्मियों की अनुपस्थिति मेंयूवी-लाइट कीटाणुशोधन प्रणाली को खाली कमरे में संचालित किया जाना चाहिए।
डीएसटी के सचिवप्रोफेसर आशुतोष शर्मा ने कहा, “गहरे यूवी प्रकाश का उपयोग करके उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों जैसे अस्पताल के कमरों, चिकित्सा उपकरणों और अन्य सतहों का शुष्क कीटाणुशोधन एक अच्छा समाधान है, जो डिजाइनर ट्रॉली द्वारा एक अच्छे पैकेज में प्रस्तुत किया गया है। यह प्रयोग करने में आसान है तथा मशीन की गति और दक्षता भी अच्छी है।”
[अधिक जानकारी के लिए, सुश्री एन अपर्णा राव, सीपीआरओ, एआरसीआई, aparna@arci.res.inमोबाइल : + 91-9849622731 से संपर्क करें।]
एएम / जेके

कोविड महामारी के कारण लॉकडाउन अवधि के दौरान देश में ‘प्रत्यक्ष विपणन‘ का प्रभाव

भारत सरकार प्रत्यक्ष विपणन में किसानों की सुविधा और बेहतर रिटर्न का आश्वासन देने के लिए ठोस प्रयास कर रही है। साथ ही विभाग ने कोविड 19 महामारी को देखते हुए कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए मंडियों में परस्पर दूरी (सोशल डिस्टेंसिंग) बनाए रखने के लिए सलाह जारी की हैं। राज्यों से अनुरोध किया गया है कि वे किसानों/किसान समूहों/एफपीओ/सहकारी समितियों को थोक खरीदारों/बड़े खुदरा विक्रेताओं/प्रोसेसरों आदि को अपनी उपज बेचने में सुविधा प्रदान करने के लिए डायरेक्ट मार्केटिंगकी अवधारणा को बढ़ावा दें।

माननीय केंद्रीय कृषि मंत्री ने 16 अप्रैल, 2020 को राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र भेजकर सहकारिता/एफपीओ आदि के माध्यम से प्रत्यक्ष विपणन की आवश्यकता को दोहराया और सभी हितधारकों और किसानों को इस प्रक्रिया को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। विभाग ने राज्यों को एडवाइजरी भी जारी की हैं कि वे बिना किसी लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं के सीधे विपणन को बढ़ावा दें और कृषि उपज के समय पर विपणन में किसानों को सुविधा प्रदान करें।
थोक बाजारों को कम करने और आपूर्ति श्रृंखला को बढ़ावा देने के लिए, राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) के अंतर्गत दो मॉड्यूल बनाये गये हैं जो निम्नलिखित हैं:
(i) एफपीओ मॉड्यूल: एफपीओ सीधे ई-नाम पोर्टल से व्यापार कर सकते हैं। वे चित्र/गुणवत्ता पैरामीटर के साथ संग्रह केंद्रों से उपज विवरण अपलोड कर सकते हैं और भौतिक रूप से मंडियों तक पहुंचे बिना बोली (बिड) सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।
(ii) वेयरहाउस आधारित ट्रेडिंग मॉड्यूल: किसान अपनी उपज को डब्ल्यूडीआरए पंजीकृत गोदामों से डीम्ड बाजार के रूप में अधिसूचित करके बेच सकते हैं, और इससे उन्हें भौतिक रूप से अपनी उपज नजदीकी मंडियों में लाने की आवश्यकता नहीं होती है।

विभिन्न राज्यों ने प्रत्यक्ष विपणन को अपनाया है और इसके लिए कई उपाय किए हैं:

  • कर्नाटक ने राज्य के सहकारी संस्थानों और एफपीओ को बाजार के यार्ड के बाहर कृषि उपज के थोक व्यापार में संलग्न करने के लिए छूट प्रदान की है।
  • तमिलनाडु ने सभी अधिसूचित कृषि उत्पादों पर बाजार शुल्क में छूट दी है।
  • उत्तर प्रदेश ने फार्म गेट से ई-नाम प्लेटफॉर्म में व्यापार करने की अनुमति दी और किसानों से सीधी खरीद के लिए प्रोसेसर को एकीकृत लाइसेंस जारी किया और एफपीओ को गेहूं की खरीद संचालन करने की भी अनुमति प्रदान की।
  • राजस्थान ने व्यापारियों, प्रोसेसर और एफपीओ द्वारा प्रत्यक्ष विपणन की अनुमति दी। इसके अलावा, राजस्थान में पीएसीएस/एलएएमपीएस को डीम्ड मार्केट घोषित किया गया है।
  • व्यक्तियों, फर्मों और प्रसंस्करण इकाइयों के अलावा, मध्य प्रदेश ने बाजार-यार्ड के बाहर निजी खरीद केंद्र स्थापित करने की अनुमति दी है जो केवल 500/- रुपये आवेदन शुल्क लेकर किसानों से सीधे खरीद कर सकेंगे।
  • हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात ने भी बिना किसी लाइसेंस की आवश्यकता के सीधे विपणन की अनुमति दी है।
  • उत्तराखंड ने वेयरहाउस/कोल्ड स्टोरेज और प्रसंस्करण संयंत्रों को उप-मंडियां घोषित किया है।
  • उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में वेयरहाउस/कोल्ड स्टोरेज को मार्केट-यार्ड घोषित करने के नियमों और मानदंडों में ढील दी है।

प्रत्यक्ष विपणन का प्रभाव:

  • राजस्थान ने लॉकडाउन अवधि के दौरान प्रोसेसर को 1,100 से अधिक प्रत्यक्ष विपणन लाइसेंस जारी किए हैं, जिससे किसानों ने अपनी उपज सीधे प्रोसेसर को बेचना शुरू कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में बाजार-यार्ड के रूप में घोषित 550 से अधिक पीएसीएस में से, 150 पीएसीएस प्रत्यक्ष विपणन के लिए कार्यात्मक हो गए हैं और गाँव के व्यापारी सफलतापूर्वक व्यापार लेनदेन कर रहे हैं।
  • तमिलनाडु में बाजार शुल्क माफी के कारण, यह देखा गया कि व्यापारियों ने किसानों से उनके फार्म गेट/गांवों से उपज खरीदना पसंद किया है।
  • उत्तर प्रदेश में किसानों और व्यापारियों के साथ एफपीओ द्वारा प्रत्यक्ष संबंध स्थापित किए गए हैं, जिससे वे शहरों के उपभोक्ताओं को उपज की आपूर्ति कर रहे हैं, जो किसानों के अपव्यय में बचत और प्रत्यक्ष लाभ प्रदान करती है। इसके अलावा, राज्य ने एफपीओ और जोमेटो के साथ संबंध स्थापित करने में सुविधा प्रदान की है, जिससे उपभोक्ताओं को सब्जियों का वितरण आसानी से सुनिश्चित किया जा सके।

राज्यों से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, प्रत्यक्ष विपणन ने किसान समूहों, एफपीओ सहकारी समितियों और सभी हितधारकों को कृषि उपज के प्रभावी और समय पर विपणन की सुविधा प्रदान की है।
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... / प्र. . / म.सिं

आईएनएसटी के वैज्ञानिकों ने दिखते प्रकाश में कपड़ों के कीटाणुशोधन की दिशा में कम लागत वाला धातु रहित नैनो मटीरियल ढूंढ़ा है

इन नैनो मटीरियल्स में बढ़ी हुई जैवनाशी गतिविधि होती है
मौजूदा हालात में प्रासंगिकता को देखते हुए इस प्रौद्योगिकी को एंटीवायरल दक्षता के लिए भी परखा जाएगा

भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत आने वाले स्वायत्त संस्थान, नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएनएसटी) में वैज्ञानिकों ने दृश्य प्रकाश में सूक्ष्मजीव कीटाणुशोधन के लिए एक कम लागत वाले धातु रहित नैनोमटीरियल को ढूंढा है जो चांदी और अन्य धातु-आधारित सामग्रियों का विकल्प हो सकता है।
आईएनएसटी में डॉ. कमलाकन्नन कैलासम के समूह ने डॉ. आसिफ खान शानवस के सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका ‘कार्बन’ में प्रकाशित अपने हालिया अध्ययन में, दृश्य-प्रकाश-चालित जीवाणुरोधी गतिविधि के लिए कार्बन नाइट्राइड क्वांटम डॉट्स (जी-सीएनक्यूडी) का परीक्षण किया है और स्तनधारी कोशिकाओं के साथ जैव-अनुकूल होने के साथ-साथ इसे प्रभावी पाया है। इस टीम ने सुझाव दिया है कि ये धातु / गैर-धातु सेमीकंडक्टरों और महंगी चांदी के लिए एक व्यवहार्य एंटी-बैक्टीरियल विकल्प होगा, जो इसे लागत कुशल बनाता है।
आईएनएसटी की टीम के अनुसार, ये नैनोमटीरियल्स बढ़ी हुई जैवनाशी गतिविधि रखते है, जिसका कारण ये है कि जी-सीएनक्यूडी का बड़ा सतह क्षेत्र पराबैंगनी और दृश्य दोनों क्षेत्रों में अधिक प्रतिक्रियाशील स्थलों और प्रकाश संबंधी अवशोषण रखता है। जी-सीएनक्यूडी में प्रतिक्रियाशील ऑक्सीजन प्रजातियों (आरओएस) को उत्पन्न करने की क्षमता है। आरओएस तेजी से संपर्क करता है और तुरंत उपलब्ध बड़े जैविक अणुओं (मैक्रो मॉलिक्यूल्स) को नुकसान पहुंचाता है जैसे कि कोशिका झिल्ली या आवरण पर मौजूद लिपिड और कोशीय सतह पर मौजूद प्रोटीन, उन सूक्ष्मजीवों को निष्क्रिय करने की दिशा में। निष्क्रियता का ये तंत्र किसी विशेष रोगाणु के लिए गैर-विशिष्ट है, क्योंकि लिपिड और प्रोटीन माइक्रोबियल दुनिया के निवासियों के प्रमुख घटक हैं।
ये वैज्ञानिक ऐसे रास्ते तलाश रहे हैं जिनसे डोप या अनडोप किए हुए कार्बन नाइट्राइड आधारित मटीरियल को कपड़ों वाली बुनावटों के साथ मिलाया जा सके जो रोगाणुरोधी गतिविधि के लिए इष्टतम नमी और तापमान के अंतर्गत लगातार प्रतिक्रियाशील ऑक्सीजन प्रजातियों (आरओएस) का उत्पादन कर सकें।
उन्होंने बताया कि छींकने के दौरान उत्पन्न एरोसोल की बूंदों में पर्याप्त नमी होती है जो इन बूंदों में मौजूद किसी भी संक्रामक एजेंटों के आरओएस की मध्यस्थता से कीटाणुशोधन में तब मदद कर सकती है, जब एक बार वो सूरज की रोशनी या परिवेशी सफेद प्रकाश के तले इस नैनो मटीरियल सिले कपड़े के संपर्क में आए। इस वर्तमान अध्ययन में एक सामान्य टेबल लैंप का उपयोग किया गया जो एक साफ दिन में सूर्य के प्रकाश जितनी रोशनी प्रदान करता है।
सामान्य पराबैंगनी मध्यस्थता वाले कीटाणुशोधन के मुकाबले दृश्य प्रकाश पर निर्भरता भी फायदेमंद है, क्योंकि उसमें यूवी प्रकाश उत्सर्जक उपकरणों से सावधानीपूर्वक काम लेने की आवश्यकता होती है। वर्तमान परिदृश्य में इसकी प्रासंगिकता को देखते हुए एंटीवायरल दक्षता के लिए भी इस तकनीक को टटोला जाएगा।

[प्रकाशन: प्रांजलि यादव, एस.टी. निशांति, भाग्येश पुरोहित, आसिफ खान शानवस, कमलाकन्नन कैलासम, कुशल जीवाणुरोधी एजेंटों के तौर पर धातु रहित दृश्य प्रकाश फोटोकैटलिटिक कार्बन नाइट्राइड क्वांटम डॉट्स: एक गहरा अध्ययन (https://doi.org/10.1016/j.carbon.2019.06.045)]
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एएम/जीबी

सीएसआईआर अनुसंधान एवं विकास आधारित तकनीकी समाधानों और उत्पादों के अलावा, कोविड-19 की गम्भीरता को कम करने के लिए हैंड सैनिटाइजर, साबुन और कीटाणुनाशक प्रदान करके तत्काल राहत प्रदान कर रहा है

सीएसआईआर अनुसंधान एवं विकास आधारित तकनीकी समाधानों और उत्पादों के अलावा, कोविड-19 की गम्भीरता को कम करने के लिए हैंड सैनिटाइजर, साबुन और कीटाणुनाशक प्रदान करके तत्काल राहत प्रदान कर रहा है

कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ लड़ाई की शुरुआत नियमित रूप से हाथ धोकर साफ-सथुरा रखने से होती है जो कि बचाव के एक प्रमुख उपाय के रूप में उभर कर सामने आया है। अल्कोहल-आधारित हैंड सैनिटाइजर रोगाणुओं के सुरक्षात्मक झिल्ली को नष्ट करके वायरस को समाप्त कर देता है। हालांकि, जैसे ही यह महामारी पूरी दुनिया में तेजी से फैली, लोग घबराहट में हैंड सैनिटाइजर खरीदने लगे और उसके कारण जल्द ही यह स्टॉक से बाहर हो गया और यहां तक की नकली और संदिग्ध हैंड सैनिटाइटर बाजार में अपनी जगह बनाने लगे।

इस बात को ध्यान में रखते हुए कि स्वच्छता और स्वास्थ्य, सार्स-सीओवी-2 वायरस के खिलाफ रक्षा के लिए एक प्रमुख उपाय साबित होंगे, सीएसआईआर प्रयोगशालाओं ने तुरंत कदम उठाया और डब्ल्यूएचओ के दिशा-निर्देशों के आधार पर सुरक्षित, रासायन मुक्त और अल्कोहल आधारित प्रभावी हैंड सैनिटाइजर और कीटाणुनाशकों को लेकर आया।

सीएसआईआर के महानिदेशक, डॉ. शेखर सी मंडे कहते हैं, “जब कभी देश ने सबसे चुनौतीपूर्ण समस्याओं का सामना किया है, सीएसआईआर ने हमेशा अत्याधुनिक विज्ञान पर आधारित तकनीकी समाधान प्रदान किया है। कोविड-19 का मुकाबला करने के लिए भी हमारी प्रयोगशालाएं दवाओं और टीकों को विकसित करने के लिए अपने समृद्ध वैज्ञानिक अनुभवों को व्यवहार में ला रही हैं। लेकिन इसके साथ ही, सीएसआईआर महामारी से देश के नागरिकों को तत्काल राहत प्रदान करने के लिए तत्पर है- संक्रमण को दूर करने के लिए प्रभावी हैंड सैनिटाइजर, साबुन और कीटाणुनाशक का निर्माण कर रहा है- एक ऐसा तत्काल उपाय जिसको हमारी प्रयोगशालाओं ने करने का फैसला लिया है।”

देश के विभिन्न हिस्सों में फैली कई सीएसआईआर प्रयोगशालाओं ने हैंड सैनिटाइजरों और कीटाणुनाशकों का निर्माण और वितरण करके देश के नागरिकों को तत्काल और प्रभावी राहत प्रदान करने के प्रयासों को शुरू कर दिया है।

• अब तक सीएसआईआर की प्रयोगशालाओं में लगभग 50,000 लीटर हैंड सैनिटाइजर और कीटाणुनाशक तैयार किए जा चुके हैं और उन्हें समाज के विभिन्न वर्गों से संबंधित 1, 00,000 से ज्यादा लोगों के बीच वितरित किया जा चुका है।

• इसके अलावा, प्रयोगशालाओं द्वारा स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर नेटवर्क भी तैयार किया जा रहा है, जिससे पुलिस, नगर निगमों, बिजली आपूर्ति उपक्रमों, मेडिकल कॉलेजों, अस्पतालों, पंचायतों, बैंकों और कई अन्य लोगों के बीच हैंड सैनिटाइजरों और कीटाणुनाशकों का वितरण किया जा सके।

• सीएसआईआर प्रयोगशालाओं ने स्थानीय रूप से उपलब्ध कच्चे माल से प्रभावी, सुरक्षित और किफायती सैनिटाइजर और कीटाणुनाशक बनाया है। उदाहरण के लिए, हिमाचल प्रदेश के पालमपुर स्थित सीएसआईआर-आईएचबीटी के वैज्ञानिकों ने डब्ल्यूएचओ के दिशा-निर्देशों के अनुसार हैंड सैनिटाइजर विकसित किया है, लेकिन इसमें चाय की सामग्री, प्राकृतिक सुगंध और अल्कोहल शामिल किया गया है; सैनिटाइजर में पैराबेन्स, ट्राइक्लोसन और थैलेट्स जैसे रसायनों का इस्तेमाल नहीं किया गया है।

• दक्षिण भारत में, सीएसआईआर-आईआईसीटी ने अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजिंग जेल तैयार करने की प्रक्रिया को पूरा किया और 800 लीटर का वितरण तेलंगाना पुलिस और ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम के श्रमिकों के बीच किया। इसके अलावा सीएसआईआर-सीएलआरआई, चेन्नई में और सीएसआईआर-सीईसीआरआई ने कराईकुडी में जिला प्रशासन, नगर निगम, मेडिकल कॉलेज, थाना और पंचायतों के बीच सैकड़ों लीटर सैनिटाइजिंग सामग्री का वितरण किया।

• लखनऊ में सीएसआईआर की कई प्रयोगशालाएं बहुत सक्रिय रही हैं और सीएसआईआर-आईआईटीआर लखनऊ ने जरूरी सेवाओं में लगे हुए लोगों के बीच इसके द्वारा निर्मित 2,800 लीटर हैंड सैनिटाइजर बांटा गया। संस्थान ने सैनिटाइजरों को जिला प्रशासन, राज्य स्वच्छ गंगा मिशन, बिजली आपूर्ति उपक्रम, पुलिस प्रशासन, जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों को सौंपा। इसने लखनऊ के विभिन्न क्षेत्रों में स्वास्थ्य कर्मियों, सफाई कर्मचारियों और पुलिसकर्मियों के बीच 1,500 लीटर से ज्यादा सैनिटाइजरों का वितरण भी किया है।

•उत्तर-पूर्व में, सीएसआईआर-एनईआईएसटी द्वारा जिला प्रशासन, जोरहाट रेलवे स्टेशन और पुलिस स्टेशन, ओएनजीसी और एफसीआई के कर्मचारियों के बीच, इंफाल में नगर निगम के कर्मियों के बीच, जोरहाट में वायु सेना स्टेशन और आसपास के गांवों के लोगों के बीच लगभग 1,300 लीटर हैंड सैनिटाइज़र का वितरण किया गया।

• जम्मू में, सीएसआईआर-आईआईआईएम ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों, एयरफोर्स स्टेशन और भारतीय सेना के कर्मचारियों के बीच 1,800 लीटर हैंड सैनिटाइजर बांटा गया। सीएसआईआर-आईआईपी, देहरादून द्वारा दून अस्पताल, पुलिस विभाग और राज्य आपदा राहत बल के लिए लगभग 1,000 लीटर सैनिटाइजर की आपूर्ति की गई।

• देश के पश्चिम में, सीएसआईआर-सीएसएमसीआरआई, भावनगर के वैज्ञानिकों ने भावनगर मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) में सैनिटाइजर की आपूर्ति की है।

• सीएसआईआर-आईएमएमटी, भुवनेश्वर सुगंधित और संक्रमण-विरोधी गतिविधियों का प्रदर्शन करने वाले पौधों के अर्क के साथ अल्कोहल आधारित हाथ पर रगड़ने वाला तरल पदार्थ बनाने पर काम कर रहा है और साबुन बनाने की ठंडी प्रक्रिया का उपयोग करके संक्रामक विरोधी पदार्थों के साथ सस्ता साबुन तैयार करने की प्रक्रिया पर भी काम कर रहा है।

• अत्यधिक संक्रामक कोरोना वायरस के खिलाफ एक सुरक्षात्मक उपाय के रूप में साबुन की बढ़ती मांग को देखते हुए, सीएसआईआर-आईएचबीटी, पालमपुर ने प्राकृतिक रासायनिक यौगिकों के साथ हर्बल साबुन भी विकसित किया है। इस तकनीक के माध्यम से वाणिज्यिक उत्पादन करने और देश के प्रमुख शहरों में उपलब्ध कराने के लिए हिमाचल प्रदेश स्थित दो कंपनियों को हस्तांतरित किया गया है।

• इसके अलावा, सीएसआईआर की कई प्रयोगशालाएं, बड़े पैमाने पर सैनिटाइजर का उत्पादन करने के लिए अपनी तकनीकों को उस क्षेत्र के एमएसएमई और उद्योगों तक स्थानांतरित करने में भी कामयाब रही हैं।

#सीएसआईआरफाइट्सकोविड19

 

एएम/एके-

मन की बात 2.0’ की 11वीं कड़ी में प्रधानमंत्री के सम्बोधन का मूल पाठ (26.04.2020)

मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार। आप सब lockdown में इस ‘मन की बात’ को सुन रहे हैं। इस ‘मन की बात’ के लिये आने वाले सुझाव, phone call की संख्या, सामान्य रूप से कई गुणा ज्यादा है। कई सारे विषयों को अपने अन्दर समेट, आपकी यह मन की बातें, मेरे तक, पहुँची हैं। मैंने कोशिश की है, कि, इनको ज्यादा-से-ज्यादा पढ़ पाऊँ, सुन पाऊँ। आपकी बातों से कई ऐसे पहलू जानने को मिले हैं, जिनपर, इस आपा-धापी में ध्यान ही नहीं जाता है। मेरा मन करता है, कि, युद्ध के बीच हो रही इस ‘मन की बात’ में, उन्हीं कुछ पहलुओं को, आप सभी देशवासियों के साथ बाटूँ।

 

साथियो, भारत की CORONA के खिलाफ़ लड़ाई सही मायने में  people driven है। भारत में CORONA के खिलाफ़ लड़ाई जनता लड़ रही है, आप लड़ रहे हैं, जनता के साथ मिलकर शासन, प्रशासन लड़ रहा है। भारत जैसा विशाल देश, जो विकास के लिए प्रयत्नशील है, ग़रीबी से निर्णायक लड़ाई लड़ रहा है। उसके पास, CORONA से लड़ने और जीतने का यही एक तरीका है। और, हम भाग्यशाली हैं कि, आज, पूरा देश, देश का हर नागरिक, जन-जन, इस लड़ाई का सिपाही है, लड़ाई का नेतृत्व कर रहा है। आप कहीं भी नज़र डालिये, आपको एहसास हो जायेगा कि भारत की लड़ाई people driven है। जब पूरा विश्व इस महामारी के संकट से जूझ रहा है। भविष्य में जब इसकी चर्चा       होगी, उसके तौर-तरीकों की चर्चा होगी, मुझे विश्वास है कि भारत की यह people driven लड़ाई, इसकी ज़रुर चर्चा होगी। पूरे देश में, गली-मोहल्लों में, जगह-जगह पर, आज लोग एक-दूसरे की सहायता के लिए आगे आये हैं। ग़रीबों के लिए खाने से लेकर, राशन की व्यवस्था हो, lockdown का पालन हो, अस्पतालों की व्यवस्था हो, medical equipment का देश में ही निर्माण हो – आज पूरा देश, एक लक्ष्य, एक दिशा, साथ-साथ चल रहा है। ताली, थाली, दीया, मोमबत्ती, इन सारी चीज़ों ने जो भावनाओं को जन्म दिया। जिस ज़ज्बे से देशवासियों ने, कुछ-न-कुछ करने की ठान ली – हर किसी को इन बातों ने प्रेरित किया है। शहर हो या गाँव, ऐसा लग रहा है, जैसे देश में एक बहुत बड़ा महायज्ञ चल रहा है, जिसमें, हर कोई अपना योगदान देने के लिये आतुर है। हमारे किसान भाई-बहनों को ही देखिये – एक तरफ, वो, इस महामारी के बीच अपने खेतों में दिन-रात मेहनत कर रहे हैं और इस बात की भी चिंता कर रहे हैं कि देश में कोई भी भूखा ना सोये। हर कोई, अपने सामर्थ्य के हिसाब से, इस लड़ाई को लड़ रहा है। कोई किराया माफ़ कर रहा है, तो कोई अपनी पूरी पेंशन या पुरस्कार में मिली राशि को, PM CARES  में जमा करा रहा है। कोई खेत की सारी सब्जियाँ दान दे रहा है, तो कोई, हर रोज़ सैकड़ों ग़रीबों को मुफ़्त भोजन करा रहा है। कोई mask बना रहा है, कहीं हमारे मजदूर भाई-बहन quarantine में रहते हुए, जिस school में रह रहे हैं, उसकी रंगाई-पुताई कर रहे हैं।

 

    साथियो, दूसरों की मदद के लिए, आपके भीतर, ह्रदय के किसी कोने में, जो ये उमड़ता-घुमड़ता भाव है ना ! वही, वही CORONA के खिलाफ, भारत की इस लड़ाई को ताकत दे रहा है, वही, इस लड़ाई को सच्चे मायने में people driven बना रहा है और हमने देखा है, पिछले कुछ साल में, हमारे देश में, यह मिज़ाज बना है, निरंतर मज़बूत होता रहा है। चाहे करोड़ों लोगों का gas subsidy छोड़ना हो, लाखों senior citizen का railway subsidy छोड़ना हो, स्वच्छ भारत अभियान का नेतृत्व लेना हो, toilet बनाने हो – अनगिनत बातें ऐसी हैं। इन सारी बातों से पता चलता है – हम सबको – एक मन, एक मजबूत धागे से पिरो दिया है। एक होकर देश के लिए कुछ करने की प्रेरणा दी है।

   

मेरे प्यारे देशवासियो, मैं पूरी नम्रतापूर्वक, बहुत ही आदर के साथ, आज, 130 करोड़ देशवासियों की इस भावना को, सर झुका करके, नमन करता हूँ। आप, अपनी भावना के अनुरूप, देश के लिए अपनी रूचि के हिसाब से, अपने समय के अनुसार, कुछ कर सके, इसके लिए सरकार ने एक Digital Platform भी तैयार किया है। ये platform हैcovidwarriors.gov.in मैं दोबारा बोलता हूँ – covidwarriors.gov.in सरकार ने इस platform के माध्यम से तमाम सामाजिक संस्थाओं के Volunteers, Civil Society के प्रतिनिधि और स्थानीय प्रशासन को एक-दूसरे से जोड़ दिया है। बहुत ही कम समय में, इस portal से सवाकरोड़ लोग जुड़ चुके हैं। इनमें Doctor, Nurses से लेकर हमारी ASHA, ANM बहनें, हमारे NCC, NSS के साथी, अलग-अलग field के तमाम professionals, उन्होंने, इस platform को, अपना platform बना लिया है। ये लोग स्थानीय स्तर पर crisis management plan बनाने वालों में और उसकी पूर्ति में भी बहुत मदद कर रहें हैं। आप भी covidwarriors.gov.in से जुड़कर, देश की सेवा कर सकते हैं, Covid Warrior बन सकते हैं।

    साथियो, हर मुश्किल हालात, हर लड़ाई, कुछ-न-कुछ सबक देती है, कुछ-न-कुछ सिखा करके जाती है, सीख देती है। कुछ संभावनाओं के मार्ग बनाती है और कुछ नई मंजिलों की दिशा भी देती है। इस परिस्थिति में आप सब देशवासियों ने जो संकल्प शक्ति दिखाई है, उससे, भारत में एक नए बदलाव की शुरुआत भी हुई है। हमारे Business, हमारे दफ्तर, हमारे शिक्षण संस्थान, हमारा Medical Sector, हर कोई, तेज़ी से, नये तकनीकी बदलावों की तरफ भी बढ़ रहें हैं। Technology के front  पर तो वाकई ऐसा लग रहा है कि देश का हर innovator नई परिस्तिथियों के मुताबिक कुछ-न-कुछ नया निर्माण कर रहा है।

 

    साथियो, देश जब एक team बन करके काम करता है, तब क्या कुछ होता है – ये हम अनुभव कर रहें हैं। आज केन्द्र सरकार हो, राज्य सरकार हो, इनका हर एक विभाग और संस्थान राहत के लिए मिल-जुल करके पूरी speed से काम कर रहे हैं।  हमारे Aviation Sector में काम कर रहे लोग हों, Railway कर्मचारी हों, ये दिन-रात मेहनत कर रहें हैं, ताकि, देशवासियों को कम-से-कम समस्या हो। आप में से शायद बहुत लोगों को मालूम होगा कि देश के हर हिस्से में दवाईयों को पहुँचाने के लिए ‘Lifeline Udan (लाइफ-लाइन उड़ान)नाम से एक विशेष अभियान चल रहा है। हमारे इन साथियों ने, इतने कम समय में, देश के भीतर ही, तीन लाख किलोमीटर की हवाई उड़ान भरी है और 500 टन से अधिक Medical सामग्री, देश के कोने-कोने में आप तक पहुँचाया है। इसी तरह, Railway के साथी, Lockdown में भी लगातार मेहनत कर रहें हैं, ताकि देश के आम लोगों को, जरुरी वस्तुओं की कमी न हो। इस काम के लिए भारतीय रेलवे करीब-करीब 60 से अधिक रेल मार्ग पर 100 से भी ज्यादा parcel train चला रही है। इसी तरह दवाओं की आपूर्ति में, हमारे डाक विभाग के लोग, बहुत अहम भूमिका निभा रहें हैं। हमारे ये सभी साथी, सच्चे अर्थ में, कोरोना के warrior ही हैं।

 

साथियो, ‘प्रधानमंत्री ग़रीब कल्याण पैकेज़के तहत, ग़रीबों के Account में पैसे, सीधे transfer किए जा रहे हैं।वृद्धावस्था पेंशनजारी की गई है। गरीबों को तीन महीने के मुफ़्त गैस सिलेंडर, राशन जैसी सुविधायें भी दी जा रही हैं। इन सब कामों में, सरकार के अलग-अलग विभागों के लोग, बैंकिंग सेक्टर के लोग, एक team की तरह दिन-रात काम कर रहे हैं। और मैं, हमारे देश की राज्य सरकारों की भी इस बात के लिए प्रशंसा करूँगा कि वो इस महामारी से निपटने में बहुत सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। स्थानीय प्रशासन, राज्य सरकारें जो जिम्मेदारी निभा रही हैं, उसकी, कोरोना के खिलाफ़ लड़ाई में बहुत बड़ी भूमिका है। उनका ये परिश्रम बहुत प्रशंसनीय है।

 

मेरे प्यारे देशवासियो, देशभर से स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोगों ने, अभी हाल ही में जो अध्यादेश लाया गया है, उस पर अपना संतोष व्यक्त किया है।  इस अध्यादेश में, कोरोना warriors के साथ हिंसा, उत्पीड़न और उन्हें किसी रूप में चोट पहुचाने वालों के खिलाफ़ बेहद सख्त़ सज़ा का प्रावधान किया गया है। हमारे डॉक्टर, Nurses , para-medical staff, Community Health Workers और ऐसे सभी लोग, जो देश को कोरोना-मुक्तबनाने में दिन-रात जुटे हुए हैं,उनकी रक्षा करने के लिए ये कदम बहुत ज़रुरी था।

मेरे प्यारे देशवासियों, हम सब अनुभव कर रहे हैं कि महामारी के खिलाफ़, इस लड़ाई के दौरान हमें अपने जीवन को, समाज को, हमारे आप-पास हो रही घटनाओं को, एक fresh नज़रिए से देखने का अवसर भी मिला है। समाज के नज़रिये में भी व्यापक बदलाव आया है। आज अपने जीवन से जुड़े हर व्यक्ति की अहमियत का हमें आभास हो रहा है। हमारे घरों में काम करने वाले लोग हों, हमारी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए काम करने वाले हमारे सामान्य कामगार हों, पड़ोस की दुकानों में काम करने वाले लोग हों, इन सबकी कितनी बड़ी भूमिका है – हमें यह अनुभव हो रहा है। इसी तरह, ज़रुरी सेवाओं की delivery करने वाले लोग, मंडियों में काम करने वाले हमारे मज़दूर भाई-बहन, हमारे आस-पड़ोस के ऑटो-चालक, रिक्शा-चालक – आज हम अनुभव कर रहे हैं कि इन सब के बिना हमारा जीवन कितना मुश्किल हो सकता है।

 

आज कल Social Media में हम सबलोग लगातार देख रहे हैं कि  LOCKDOWN के दौरान, लोग अपने इन साथियों को न सिर्फ़ याद कर रहे है, उनकी ज़रूरतों का ध्यान रख रहे हैं, बल्कि उनके बारे में, बहुत सम्मान से लिख भी रहे हैं। आज, देश के हर कोने से ऐसी तस्वीरे आ रही हैं कि लोग सफाई-कर्मियों पर पुष्प-वर्षा कर रहे हैं। पहले, उनके काम को संभवतः आप भी कभी notice नहीं करते थे। डॉक्टर हों, सफाईकर्मी हों, अन्य सेवा करने वाले लोग हों – इतना ही नहीं, हमारी पुलिस-व्यवस्था को लेकर भी आम लोगों की सोच में काफ़ी बदलाव हुआ है। पहले पुलिस के विषय में सोचते ही नकारात्मकता के सिवाय, हमें कुछ नज़र नहीं आता था। हमारे पुलिसकर्मी आज ग़रीबों, ज़रुरतमंदो को खाना पंहुचा रहे हैं, दवा पंहुचा रहे हैं। जिस तरह से हर मदद के लिए पुलिस सामने आ रही है इससे POLICING का मानवीय और संवेदनशील पक्ष हमारे सामने उभरकर के आया है, हमारे मन को झकझोर दिया है, हमारे दिल को छू लिया है। एक ऐसा अवसर है जिसमें आम-लोग, पुलिस से भावात्मक तरीक़े से जुड़ रहे हैं। हमारे पुलिसकर्मियों ने, इसे जनता की सेवा के एक अवसर के रूप में लिया है और मुझे पूरा विश्वास है – इन घटनाओं से, आने वाले समय में, सच्चे अर्थ में, बहुत ही सकारात्मक बदलाव आ सकता है और हम सबने इस सकारात्मकता को कभी भी नकारात्मकता के रंग से रंगना नहीं है।

 

साथियो, हम अक्सर सुनते हैं प्रकृति, विकृति और संस्कृति, इन शब्दों को एक साथ देखें और इसके पीछे के भाव को देखें तो आपको जीवन को समझने का भी एक नया द्वार खुलता हुआ दिखेगा। अगर, मानव- प्रकृति की चर्चा करें तो ये मेरा है’, ‘मैं इसका उपयोग करता हूँइसको और इस भावना को, बहुत स्वाभाविक माना जाता है। किसी को इसमें कोई ऐतराज़ नहीं होता। इसे हम प्रकृतिकह सकते हैं। लेकिन जो मेरा नहीं है’, ‘जिस पर मेरा हक़ नहीं हैउसे मैं दूसरे से छीन लेता हूँ, उसे छीनकर उपयोग में लाता हूँ तब हम इसे विकृतिकह सकते हैं। इन दोनों से परे, प्रकृति और विकृति से ऊपर, जब कोई संस्कारित-मन सोचता है या व्यवहार करता है तो हमें संस्कृतिनज़र आती है। जब कोई अपने हक़ की चीज़, अपनी मेहनत से कमाई चीज़, अपने लिए ज़रूरी चीज़, कम हो या अधिक, इसकी परवाह किये बिना, किसी व्यक्ति की ज़रूरत को देखते हुए, खुद की चिंता छोड़कर, अपने हक़ के हिस्से को बाँट करके किसी दूसरे की ज़रुरत पूरी करता है – वही तो संस्कृतिहै। साथियो, जब कसौटी का काल होता है, तब इन गुणों का परीक्षण होता है|                              

   

आपने पिछले दिनों देखा होगा, कि, भारत ने अपने संस्कारो के अनुरूप, हमारी सोच के अनुरूप, हमारी संस्कृति का निर्वहन करते हुए कुछ फ़ैसले लिए हैं। संकट की इस घड़ी में, दुनिया के लिए भी, समृद्ध  देशों के लिए भी, दवाईयों का संकट बहुत ज्यादा रहा है। एक ऐसा समय है की अगर भारत दुनिया को दवाईयां न भी दे तो कोई भारत को दोषी नहीं मानता। हर देश समझ रहा है कि भारत के लिए भी उसकी प्राथमिकता अपने नागरिकों का जीवन बचाना है। लेकिन साथियो,  भारत ने, प्रकृति, विकृति की सोच से परे होकर फैसला लिया। भारत ने अपने संस्कृति के अनुरूप फैसला लिया। हमने भारत की आवश्यकताओं के लिए जो करना था, उसका प्रयास तो बढ़ाया ही, लेकिन, दुनिया-भर से आ रही मानवता की रक्षा की पुकार पर भी, पूरा-पूरा ध्यान दिया। हमने विश्व के हर जरूरतमंद तक दवाइयों को पहुँचाने का बीड़ा उठाया और मानवता के इस काम को करके दिखाया। आज जब मेरी अनेक देशों के राष्ट्राध्यक्षों से फ़ोन पर बात होती है तो वो भारत की जनता का आभार जरुर व्यक्त करते है। जब वो लोग कहते हैं  ‘Thank You India , Thank You People of India’  तो देश के लिए गर्व और बढ़ जाता है। इसी तरह इस समय दुनिया-भर में भारत के आयुर्वेद और योग के महत्व को भी लोग बड़े विशिष्ट-भाव से देख रहे हैं। Social Media पर देखिये, हर तरफ immunity बढ़ाने के लिए, किस तरह से, भारत के आयुर्वेद और योग की चर्चा हो रही है। कोरोना की दृष्टि से, आयुष मंत्रालय ने immunity बढ़ाने के लिए जो protocol दिया था, मुझे विश्वास है कि आप लोग, इसका प्रयोग, जरुर कर रहे होंगे। गर्म पानी, काढ़ा और जो अन्य दिशा-निर्देश, आयुष मंत्रालय ने जारी किये हैं, वो, आप अपनी दिनचर्या में शामिल करेगें तो आपको बहुत लाभ होगा।

 

साथियो, वैसे ये दुर्भाग्य रहा है कि कई बार हम अपनी ही शक्तियाँ और समृद्ध परम्परा को पहचानने से इंकार कर देते हैं। लेकिन, जब विश्व का कोई दूसरा देश, evidence based research के आधार पर वही बात करता है। हमारा ही formula हमें सिखाता है  तो हम उसे हाथों-हाथ ले लेते हैं। संभवत:, इसके पीछे एक बहुत बड़ा कारण – सैकड़ों वर्षों की हमारी गुलामी का कालखंड रहा है। इस वजह से कभी-कभी, हमें, अपनी ही शक्ति पर विश्वास नहीं होता है। हमारा आत्म-विश्वास कम नज़र आता है। इसलिए, हम अपने देश की अच्छी बातों को, हमारे पारम्परिक सिद्दांतों को, evidence based research के आधार पर, आगे बढ़ाने के बजाय उसे छोड़ देते हैं, उसे, हीन समझने लगते हैं। भारत की युवा-पीढ़ी को, अब इस चुनौती को स्वीकार करना होगा। जैसे, विश्व ने योग को सहर्ष स्वीकार किया है, वैसे ही, हजारों वर्षों पुराने, हमारे आयुर्वेद के सिद्दांतों को भी विश्व अवश्य स्वीकार करेगा। हाँ! इसके लिए युवा-पीढ़ी को संकल्प लेना होगा और दुनिया जिस भाषा में समझती है उस वैज्ञानिक भाषा में हमें समझाना होगा, कुछ करके दिखाना होगा।

 

साथियो, वैसे covid-19 के कारण कई सकारात्मक बदलाव, हमारे काम करने के तरीके, हमारी जीवन-शैली और हमारी आदतों में भी स्वाभाविक रूप से अपनी जगह बना रहे हैं। आपने सबने भी महसूस किया होगा, इस संकट ने, कैसे अलग-अलग विषयों पर, हमारी समझ और हमारी चेतना को जागृत किया है। जो असर, हमें अपने आस-पास देखने को मिल रहे हैं, इनमें सबसे पहला है – mask पहनना और अपने चेहरे को ढ़ककर रखना। कोरोना की वजह से, बदलते हुए हालत में, mask भी, हमारे जीवन का हिस्सा बन रहा है। वैसे, हमें इसकी भी आदत कभी नहीं रही कि हमारे आस-पास के बहुत सारे लोग mask में दिखें, लेकिन, अब हो यही रहा है। हाँ! इसका ये मतलब नहीं है, जो mask लगाते हैं वे सभी बीमार हैं। और, जब मैं  mask की बात करता हूँ, तो, मुझे पुरानी बात याद आती हैं। आप सबको भी याद होगा। एक जमाना था, कि, हमारे देश के कई ऐसे इलाके होते थे, कि, वहाँ अगर कोई नागरिक फल खरीदता हुआ दिखता था तो आस-पड़ोस के लोग उसको जरुर पूछते थे – क्या घर में कोई बीमार है? यानी, फल – मतलब, बीमारी में ही खाया जाता है – ऐसी एक धारणा बनी हुई थी। हालाँकि, समय बदला और ये धारणा भी बदली। वैसे ही mask को लेकर भी धारणा अब बदलने वाली ही है। आप देखियेगा, mask, अब सभ्य-समाज का प्रतीक बन जायेगा। अगर, बीमारी से खुद को बचना है, और, दूसरों को भी बचाना है, तो, आपको mask लगाना पड़ेगा, और, मेरा तो simple सुझाव रहता है – गमछा, मुहँ ढ़कना है।

   

साथियो, हमारे समाज में एक और बड़ी जागरूकता ये आयी है कि अब सभी लोग ये समझ रहे हैं कि सार्वजनिक स्थानों पर थूकने के क्या नुकसान हो सकते हैं। यहाँ-वहाँ, कहीं पर भी थूक देना, गलत आदतों का हिस्सा बना हुआ था। ये स्वच्छता और स्वास्थ्य को गंभीर चुनौती भी देता था। वैसे एक तरह से देखें तो हम हमेशा से ही इस समस्या को जानते रहें हैं, लेकिन, ये समस्या, समाज से समाप्त होने का नाम ही नहीं ले रही थी – अब वो समय आ गया है, कि इस बुरी आदत को, हमेशा-हमेशा के लिए ख़त्म कर दिया जाए। कहते भी हैं कि “better late than never”। तो, देर भले ही हो गई हो, लेकिन, अब, ये थूकने की आदत छोड़ देनी चाहिए ये बातें जहाँ basic hygiene का स्तर बढ़ाएंगी, वहीं, कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने में भी मदद करेगी।            

 

मेरे प्यारे देशवासियो, ये सुखद संयोग ही है, कि, आज जब आपसे मैं ‘मन की बात’ कर रहा हूँ तो अक्षय-तृतीया का पवित्र पर्व भी है। साथियो, ‘क्षय’ का अर्थ होता है विनाश लेकिन जो कभी नष्ट नहीं हो, जो कभी समाप्त नहीं हो वो ‘अक्षय’ है। अपने घरों में हम सब इस पर्व को हर साल मनाते हैं लेकिन इस साल हमारे लिए इसका विशेष महत्व है। आज के कठिन समय में यह एक ऐसा दिन है जो हमें याद दिलाता है कि हमारी आत्मा, हमारी भावना, ‘अक्षय’ है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ रास्ता रोकें, चाहे कितनी भी आपदाएं आएं, चाहे कितनी भी बीमारियोँ का सामना करना पड़े – इनसे लड़ने और जूझने की मानवीय भावनाएं अक्षय है। माना जाता है कि यही वो दिन है जिस दिन भगवान श्रीकृष्ण और भगवान सूर्यदेव के आशीर्वाद से पांडवों को अक्षय-पात्र मिला था। अक्षय-पात्र यानि एक ऐसा बर्तन जिसमें भोजन कभी समाप्त नही होता है। हमारे अन्नदाता किसान हर परिस्थिति में देश के लिए, हम सब के लिए, इसी भावना से परिश्रम करते हैं। इन्हीं के परिश्रम से, आज हम सबके लिए, गरीबों के लिए, देश के पास अक्षय अन्न-भण्डार है। इस अक्षय-तृतीया पर हमें अपने पर्यावरण, जंगल, नदियाँ और पूरे Ecosystem के संरक्षण के बारे में भी सोचना चाहिए, जो, हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अगर हम ‘अक्षय’ रहना चाहते हैं तो हमें पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारी धरती अक्षय रहे।

 

क्या आप जानते हैं कि अक्षय-तृतीया का यह पर्व, दान की शक्ति यानि Power of Giving का भी एक अवसर होता है! हम हृदय की भावना से जो कुछ भी देते हैं, वास्तव में महत्व उसी का होता है। यह बात महत्वपूर्ण नहीं है कि हम क्या देते हैं और कितना देते हैं। संकट के इस दौर में हमारा छोटा-सा प्रयास हमारे आस–पास के बहुत से लोगों के लिए बहुत बड़ा सम्बल बन सकता है। साथियो, जैन परंपरा में भी यह बहुत पवित्र दिन है क्योंकि पहले तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव के जीवन का यह एक महत्वपूर्ण दिन रहा है। ऐसे में जैन समाज इसे एक पर्व के रूप में मनाता है और इसलिए यह समझना आसान है कि क्यों इस दिन को लोग, किसी भी शुभ कार्य को प्रारंभ करना पसन्द करते हैं। चूँकि, आज कुछ नया शुरू करने का दिन है, तो, ऐसे में क्या हम सब मिलकर, अपने प्रयासों से, अपनी धरती को अक्षय और अविनाशी बनाने का संकल्प ले सकते हैं ? साथियो, आज भगवान बसवेश्वर जी की भी जयन्ती है। ये मेरा सौभाग्य रहा है कि मुझे भगवान बसवेश्वर की स्मृतियाँ और उनके सन्देश से बार–बार जुड़ने का, सीखने का, अवसर मिला है। देश और दुनिया में भगवान बसवेश्वर के सभी अनुयायियों को उनकी जयन्ती पर बहुत–बहुत शुभकामनाएँ।

 

साथियो, रमज़ान का भी पवित्र महीना शुरू हो चुका है। जब पिछली बार रमज़ान मनाया गया था तो किसी ने सोचा भी नहीं था कि इस बार रमज़ान में इतनी बड़ी मुसीबतों का भी सामना करना पड़ेगा। लेकिन, अब जब पूरे विश्व में यह मुसीबत आ ही गई है तो हमारे सामने अवसर है इस रमज़ान को संयम, सद्भावना, संवेदनशीलता और सेवा-भाव का प्रतीक बनाएं। इस बार हम, पहले से ज्यादा इबादत करें ताकि ईद आने से पहले दुनिया कोरोना से मुक्त हो जाये और हम पहले की तरह उमंग और उत्साह के साथ ईद मनायें। मुझे विश्वास है कि रमज़ान के इन दिनों में स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए कोरोना के खिलाफ़ चल रही इस लड़ाई को हम और मज़बूत करेंगे। सड़कों पर, बाज़ारों में, मोहल्लों में, physical distancing के नियमों का पालन अभी बहुत आवश्यक है। मैं, आज उन सभी Community leaders के प्रति भी आभार प्रकट करता हूँ जो                  दो गज दूरी और घर से बाहर नहीं निकलने को लेकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। वाक़ई कोरोना ने इस बार भारत समेत, दुनिया-भर में त्योहारों को मनाने का स्वरुप ही बदल दिया है, रंग-रूप बदल दिए हैं। अभी पिछले दिनों ही, हमारे यहाँ भी, बिहू, बैसाखी, पुथंडू, विशू, ओड़िया New Year ऐसे अनेक त्योहार आये। हमने देखा कि लोगों ने कैसे इन त्योहारों को घर में रहकर, और बड़ी सादगी के साथ और समाज के प्रति शुभचिंतन के साथ त्योहारों को मनाया। आमतौर पर, वे इन त्योहारों को अपने दोस्तों और परिवारों के साथ पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाते थे। घर के बाहर निकलकर अपनी ख़ुशी साझा करते थे। लेकिन इस बार, हर किसी नें संयम बरता। लॉकडाउन के नियमों का पालन किया। हमने देखा है कि इस बार हमारे ईसाई दोस्तों ने ‘ईस्टर(Easter)’ भी घर पर ही मनाया है। अपने समाज, अपने देश के प्रति ये ज़िम्मेदारी निभाना आज की बहुत बड़ी ज़रूरत है। तभी हम कोरोना के फैलाव को रोक पाने में सफल होंगे। कोरोना जैसी वैश्विक-महामारी को परास्त कर पाएँगे|

 

मेरे प्यारे देशवासियों, इस वैश्विक-महामारी के संकट के बीच आपके परिवार के एक सदस्य के नाते , और आप सब भी मेरे ही परिवार-जन हैं, तब कुछ संकेत करना,कुछ सुझाव देना, यह मेरा दायित्व भी बनता है। मेरे देशवासियों से, मैं आपसे, आग्रह करूँगा – हम कतई अति-आत्मविश्वास में न फंस जाएं, हम ऐसा विचार न पाल लें कि हमारे शहर में, हमारे गाँव में, हमारी गली में, हमारे दफ़्तर में, अभी तक कोरोना पहुंचा नहीं है, इसलिए अब पहुँचने वाला नहीं है। देखिये,ऐसी ग़लती कभी मत पालना। दुनिया का अनुभव हमें बहुत कुछ कह रहा है। और, हमारे यहाँ तो बार–बार कहा जाता है – ‘सावधानी हटी तो दुर्घटना घटी’| याद रखिये, हमारे पूर्वजों ने हमें इन सारे विषयों में बहुत अच्छा मार्ग-दर्शन किया है। हमारे पूर्वजों ने कहा है –

‘अग्नि: शेषम् ऋण: शेषम् ,

व्याधि: शेषम् तथैवच।

पुनः पुनः प्रवर्धेत,

तस्मात् शेषम् न कारयेत।|

अर्थात, हल्के में लेकर छोड़ दी गयी आग, कर्ज़ और बीमारी, मौक़ा पाते ही दोबारा बढ़कर ख़तरनाक हो जाती हैं। इसलिए इनका पूरी तरह उपचार बहुत आवश्यक होता है। इसलिए अति-उत्साह में, स्थानीय-स्तर पर, कहीं पर भी कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए। इसका हमेशा–हमेशा हमने ध्यान रखना ही होगा। और, मैं फिर एक बार कहूँगा – दो गज दूरी बनाए रखिये, खुद को स्वस्थ रखिये – “दो गज दूरी, बहुत है ज़रूरी”। आप सबके उत्तम स्वास्थ्य की कामना करते हुए, मैं मेरी बात को समाप्त करता हूँ। अगली ‘मन की बात’ के समय जब मिलें तब, इस वैश्विक-महामारी से कुछ मुक्ति की ख़बरें दुनिया भर से आएं, मानव-जात इन मुसीबतों से बाहर आए – इसी प्रार्थना के साथ आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।

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VRRK/SH/VK

मन की बात 2.0’ की 11वीं कड़ी में प्रधानमंत्री के सम्बोधन का मूल पाठ (26.04.2020)

मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार। आप सब lockdown में इस ‘मन की बात’ को सुन रहे हैं। इस ‘मन की बात’ के लिये आने वाले सुझाव, phone call की संख्या, सामान्य रूप से कई गुणा ज्यादा है। कई सारे विषयों को अपने अन्दर समेट, आपकी यह मन की बातें, मेरे तक, पहुँची हैं। मैंने कोशिश की है, कि, इनको ज्यादा-से-ज्यादा पढ़ पाऊँ, सुन पाऊँ। आपकी बातों से कई ऐसे पहलू जानने को मिले हैं, जिनपर, इस आपा-धापी में ध्यान ही नहीं जाता है। मेरा मन करता है, कि, युद्ध के बीच हो रही इस ‘मन की बात’ में, उन्हीं कुछ पहलुओं को, आप सभी देशवासियों के साथ बाटूँ।

 

साथियो, भारत की CORONA के खिलाफ़ लड़ाई सही मायने में  people driven है। भारत में CORONA के खिलाफ़ लड़ाई जनता लड़ रही है, आप लड़ रहे हैं, जनता के साथ मिलकर शासन, प्रशासन लड़ रहा है। भारत जैसा विशाल देश, जो विकास के लिए प्रयत्नशील है, ग़रीबी से निर्णायक लड़ाई लड़ रहा है। उसके पास, CORONA से लड़ने और जीतने का यही एक तरीका है। और, हम भाग्यशाली हैं कि, आज, पूरा देश, देश का हर नागरिक, जन-जन, इस लड़ाई का सिपाही है, लड़ाई का नेतृत्व कर रहा है। आप कहीं भी नज़र डालिये, आपको एहसास हो जायेगा कि भारत की लड़ाई people driven है। जब पूरा विश्व इस महामारी के संकट से जूझ रहा है। भविष्य में जब इसकी चर्चा       होगी, उसके तौर-तरीकों की चर्चा होगी, मुझे विश्वास है कि भारत की यह people driven लड़ाई, इसकी ज़रुर चर्चा होगी। पूरे देश में, गली-मोहल्लों में, जगह-जगह पर, आज लोग एक-दूसरे की सहायता के लिए आगे आये हैं। ग़रीबों के लिए खाने से लेकर, राशन की व्यवस्था हो, lockdown का पालन हो, अस्पतालों की व्यवस्था हो, medical equipment का देश में ही निर्माण हो – आज पूरा देश, एक लक्ष्य, एक दिशा, साथ-साथ चल रहा है। ताली, थाली, दीया, मोमबत्ती, इन सारी चीज़ों ने जो भावनाओं को जन्म दिया। जिस ज़ज्बे से देशवासियों ने, कुछ-न-कुछ करने की ठान ली – हर किसी को इन बातों ने प्रेरित किया है। शहर हो या गाँव, ऐसा लग रहा है, जैसे देश में एक बहुत बड़ा महायज्ञ चल रहा है, जिसमें, हर कोई अपना योगदान देने के लिये आतुर है। हमारे किसान भाई-बहनों को ही देखिये – एक तरफ, वो, इस महामारी के बीच अपने खेतों में दिन-रात मेहनत कर रहे हैं और इस बात की भी चिंता कर रहे हैं कि देश में कोई भी भूखा ना सोये। हर कोई, अपने सामर्थ्य के हिसाब से, इस लड़ाई को लड़ रहा है। कोई किराया माफ़ कर रहा है, तो कोई अपनी पूरी पेंशन या पुरस्कार में मिली राशि को, PM CARES  में जमा करा रहा है। कोई खेत की सारी सब्जियाँ दान दे रहा है, तो कोई, हर रोज़ सैकड़ों ग़रीबों को मुफ़्त भोजन करा रहा है। कोई mask बना रहा है, कहीं हमारे मजदूर भाई-बहन quarantine में रहते हुए, जिस school में रह रहे हैं, उसकी रंगाई-पुताई कर रहे हैं।

 

    साथियो, दूसरों की मदद के लिए, आपके भीतर, ह्रदय के किसी कोने में, जो ये उमड़ता-घुमड़ता भाव है ना ! वही, वही CORONA के खिलाफ, भारत की इस लड़ाई को ताकत दे रहा है, वही, इस लड़ाई को सच्चे मायने में people driven बना रहा है और हमने देखा है, पिछले कुछ साल में, हमारे देश में, यह मिज़ाज बना है, निरंतर मज़बूत होता रहा है। चाहे करोड़ों लोगों का gas subsidy छोड़ना हो, लाखों senior citizen का railway subsidy छोड़ना हो, स्वच्छ भारत अभियान का नेतृत्व लेना हो, toilet बनाने हो – अनगिनत बातें ऐसी हैं। इन सारी बातों से पता चलता है – हम सबको – एक मन, एक मजबूत धागे से पिरो दिया है। एक होकर देश के लिए कुछ करने की प्रेरणा दी है।

   

मेरे प्यारे देशवासियो, मैं पूरी नम्रतापूर्वक, बहुत ही आदर के साथ, आज, 130 करोड़ देशवासियों की इस भावना को, सर झुका करके, नमन करता हूँ। आप, अपनी भावना के अनुरूप, देश के लिए अपनी रूचि के हिसाब से, अपने समय के अनुसार, कुछ कर सके, इसके लिए सरकार ने एक Digital Platform भी तैयार किया है। ये platform हैcovidwarriors.gov.in मैं दोबारा बोलता हूँ – covidwarriors.gov.in सरकार ने इस platform के माध्यम से तमाम सामाजिक संस्थाओं के Volunteers, Civil Society के प्रतिनिधि और स्थानीय प्रशासन को एक-दूसरे से जोड़ दिया है। बहुत ही कम समय में, इस portal से सवाकरोड़ लोग जुड़ चुके हैं। इनमें Doctor, Nurses से लेकर हमारी ASHA, ANM बहनें, हमारे NCC, NSS के साथी, अलग-अलग field के तमाम professionals, उन्होंने, इस platform को, अपना platform बना लिया है। ये लोग स्थानीय स्तर पर crisis management plan बनाने वालों में और उसकी पूर्ति में भी बहुत मदद कर रहें हैं। आप भी covidwarriors.gov.in से जुड़कर, देश की सेवा कर सकते हैं, Covid Warrior बन सकते हैं।

    साथियो, हर मुश्किल हालात, हर लड़ाई, कुछ-न-कुछ सबक देती है, कुछ-न-कुछ सिखा करके जाती है, सीख देती है। कुछ संभावनाओं के मार्ग बनाती है और कुछ नई मंजिलों की दिशा भी देती है। इस परिस्थिति में आप सब देशवासियों ने जो संकल्प शक्ति दिखाई है, उससे, भारत में एक नए बदलाव की शुरुआत भी हुई है। हमारे Business, हमारे दफ्तर, हमारे शिक्षण संस्थान, हमारा Medical Sector, हर कोई, तेज़ी से, नये तकनीकी बदलावों की तरफ भी बढ़ रहें हैं। Technology के front  पर तो वाकई ऐसा लग रहा है कि देश का हर innovator नई परिस्तिथियों के मुताबिक कुछ-न-कुछ नया निर्माण कर रहा है।

 

    साथियो, देश जब एक team बन करके काम करता है, तब क्या कुछ होता है – ये हम अनुभव कर रहें हैं। आज केन्द्र सरकार हो, राज्य सरकार हो, इनका हर एक विभाग और संस्थान राहत के लिए मिल-जुल करके पूरी speed से काम कर रहे हैं।  हमारे Aviation Sector में काम कर रहे लोग हों, Railway कर्मचारी हों, ये दिन-रात मेहनत कर रहें हैं, ताकि, देशवासियों को कम-से-कम समस्या हो। आप में से शायद बहुत लोगों को मालूम होगा कि देश के हर हिस्से में दवाईयों को पहुँचाने के लिए ‘Lifeline Udan (लाइफ-लाइन उड़ान)नाम से एक विशेष अभियान चल रहा है। हमारे इन साथियों ने, इतने कम समय में, देश के भीतर ही, तीन लाख किलोमीटर की हवाई उड़ान भरी है और 500 टन से अधिक Medical सामग्री, देश के कोने-कोने में आप तक पहुँचाया है। इसी तरह, Railway के साथी, Lockdown में भी लगातार मेहनत कर रहें हैं, ताकि देश के आम लोगों को, जरुरी वस्तुओं की कमी न हो। इस काम के लिए भारतीय रेलवे करीब-करीब 60 से अधिक रेल मार्ग पर 100 से भी ज्यादा parcel train चला रही है। इसी तरह दवाओं की आपूर्ति में, हमारे डाक विभाग के लोग, बहुत अहम भूमिका निभा रहें हैं। हमारे ये सभी साथी, सच्चे अर्थ में, कोरोना के warrior ही हैं।

 

साथियो, ‘प्रधानमंत्री ग़रीब कल्याण पैकेज़के तहत, ग़रीबों के Account में पैसे, सीधे transfer किए जा रहे हैं।वृद्धावस्था पेंशनजारी की गई है। गरीबों को तीन महीने के मुफ़्त गैस सिलेंडर, राशन जैसी सुविधायें भी दी जा रही हैं। इन सब कामों में, सरकार के अलग-अलग विभागों के लोग, बैंकिंग सेक्टर के लोग, एक team की तरह दिन-रात काम कर रहे हैं। और मैं, हमारे देश की राज्य सरकारों की भी इस बात के लिए प्रशंसा करूँगा कि वो इस महामारी से निपटने में बहुत सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। स्थानीय प्रशासन, राज्य सरकारें जो जिम्मेदारी निभा रही हैं, उसकी, कोरोना के खिलाफ़ लड़ाई में बहुत बड़ी भूमिका है। उनका ये परिश्रम बहुत प्रशंसनीय है।

 

मेरे प्यारे देशवासियो, देशभर से स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोगों ने, अभी हाल ही में जो अध्यादेश लाया गया है, उस पर अपना संतोष व्यक्त किया है।  इस अध्यादेश में, कोरोना warriors के साथ हिंसा, उत्पीड़न और उन्हें किसी रूप में चोट पहुचाने वालों के खिलाफ़ बेहद सख्त़ सज़ा का प्रावधान किया गया है। हमारे डॉक्टर, Nurses , para-medical staff, Community Health Workers और ऐसे सभी लोग, जो देश को कोरोना-मुक्तबनाने में दिन-रात जुटे हुए हैं,उनकी रक्षा करने के लिए ये कदम बहुत ज़रुरी था।

मेरे प्यारे देशवासियों, हम सब अनुभव कर रहे हैं कि महामारी के खिलाफ़, इस लड़ाई के दौरान हमें अपने जीवन को, समाज को, हमारे आप-पास हो रही घटनाओं को, एक fresh नज़रिए से देखने का अवसर भी मिला है। समाज के नज़रिये में भी व्यापक बदलाव आया है। आज अपने जीवन से जुड़े हर व्यक्ति की अहमियत का हमें आभास हो रहा है। हमारे घरों में काम करने वाले लोग हों, हमारी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए काम करने वाले हमारे सामान्य कामगार हों, पड़ोस की दुकानों में काम करने वाले लोग हों, इन सबकी कितनी बड़ी भूमिका है – हमें यह अनुभव हो रहा है। इसी तरह, ज़रुरी सेवाओं की delivery करने वाले लोग, मंडियों में काम करने वाले हमारे मज़दूर भाई-बहन, हमारे आस-पड़ोस के ऑटो-चालक, रिक्शा-चालक – आज हम अनुभव कर रहे हैं कि इन सब के बिना हमारा जीवन कितना मुश्किल हो सकता है।

 

आज कल Social Media में हम सबलोग लगातार देख रहे हैं कि  LOCKDOWN के दौरान, लोग अपने इन साथियों को न सिर्फ़ याद कर रहे है, उनकी ज़रूरतों का ध्यान रख रहे हैं, बल्कि उनके बारे में, बहुत सम्मान से लिख भी रहे हैं। आज, देश के हर कोने से ऐसी तस्वीरे आ रही हैं कि लोग सफाई-कर्मियों पर पुष्प-वर्षा कर रहे हैं। पहले, उनके काम को संभवतः आप भी कभी notice नहीं करते थे। डॉक्टर हों, सफाईकर्मी हों, अन्य सेवा करने वाले लोग हों – इतना ही नहीं, हमारी पुलिस-व्यवस्था को लेकर भी आम लोगों की सोच में काफ़ी बदलाव हुआ है। पहले पुलिस के विषय में सोचते ही नकारात्मकता के सिवाय, हमें कुछ नज़र नहीं आता था। हमारे पुलिसकर्मी आज ग़रीबों, ज़रुरतमंदो को खाना पंहुचा रहे हैं, दवा पंहुचा रहे हैं। जिस तरह से हर मदद के लिए पुलिस सामने आ रही है इससे POLICING का मानवीय और संवेदनशील पक्ष हमारे सामने उभरकर के आया है, हमारे मन को झकझोर दिया है, हमारे दिल को छू लिया है। एक ऐसा अवसर है जिसमें आम-लोग, पुलिस से भावात्मक तरीक़े से जुड़ रहे हैं। हमारे पुलिसकर्मियों ने, इसे जनता की सेवा के एक अवसर के रूप में लिया है और मुझे पूरा विश्वास है – इन घटनाओं से, आने वाले समय में, सच्चे अर्थ में, बहुत ही सकारात्मक बदलाव आ सकता है और हम सबने इस सकारात्मकता को कभी भी नकारात्मकता के रंग से रंगना नहीं है।

 

साथियो, हम अक्सर सुनते हैं प्रकृति, विकृति और संस्कृति, इन शब्दों को एक साथ देखें और इसके पीछे के भाव को देखें तो आपको जीवन को समझने का भी एक नया द्वार खुलता हुआ दिखेगा। अगर, मानव- प्रकृति की चर्चा करें तो ये मेरा है’, ‘मैं इसका उपयोग करता हूँइसको और इस भावना को, बहुत स्वाभाविक माना जाता है। किसी को इसमें कोई ऐतराज़ नहीं होता। इसे हम प्रकृतिकह सकते हैं। लेकिन जो मेरा नहीं है’, ‘जिस पर मेरा हक़ नहीं हैउसे मैं दूसरे से छीन लेता हूँ, उसे छीनकर उपयोग में लाता हूँ तब हम इसे विकृतिकह सकते हैं। इन दोनों से परे, प्रकृति और विकृति से ऊपर, जब कोई संस्कारित-मन सोचता है या व्यवहार करता है तो हमें संस्कृतिनज़र आती है। जब कोई अपने हक़ की चीज़, अपनी मेहनत से कमाई चीज़, अपने लिए ज़रूरी चीज़, कम हो या अधिक, इसकी परवाह किये बिना, किसी व्यक्ति की ज़रूरत को देखते हुए, खुद की चिंता छोड़कर, अपने हक़ के हिस्से को बाँट करके किसी दूसरे की ज़रुरत पूरी करता है – वही तो संस्कृतिहै। साथियो, जब कसौटी का काल होता है, तब इन गुणों का परीक्षण होता है|                              

   

आपने पिछले दिनों देखा होगा, कि, भारत ने अपने संस्कारो के अनुरूप, हमारी सोच के अनुरूप, हमारी संस्कृति का निर्वहन करते हुए कुछ फ़ैसले लिए हैं। संकट की इस घड़ी में, दुनिया के लिए भी, समृद्ध  देशों के लिए भी, दवाईयों का संकट बहुत ज्यादा रहा है। एक ऐसा समय है की अगर भारत दुनिया को दवाईयां न भी दे तो कोई भारत को दोषी नहीं मानता। हर देश समझ रहा है कि भारत के लिए भी उसकी प्राथमिकता अपने नागरिकों का जीवन बचाना है। लेकिन साथियो,  भारत ने, प्रकृति, विकृति की सोच से परे होकर फैसला लिया। भारत ने अपने संस्कृति के अनुरूप फैसला लिया। हमने भारत की आवश्यकताओं के लिए जो करना था, उसका प्रयास तो बढ़ाया ही, लेकिन, दुनिया-भर से आ रही मानवता की रक्षा की पुकार पर भी, पूरा-पूरा ध्यान दिया। हमने विश्व के हर जरूरतमंद तक दवाइयों को पहुँचाने का बीड़ा उठाया और मानवता के इस काम को करके दिखाया। आज जब मेरी अनेक देशों के राष्ट्राध्यक्षों से फ़ोन पर बात होती है तो वो भारत की जनता का आभार जरुर व्यक्त करते है। जब वो लोग कहते हैं  ‘Thank You India , Thank You People of India’  तो देश के लिए गर्व और बढ़ जाता है। इसी तरह इस समय दुनिया-भर में भारत के आयुर्वेद और योग के महत्व को भी लोग बड़े विशिष्ट-भाव से देख रहे हैं। Social Media पर देखिये, हर तरफ immunity बढ़ाने के लिए, किस तरह से, भारत के आयुर्वेद और योग की चर्चा हो रही है। कोरोना की दृष्टि से, आयुष मंत्रालय ने immunity बढ़ाने के लिए जो protocol दिया था, मुझे विश्वास है कि आप लोग, इसका प्रयोग, जरुर कर रहे होंगे। गर्म पानी, काढ़ा और जो अन्य दिशा-निर्देश, आयुष मंत्रालय ने जारी किये हैं, वो, आप अपनी दिनचर्या में शामिल करेगें तो आपको बहुत लाभ होगा।

 

साथियो, वैसे ये दुर्भाग्य रहा है कि कई बार हम अपनी ही शक्तियाँ और समृद्ध परम्परा को पहचानने से इंकार कर देते हैं। लेकिन, जब विश्व का कोई दूसरा देश, evidence based research के आधार पर वही बात करता है। हमारा ही formula हमें सिखाता है  तो हम उसे हाथों-हाथ ले लेते हैं। संभवत:, इसके पीछे एक बहुत बड़ा कारण – सैकड़ों वर्षों की हमारी गुलामी का कालखंड रहा है। इस वजह से कभी-कभी, हमें, अपनी ही शक्ति पर विश्वास नहीं होता है। हमारा आत्म-विश्वास कम नज़र आता है। इसलिए, हम अपने देश की अच्छी बातों को, हमारे पारम्परिक सिद्दांतों को, evidence based research के आधार पर, आगे बढ़ाने के बजाय उसे छोड़ देते हैं, उसे, हीन समझने लगते हैं। भारत की युवा-पीढ़ी को, अब इस चुनौती को स्वीकार करना होगा। जैसे, विश्व ने योग को सहर्ष स्वीकार किया है, वैसे ही, हजारों वर्षों पुराने, हमारे आयुर्वेद के सिद्दांतों को भी विश्व अवश्य स्वीकार करेगा। हाँ! इसके लिए युवा-पीढ़ी को संकल्प लेना होगा और दुनिया जिस भाषा में समझती है उस वैज्ञानिक भाषा में हमें समझाना होगा, कुछ करके दिखाना होगा।

 

साथियो, वैसे covid-19 के कारण कई सकारात्मक बदलाव, हमारे काम करने के तरीके, हमारी जीवन-शैली और हमारी आदतों में भी स्वाभाविक रूप से अपनी जगह बना रहे हैं। आपने सबने भी महसूस किया होगा, इस संकट ने, कैसे अलग-अलग विषयों पर, हमारी समझ और हमारी चेतना को जागृत किया है। जो असर, हमें अपने आस-पास देखने को मिल रहे हैं, इनमें सबसे पहला है – mask पहनना और अपने चेहरे को ढ़ककर रखना। कोरोना की वजह से, बदलते हुए हालत में, mask भी, हमारे जीवन का हिस्सा बन रहा है। वैसे, हमें इसकी भी आदत कभी नहीं रही कि हमारे आस-पास के बहुत सारे लोग mask में दिखें, लेकिन, अब हो यही रहा है। हाँ! इसका ये मतलब नहीं है, जो mask लगाते हैं वे सभी बीमार हैं। और, जब मैं  mask की बात करता हूँ, तो, मुझे पुरानी बात याद आती हैं। आप सबको भी याद होगा। एक जमाना था, कि, हमारे देश के कई ऐसे इलाके होते थे, कि, वहाँ अगर कोई नागरिक फल खरीदता हुआ दिखता था तो आस-पड़ोस के लोग उसको जरुर पूछते थे – क्या घर में कोई बीमार है? यानी, फल – मतलब, बीमारी में ही खाया जाता है – ऐसी एक धारणा बनी हुई थी। हालाँकि, समय बदला और ये धारणा भी बदली। वैसे ही mask को लेकर भी धारणा अब बदलने वाली ही है। आप देखियेगा, mask, अब सभ्य-समाज का प्रतीक बन जायेगा। अगर, बीमारी से खुद को बचना है, और, दूसरों को भी बचाना है, तो, आपको mask लगाना पड़ेगा, और, मेरा तो simple सुझाव रहता है – गमछा, मुहँ ढ़कना है।

   

साथियो, हमारे समाज में एक और बड़ी जागरूकता ये आयी है कि अब सभी लोग ये समझ रहे हैं कि सार्वजनिक स्थानों पर थूकने के क्या नुकसान हो सकते हैं। यहाँ-वहाँ, कहीं पर भी थूक देना, गलत आदतों का हिस्सा बना हुआ था। ये स्वच्छता और स्वास्थ्य को गंभीर चुनौती भी देता था। वैसे एक तरह से देखें तो हम हमेशा से ही इस समस्या को जानते रहें हैं, लेकिन, ये समस्या, समाज से समाप्त होने का नाम ही नहीं ले रही थी – अब वो समय आ गया है, कि इस बुरी आदत को, हमेशा-हमेशा के लिए ख़त्म कर दिया जाए। कहते भी हैं कि “better late than never”। तो, देर भले ही हो गई हो, लेकिन, अब, ये थूकने की आदत छोड़ देनी चाहिए ये बातें जहाँ basic hygiene का स्तर बढ़ाएंगी, वहीं, कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने में भी मदद करेगी।            

 

मेरे प्यारे देशवासियो, ये सुखद संयोग ही है, कि, आज जब आपसे मैं ‘मन की बात’ कर रहा हूँ तो अक्षय-तृतीया का पवित्र पर्व भी है। साथियो, ‘क्षय’ का अर्थ होता है विनाश लेकिन जो कभी नष्ट नहीं हो, जो कभी समाप्त नहीं हो वो ‘अक्षय’ है। अपने घरों में हम सब इस पर्व को हर साल मनाते हैं लेकिन इस साल हमारे लिए इसका विशेष महत्व है। आज के कठिन समय में यह एक ऐसा दिन है जो हमें याद दिलाता है कि हमारी आत्मा, हमारी भावना, ‘अक्षय’ है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ रास्ता रोकें, चाहे कितनी भी आपदाएं आएं, चाहे कितनी भी बीमारियोँ का सामना करना पड़े – इनसे लड़ने और जूझने की मानवीय भावनाएं अक्षय है। माना जाता है कि यही वो दिन है जिस दिन भगवान श्रीकृष्ण और भगवान सूर्यदेव के आशीर्वाद से पांडवों को अक्षय-पात्र मिला था। अक्षय-पात्र यानि एक ऐसा बर्तन जिसमें भोजन कभी समाप्त नही होता है। हमारे अन्नदाता किसान हर परिस्थिति में देश के लिए, हम सब के लिए, इसी भावना से परिश्रम करते हैं। इन्हीं के परिश्रम से, आज हम सबके लिए, गरीबों के लिए, देश के पास अक्षय अन्न-भण्डार है। इस अक्षय-तृतीया पर हमें अपने पर्यावरण, जंगल, नदियाँ और पूरे Ecosystem के संरक्षण के बारे में भी सोचना चाहिए, जो, हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अगर हम ‘अक्षय’ रहना चाहते हैं तो हमें पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारी धरती अक्षय रहे।

 

क्या आप जानते हैं कि अक्षय-तृतीया का यह पर्व, दान की शक्ति यानि Power of Giving का भी एक अवसर होता है! हम हृदय की भावना से जो कुछ भी देते हैं, वास्तव में महत्व उसी का होता है। यह बात महत्वपूर्ण नहीं है कि हम क्या देते हैं और कितना देते हैं। संकट के इस दौर में हमारा छोटा-सा प्रयास हमारे आस–पास के बहुत से लोगों के लिए बहुत बड़ा सम्बल बन सकता है। साथियो, जैन परंपरा में भी यह बहुत पवित्र दिन है क्योंकि पहले तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव के जीवन का यह एक महत्वपूर्ण दिन रहा है। ऐसे में जैन समाज इसे एक पर्व के रूप में मनाता है और इसलिए यह समझना आसान है कि क्यों इस दिन को लोग, किसी भी शुभ कार्य को प्रारंभ करना पसन्द करते हैं। चूँकि, आज कुछ नया शुरू करने का दिन है, तो, ऐसे में क्या हम सब मिलकर, अपने प्रयासों से, अपनी धरती को अक्षय और अविनाशी बनाने का संकल्प ले सकते हैं ? साथियो, आज भगवान बसवेश्वर जी की भी जयन्ती है। ये मेरा सौभाग्य रहा है कि मुझे भगवान बसवेश्वर की स्मृतियाँ और उनके सन्देश से बार–बार जुड़ने का, सीखने का, अवसर मिला है। देश और दुनिया में भगवान बसवेश्वर के सभी अनुयायियों को उनकी जयन्ती पर बहुत–बहुत शुभकामनाएँ।

 

साथियो, रमज़ान का भी पवित्र महीना शुरू हो चुका है। जब पिछली बार रमज़ान मनाया गया था तो किसी ने सोचा भी नहीं था कि इस बार रमज़ान में इतनी बड़ी मुसीबतों का भी सामना करना पड़ेगा। लेकिन, अब जब पूरे विश्व में यह मुसीबत आ ही गई है तो हमारे सामने अवसर है इस रमज़ान को संयम, सद्भावना, संवेदनशीलता और सेवा-भाव का प्रतीक बनाएं। इस बार हम, पहले से ज्यादा इबादत करें ताकि ईद आने से पहले दुनिया कोरोना से मुक्त हो जाये और हम पहले की तरह उमंग और उत्साह के साथ ईद मनायें। मुझे विश्वास है कि रमज़ान के इन दिनों में स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए कोरोना के खिलाफ़ चल रही इस लड़ाई को हम और मज़बूत करेंगे। सड़कों पर, बाज़ारों में, मोहल्लों में, physical distancing के नियमों का पालन अभी बहुत आवश्यक है। मैं, आज उन सभी Community leaders के प्रति भी आभार प्रकट करता हूँ जो                  दो गज दूरी और घर से बाहर नहीं निकलने को लेकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। वाक़ई कोरोना ने इस बार भारत समेत, दुनिया-भर में त्योहारों को मनाने का स्वरुप ही बदल दिया है, रंग-रूप बदल दिए हैं। अभी पिछले दिनों ही, हमारे यहाँ भी, बिहू, बैसाखी, पुथंडू, विशू, ओड़िया New Year ऐसे अनेक त्योहार आये। हमने देखा कि लोगों ने कैसे इन त्योहारों को घर में रहकर, और बड़ी सादगी के साथ और समाज के प्रति शुभचिंतन के साथ त्योहारों को मनाया। आमतौर पर, वे इन त्योहारों को अपने दोस्तों और परिवारों के साथ पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाते थे। घर के बाहर निकलकर अपनी ख़ुशी साझा करते थे। लेकिन इस बार, हर किसी नें संयम बरता। लॉकडाउन के नियमों का पालन किया। हमने देखा है कि इस बार हमारे ईसाई दोस्तों ने ‘ईस्टर(Easter)’ भी घर पर ही मनाया है। अपने समाज, अपने देश के प्रति ये ज़िम्मेदारी निभाना आज की बहुत बड़ी ज़रूरत है। तभी हम कोरोना के फैलाव को रोक पाने में सफल होंगे। कोरोना जैसी वैश्विक-महामारी को परास्त कर पाएँगे|

 

मेरे प्यारे देशवासियों, इस वैश्विक-महामारी के संकट के बीच आपके परिवार के एक सदस्य के नाते , और आप सब भी मेरे ही परिवार-जन हैं, तब कुछ संकेत करना,कुछ सुझाव देना, यह मेरा दायित्व भी बनता है। मेरे देशवासियों से, मैं आपसे, आग्रह करूँगा – हम कतई अति-आत्मविश्वास में न फंस जाएं, हम ऐसा विचार न पाल लें कि हमारे शहर में, हमारे गाँव में, हमारी गली में, हमारे दफ़्तर में, अभी तक कोरोना पहुंचा नहीं है, इसलिए अब पहुँचने वाला नहीं है। देखिये,ऐसी ग़लती कभी मत पालना। दुनिया का अनुभव हमें बहुत कुछ कह रहा है। और, हमारे यहाँ तो बार–बार कहा जाता है – ‘सावधानी हटी तो दुर्घटना घटी’| याद रखिये, हमारे पूर्वजों ने हमें इन सारे विषयों में बहुत अच्छा मार्ग-दर्शन किया है। हमारे पूर्वजों ने कहा है –

‘अग्नि: शेषम् ऋण: शेषम् ,

व्याधि: शेषम् तथैवच।

पुनः पुनः प्रवर्धेत,

तस्मात् शेषम् न कारयेत।|

अर्थात, हल्के में लेकर छोड़ दी गयी आग, कर्ज़ और बीमारी, मौक़ा पाते ही दोबारा बढ़कर ख़तरनाक हो जाती हैं। इसलिए इनका पूरी तरह उपचार बहुत आवश्यक होता है। इसलिए अति-उत्साह में, स्थानीय-स्तर पर, कहीं पर भी कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए। इसका हमेशा–हमेशा हमने ध्यान रखना ही होगा। और, मैं फिर एक बार कहूँगा – दो गज दूरी बनाए रखिये, खुद को स्वस्थ रखिये – “दो गज दूरी, बहुत है ज़रूरी”। आप सबके उत्तम स्वास्थ्य की कामना करते हुए, मैं मेरी बात को समाप्त करता हूँ। अगली ‘मन की बात’ के समय जब मिलें तब, इस वैश्विक-महामारी से कुछ मुक्ति की ख़बरें दुनिया भर से आएं, मानव-जात इन मुसीबतों से बाहर आए – इसी प्रार्थना के साथ आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।

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VRRK/SH/VK

घुटन से बचा सकता है मास्क पर इस हर्बल स्प्रे काछिड़काव

घुटन से बचा सकता है मास्क पर इस हर्बल स्प्रे का छिड़काव

यह हर्बल डीकन्जेस्टैंट स्प्रे किसी इन्हैलर की तरह काम करता है

इसका उपयोग पूरी तरह से सुरक्षित है

स्प्रे करने के बाद मास्क का उपयोग करने पर नासिका और श्वसन तंत्र खुल जाता है और फिर सांस लेने में परेशानी नहीं होती

कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए मास्क के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। पुलिस, डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मियों और अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को लंबे समय मास्क लगाना पड़ रहा है, जिससे उन्हें कई बार सांस लेने में घुटन महसूस होती है। भारतीय वैज्ञानिकों ने एक हर्बल डीकन्जेस्टैंट स्प्रे विकसित किया है, जो इस समस्या से निजात दिलाने में मददगार हो सकता है।

यह हर्बल डीकन्जेस्टैंट स्प्रेकिसीइन्हैलर की तरह काम करता है, जिसे नेशनल बोटैनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनबीआरआई) के शोधकर्ताओं द्वारा तैयार किया गया है।लखनऊ स्थित एनबीआरआई काउंसिल ऑफ साइंटिफिक ऐंड इंडस्ट्रियल रिसर्च की एक प्रयोगशाला है, जिसे मुख्य रूप से वनस्पतियों पर किए जाने वाले उसके अनुसंधान कार्यों के लिए जाना जाता है। एनबीआरआई के इस हर्बल स्प्रे के शुरुआती नतीजे बेहद शानदार मिले हैं। देर तक मास्क पहनने वाले लोगों को इससे काफी राहत मिल रही है।

एनबीआरआई के मुख्य वैज्ञानिक डॉ शरद श्रीवास्तव ने इंडिया साइंस वायर को बताया कि “इस हर्बल डीकन्जेस्टैंट स्प्रे को औषधीय और सगंध पौधों से तैयार किया गया है और इसका उपयोग पूरी तरह से सुरक्षित है।जिन पादप तत्वों का उपयोग इस स्प्रे में किया गया है, उनके नाम का खुलासा बौद्धिक संपदा संबंधी कारणों से अभी नहीं किया जा सकता। इसेसिर्फ एक बार मास्क पर स्प्रे करना होता है। स्प्रे करने के बाद मास्क का उपयोग करने पर नासिका और श्वसन तंत्र खुल जाता है और फिर सांस लेने में परेशानी नहीं होती।”

इस स्प्रे को आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के आधार पर तैयार किया गया है। संस्थान की योजना इस इन्हैलर की तकनीक को व्यावसायिक उत्पादन के लिए हस्तांतरित करने की है, ताकि बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन किया जा सके और इसे जरूरतमंदों तक पहुँचाया जा सके.

भारतीय रेलवे में वापस पटरी पर आ रहा है रेल कोच का निर्माणकार्य

भारतीय रेलवे की उत्पादन इकाई ‘रेल कोच फैक्ट्री (आरसीएफ), कपूरथला’ ने 28 दिनों के देशव्‍यापी लॉकडाउन के बाद 23 अप्रैल, 2020 को अपनी उत्पादन प्रक्रिया फिर से शुरू कर दी है। कोविड-19 के खिलाफ अथक लड़ाई के बीच गृह मंत्रालय और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी सभी सुरक्षा सावधानियों एवं दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए इस कारखाने को फि‍र से खोला गया है। कुल मिलाकर 3744 कर्मचारियों को काम शुरू करने की अनुमति दी गई है जो आरसीएफ परिसर टाउनशिप के अंदर रह रहे हैं। गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों और राज्य सरकारों की एडवाइजरी के अनुसार भारतीय रेलवे की अन्य उत्पादन इकाइयां भी इस बारे में परामर्श मिलते ही निर्माण कार्य फिर से शुरू कर देंगी।

निर्माण के लिए संसाधनों की सीमित उपलब्धता के बावजूद आरसीएफ कपूरथला ने सिर्फ दो कार्य दिवसों में ही दो कोच तैयार कर लिए हैं। इनमें एक-एक एलएचबी हाई कैपेसिटी पार्सल वैन और लगेज कम जेनरेटर कार शामिल हैं जो क्रमशः 23 अप्रैल, 2020 और 24 अप्रैल, 2020 को तैयार की गई हैं।

लॉकडाउन के बाद ड्यूटी में शामिल होने वाले सभी कर्मचारियों को एक-एक सेफ्टी किट जारी की गई है जिसमें मास्क, सैनिटाइजर की बोतल और साबुन शामिल हैं। अनुमति प्राप्‍त सभी कर्मचारियों को कोच के निर्माण के लिए कारखाने में ड्यूटी पर बुलाया गया है। प्रशासनिक कार्यालयों में सभी अधिकारी अपने-अपने कार्यालयों में ड्यूटी पर वापस आ गए हैं और 33 प्रतिशत कर्मचारियों को रोटेशन रोस्टर के आधार पर ड्यूटी पर बुलाया जा रहा है। कोविड जागरूकता पोस्टरों के साथ-साथ उन सभी सुरक्षा निर्देशों को कार्यशाला, कार्यालयों और आवासीय परिसरों में प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित किया गया है जिनका पालन किया जाना है। सभी श्रमिकों को उनके पर्यवेक्षकों और अधिकारियों द्वारा नियमित रूप से परामर्श दिया जा रहा है, ताकि कार्य स्थल पर सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन किया जा सके। कर्मचारियों के लिए शॉप फ्लोर और कार्यालयों में हैंड्स फ्री लिक्विड सोप डिस्पेंसर और वॉश बेसिन पर्याप्त संख्‍या में उपलब्ध कराए गए हैं।

श्रमिकों को तीन शिफ्टों में अलग-अलग समय पर बुलाया जा रहा है। सभी तीनों पारियों (शिफ्ट) के लिए प्रवेश के समय, दोपहर के भोजन के समय और बाहर निकलने के समय के बीच काफी अंतर रखा गया है। प्रवेश द्वारों पर थर्मल स्कैनर द्वारा हर कर्मचारी की स्‍क्रीनिंग की जा रही है, ताकि उनके शरीर के तापमान को मापा जा सके। आरसीएफ परिसर में प्रवेश करने वाले प्रत्येक वाहन को प्रवेश द्वारों पर उपलब्‍ध फुहार प्रक्षालक सुरंग द्वारा सैनिटाइज किया जा रहा है। सभी कर्मचारी अपने-अपने कार्य स्थलों पर सामाजिक दूरी बनाए रखने के प्रोटोकॉल और समस्‍त सुरक्षा एवं स्वच्छता दिशा-निर्देशों का पालन कर रहे हैं। आरसीएफ परिसर में स्थित लाला लाजपत रेल अस्पताल ने कोविड के संक्रमण के किसी भी लक्षण वाले रोगियों के लिए अलग-अलग काउंटर और ओपीडी सेल उपलब्ध कराए हैं। कोविड से संबंधित किसी भी मामले को संभालने के लिए आरसीएफ परिसर में 24 बेड वाला क्‍वारंटाइन केंद्र और एलएलआर अस्पताल में 8 बेड वाला आइसोलेशन वार्ड पूरी तरह से तैयार है।

राज्यों में लॉकडाउन के आदेशों को ध्‍यान में रखते हुए अन्य इकाइयां भी राज्य सरकारों से मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर देंगी।L

बच्चे की आंखें सुबह चिपक रही हैं तो बिता डॉक्टरी सलाह के दवा न डालें

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बच्चों के सुबह उठते ही आंखें चिपक रही हैं, उसमें से सफेद गंदगी जैसा चिपचिपा पदार्थ निकलता है तो मेडिकल स्टोर से दवा लेकर न डालें। इससे ग्लूकोमा कैटरेक्ट बीमारी का खतरा रहता है। अक्सर यह अभिभावक लापरवाही करते हैं क्योंकि कई आइ ड्रॉप में स्टेरॉइड होता है। इससे परेशानी बढ़ सकती है

कारण- गर्मी बढ़ने पर यह परेशानी अधिक हो जाती है। यह एक प्रकार की आंखों की एलर्जी है जिसे एलर्जिक कंजक्टिवाइटिस कहते हैं। यह पराग कणों (पोलन), जानवरों के फर, प्रदूषण या धूल आदि से भी होती है। इसमें गंदगी आने के साथ आंखों में लालपन, खुजली भी होती है। अगर ऐसी समस्या है तो डॉक्टर को दिखाएं।

इस तरह करें बचाव

दिन में 2-3 बार आंखों को अच्छे से धोएं। खासतौर पर जब बच्चा बाहर से खेलकर या स्कूल से घर आता है।

पैरेंट्स को चाहिए कि हाइजीन का ध्यान रखें। गंदे हाथों से चेहरा न छुषं।
बच्चों को आंखों को मसलने न दें। लगातार आंखों को खुजलाने से कॉर्निया को नुकसान हो सकता है।
एक माह पुरानी खुली आइ ड्रॉप का इस्तेमाल न करें।
यह एलर्जी एक उम्र के बाद स्वतः ठीक हो जाती है। ज्यादा परेशान न हो। यह एकदूसरे से नहीं फैलता है।
अगर एलर्जी शरीर के दूसरे हिस्से में है जैसे नाक बहना या स्किन में एलर्जी तो शिशु रोग विशेषज्ञ को दिखाएं।
बच्चे की आंखों में आइ ड्रॉप डालते हैं तो हाथ अच्छी तरह धो लें।

जानिए क्यों कहा जा रहा है काढ़ा पीने के लिए

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आयुष मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि हर्बल चाय (काढ़ा) पीना. चाहिए इससे इम्युनिटी बढ़ती है। इसमें तुलसी पत्ती, दालचीनी, कालीमिर्च, सौंठ, मुनका, गुड़ व नींबू मिलाएं। जानते हैं कि इनके फायदों के बारे में-

तुलसी पत्ती-

यह किटाएणु नाशक है। मौसमी और सांस संबंधी बीमारियों में बचाव करती है। ज्वर नाशक है। यह श्वसन तंत्र को मजबूत बनाती है।

दालचीनी-

इसमें मिलने वाले तत्व श्वसन तंत्र को मजबूत कर इंफेक्शन से बचाव करते हैं। इसको एक से तीन ग्राम की मात्रा में ले सकते है। टीबी के इलाज में भी इसक उपयोग होता है

कालीमिर्च-

इसमें पाइपरीन होता है जो ज्वर और किटाणु रोधी होता है। सांस संबंधी बीमारियों में लाभ पहुंचाती है। यह औषधि को कोशिकाओं तक पहुंचाने में मदद करती और दवाइयों की क्षमता को बढ़ा देती है।

सैौंठ-

यह त्रिकटु का एक खास द्रव्य होता है। इसमें जिंजोरॉल होता है जो सांस संबंधी बीमारियों से बचाव करती है। पाचन भी ठीक रहता है। खांसी होने पर मुंह में सैंठ रखने से लाभ मिलता है।

मुनक्का-

यह शरीर का बल बढ़ाता है। सर्दी-जुकाम और फेफड़ों से जुड़े रोगों में इसका सेवन फायदेमंद होता है। इसमें आयरन और बी कॉम्पलेक्स होता है। खून की कमी को दूर करता है।

निंबू-

यह पीएच लेवल को सही रखता है। इसमें विटामिन सी आयरन, मैग्नीशियम, फास्फोरस, कैल्शियम, पोटेशियम और जिंक जैसे मिनरल होते हैं। इम्युनिटी भी बढ़ती है।

गुड़ के फायदे

इसमें मल्टी विटामिन्‍स होते हैं। इससे शरीर को मजबूती मिलती है। आयुर्वेद के अनुसार पुराना गुड़ कफ का शमन करता है। काढ़े में कफ शमन और स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है।